होम लोन एक लंबी अवधि का कर्ज़ होता है, जिसे उम्र भर भरा गया तो इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ती है. इसलिए कई बार हम होम लोन को जल्द से जल्द चुकाकर कर्जमुक्त होने की सोचते हैं, लेकिन तरीका समझ नहीं आता कि कैसे करें. इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही 6 स्मार्ट तरीके बताएंगे जिनका इस्तेमाल करके आप अपना होम लोन वक्त से काफी पहले खत्म कर सकते हैं और बाकी जिंदगी बिना मंथली EMI की चिंता के गुजार सकते हैं. ध्यान रहे ये सिर्फ सुझाव हैं, फैसला करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति का आंकलन जरूर करें.
1- ज्यादा डाउन पेमेंट करें
घर खरीदते समय अगर आप अपनी बचत से ज्यादा रकम डाउन पेमेंट के रूप में देते हैं, तो आपको कम होम लोन लेना पड़ेगा. इससे आपकी EMI और कुल ब्याज का बोझ घट सकता है. इसके अलावा, ज्यादा डाउन पेमेंट से लोन के लिए आवेदन करते समय आपकी वित्तीय स्थिति मजबूत दिख सकती है. हालांकि, सिर्फ ज्यादा डाउन पेमेंट करने से बैंक कम ब्याज पर लोन देगा इसकी गारंटी नहीं है. ब्याज दर आपकी आय, क्रेडिट स्कोर और बैंक की शर्तों पर भी निर्भर करती है. घर की कीमत का 30–40% डाउन पेमेंट देना एक विकल्प हो सकता है, लेकिन सही रकम तय करते समय अपनी बचत, आमदनी और दूसरे जरूरी खर्चों का ध्यान रखना चाहिए.
मान लीजिए एक घर की कीमत ₹80 लाख है और आप 8.5% सालाना ब्याज दर पर 20 साल के लिए होम
2- ज्यादा से ज्यादा प्रीपेमेंट
जब भी आपके पास कुछ मोटी रकम इकट्ठा हो जाए, जैसे 1 लाख, 2 लाख या 5 लाख. तो आप इसका इस्तेमाल होम लोन प्रीपेमेंट में कर सकते हैं. ये सीधा होम लोन के प्रिंसिपल को कम करता है. इसलिए आपका होम लोन पर ब्याज बचता है और लोन जल्दी भी खत्म हो सकता है.
जैसे मान लीजिए कि आपने 40 साल का होम लोन 8.5% पर लिया. आउटस्टैंडिंग होम लोन की अवधि है 15 साल और आपने 2 लाख रुपये का प्रीपेमेंट किया तो आपके पास दो विकल्प होंगे.
- लोन की अवधि कम करें
- मंथली EMI को कम करें
आमतौर पर बैंक्स मंथली EMI को कम नहीं करते हैं और होम लोन की अवधि को घटा देते हैं. 2 लाख के प्रीपेमेंट के बाद आपके होम लोन की अवधि 17 महीने कम हो जाएगी. यानी आपका होम लोन 17 महीने पहले खत्म हो जाएगा. ये कैलकुलेशन आप किसी भी Home Loan Pre Payment Calculator से कर सकते हैं.
3- स्टेप अप EMI
जैसे म्यचूअल फंड्स में Step Up SIP होती है, जिसमें आप हर साल अपनी SIP को कुछ प्रतिशत बढ़ाते हैं, ठीक वैसे ही स्टेप अप EMI होती है. आप शुरुआत में कम EMI देते हैं और समय के साथ आपकी EMI बढ़ती जाती है. ये ऑप्शन उन लोगों के लिए बहुत सही रहता है जिनकी अभी सैलरी कम है, लेकिन भविष्य में सैलरी बढ़ने की उम्मीद है. ऐसा करके आप लंबी अवधि के लोन को वक्त से पहले ही खत्म कर सकते हैं. मगर ध्यान रहे कि स्टेप अप EMI में EMI बढ़ने का तरीका बैंक की योजना और लोन एग्रीमेंट पर निर्भर करता है.
4- हर साल एक एक्स्ट्रा EMI
ये ऑप्शन बहुत कारगर साबित होता है. अगर आप होम लोन की EMI के अलावा हर साल एक अतिरिक्त EMI चुका सकते हैं, तो इससे लोन का मूलधन तेजी से कम होता है. मूलधन कम होने पर आगे लगने वाला ब्याज भी घटता है और लोन की अवधि कम हो सकती है. इसके लिए हर महीने बड़ी रकम बचाने की जरूरत नहीं होती, बल्कि साल में एक बार बोनस या अतिरिक्त आमदनी से एक EMI के बराबर भुगतान किया जा सकता है.
उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपने ₹50 लाख का होम लोन 20 साल के लिए 8.5% सालाना ब्याज दर पर लिया है. आपकी मंथली EMI करीब ₹43,391 होगी अगर आप हर साल एक अतिरिक्त EMI भी चुकाते हैं और यह अतिरिक्त रकम सीधे मूलधन घटाने में लगती है, तो कैलकुलेशन के मुताबिक लोन करीब 20 साल के बजाय 16 साल 9 महीने में खत्म हो सकता है. इससे लगभग 10.3 लाख रुपये का ब्याज बच सकता है.
5- EMI ज्यादा अवधि कम
जब भी आप लोन लेने जाएं तो होम लोन लेते समय कम अवधि का विकल्प चुनना फायदेमंद हो सकता है, मगर इससे आपकी EMI बढ़ जाएगी. इससे लोन जल्दी खत्म हो जाता है और कुल ब्याज भी काफी कम चुकाना पड़ता है. हालांकि, सिर्फ ब्याज बचाने के लिए इतनी बड़ी EMI न चुनें कि घर का बजट बिगड़ जाए या आप दूसरी जरूरतों के लिए पैसे न बचा पाएं.
6- होम लोन बैलेंस ट्रांसफर
अगर आपको लगता है कि आपका बैंक ज्यादा ब्याज ले रहा है, तो आप अपना होम लोन दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की भी सोच सकते हैं. इसके लिए अपने मौजूदा बैंक की दर की तुलना दूसरे बैंकों के ऑफर से करें. अगर कोई दूसरा बैंक कम ब्याज दर पर लोन देने को तैयार है, तो आप अपना बकाया होम लोन वहां ट्रांसफर कर सकते हैं. इसे होम लोन बैलेंस ट्रांसफर कहते हैं. इससे EMI कम हो सकती है या उसी EMI के साथ लोन जल्दी चुकाने में मदद मिल सकती है.
हालांकि, बैंक बदलने से पहले प्रोसेसिंग फीस, कानूनी जांच और अन्य लागू शुल्कों का हिसाब जरूर लगाएं. साथ ही, यह भी देखें कि लोन की कितनी अवधि बाकी है और ब्याज में होने वाली कुल बचत ट्रांसफर के खर्च से अधिक है या नहीं. कई बार अपने मौजूदा बैंक से ही कम ब्याज दर की मांग करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

