इस बार फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) कितना होगा? इसका इंतज़ार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेसब्री से है. 8वां वेतन आयोग फिलहाल 6-7 जुलाई को ओडिशा के भुवनेश्वर में दो दिनों की बैठक कर रहा है. इस बैठक में आयोग कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स और इससे जुड़े दूसरे पक्षों से बातचीत कर रहा है, ताकि उनकी सैलरी, भत्तों, पेंशन और कामकाज की शर्तों को लेकर उनके विचार और सुझाव जान सके.
भुवनेश्वर में चर्चा के बाद, वेतन आयोग 9 और 10 जुलाई को कोलकाता जाएंगे और वहां भी इसी तरह कर्मचारियों के संग बातचीत करेंगे. ऐसी बैठकें देश के दूसरे शहरों और इलाकों में भी की जाएंगी. पूरे देश से कर्मचारी यूनियन की मांगें इकट्ठा करने के बाद आयोग अपनी एक फाइनल रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे 2027 के मध्य तक सरकार को सौंपना है.
फिटमेंट फैक्टर पर माथापच्ची
‘फिटमेंट फैक्टर’ वो फॉर्मूला है जिससे ये तय होगा कि सैलरी और पेंशन कितनी बढ़ेगी. इसी एक चीज पर ये निर्भर करता है कि नौकरी कर रहे कर्मचारियों और रिटायर हो चुके लोगों की सैलरी, पेंशन और बाकी सुविधाएं आने वाले 10 सालों में कितनी बढ़ेंगी. अगर फिटमेंट फैक्टर को सरकार बढ़ाती है तो इसका सीधा असर लोगों की सैलरी पर पड़ेगा. बेसिक सैलरी में उसी हिसाब से कई गुना बढ़ोतरी हो जाएगी इसलिए इसे सैलरी रिवीजन का सबसे जरूरी हिस्सा मानते हैं.
यही वजह है कि कर्मचारियों के यूनियन और एसोसिएशन सरकार से ये मांग कर रहे हैं कि फिटमेंट फैक्टर को ज्यादा से ज्यादा रखा जाए, ताकि छोटे या जूनियर पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में ठीक-ठाक बढ़ोतरी हे सके और उनके हाथ में अच्छा जीवन बिताने लायक रकम आ सके, लेकिन सरकार फिटमेंट कितना बढ़ाएगी, ये तो सरकार के बजट पर निर्भर करता है.
फिटमेंट फैक्टर इतना ज़रूरी क्यों?
ये समझ लीजिए कि सैलरी और पेंशन तय करने की ये सारी कवायद सिर्फ फिटमेंट फैक्टर पर आकर खत्म होती है. एक बार फिटमेंट फैक्टर तय हो गया तो सारी बहस खत्म हो जाएगी. ऐसा इसलिए क्योंकि फिटमेंट फैक्टर ही वो ‘मैजिकल नंबर’ है जो किसी कर्मचारी की पूरी सैलरी का बेस तय करेगा. यही वो ‘मल्टीपल’ है जिससे पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी बनाई जाएगी.
इसको आसान तरीके से समझने के लिए आप पिछली बार का उदाहरण लीजिए. छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था, जबकि 7वें वेतन आयोग में ये बढ़कर 2.57 हुआ. इसका असर ये हुआ कि कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई.
8वें वेतन आयोग को बने हुए 8 महीने से ज्यादा का समय हो चुका है, इस बार फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, सारी कोशिशें सिर्फ इसी एक नंबर को खोजने को लेकर हैं. इतना समय गुजरने के बाद भी सरकार न तो ये तय कर पाई है और न ही किसी तरह का कोई इशारा दे पाई है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर कितना होगा. कर्मचारियों की मांग है कि इसे 3.68 किया जाए. मगर, एक्सपर्ट्स ये अनुमान लगा रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.90 और 2.86 के बीच हो सकता है.
HRA, इनहैंड सैलरी पर भी असर
फिटमेंट फैक्टर इतना ज़रूरी इसलिए भी है क्योंकि इससे सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं बढ़ती, बल्कि इससे जुड़ी बाकी चीजों पर भी सीधा असर होता है. किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और इन-हैंड सैलरी के बीच में कई और चीजें होती हैं, जैसे कि महंगाई भत्ता (DA), HRA, ट्रैवल अलाउंस, मेडिकल अलाउंस, प्रमोशन, सालाना इंक्रीमेंट और प्रॉविडेंट फंड (PF). इन सभी चीजों की कैलकुलेशन भी बेसिक सैलरी के आधार पर ही होती है, क्योंकि इनमें से ज्यादातर भत्ते बेसिक सैलरी के एक निश्चित प्रतिशत (%) के रूप में जुड़ते हैं और PF जैसी चीजें कटती हैं.
अब ध्यान देने वाली बात ये है कि HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसी चीजें कुल सैलरी को बढ़ाती हैं, मगर फिटमेंट फैक्टर ही कम तय हुआ, तो ये भत्ते भी उस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे. ऐसा इसलिए है क्योंकि इन भत्तों का कैलकुलेशन भी बढ़ी हुई बेसिक सैलरी के आधार पर ही होता है. सीधी बात यही है कि फिटमेंट फैक्टर ही सैलरी में होने वाले बदलाव की ‘नींव’ है, जो सैलरी की बाकी सभी चीजों को तय करता है.
फिटमेंट फैक्टर इन बातों पर निर्भर
फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा, ये कई बातों पर निर्भर करता है. जैसे- देश की महंगाई कैसी है, सरका के बजट की स्थिति कैसी है और कर्मचारी संगठनों के साथ होने वाली बातचीत की दिशा और दशा क्या है.

