क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto के दोनों फाउंडर्स आदित पालीचा (Aadit Palicha) और कैवल्य वोहरा (Kaivalya Vohra) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने FEMA ( Foreign Exchange Management Act, 1999) के तहत समन जारी किया था. ये जानकारी Zepto की ओर से 8 जून 2026 को मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास दाखिल अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में दी गई है. ED का ये समन IPO के पेपर्स दाखिल करने से सिर्फ दो महीने पहले भेजा गया था.
जेप्टो की फाइलिंग के मुताबिक 8 अप्रैल 2026 को जो समन भेजा गया था उसमें विदेशी और विदेशी निवेशों, FY21 से ऑडिटेड वित्तीय विवरणों, शेयरहोल्डिंग पैटर्न, कर्ज और गारंटी, इनकम टैक्स रिटर्न, बैंक खातों की डिटेल्स, अचल संपत्तियों और कंपनी के बिजनेस मॉडल पर एक नोट की जानकारी मांगी गई थी. फाइलिंग में ये दिखाया गया है कि कैवल्य वोहरा ED के सामने 17 अप्रैल और 22 अप्रैल को पेश हुए, जबकि पालीचा 20 अप्रैल और 15 मई को पेश हुए थे.
जेप्टो ने कहा कि ED ने जो भी जानकारियां और दस्तावेज़ मांगे थे, फाउंडर्स ने वो सब जमा करा दिए हैं. साथ ही कुछ अतिरिक्त जानकारियां जैसे कि कंपनी का होल्डिंग स्ट्रक्चर, स्कीम ऑफ अरेंजमेंट, बिजनेस एग्रीमेंट और इनवॉयस भी जमा कराईं गई हैं. इसके बाद एजेंसी की तरफ से इस समन के बाद फिर से सम्पर्क नहीं किया गया है. हालांकि जेप्टो ने निवेशकों इस बात की चेतावनी जरूर दी है कि वो इस बात का आश्वासन नहीं दे सकती है कि आगे भविष्य में कोई पूछताछ, जांच या कानूनी कार्रवाई या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा.
इस डिस्क्लोजर के मायने क्या हैं?
ये जानकारी SEBI को दाखिल की गई Zepto के अपडेटेड DRHP में दी गई थी. जेप्टो इस वक्त अपना IPO लाने की तैयारी में जुटी है. कंपनी फ्रेश शेयर इश्यू के जरिए 8,010 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है. ये डिस्क्लोजर तीन वजहों से बहुत जरूरी हो जाता है.
- पहला, इसकी टाइमिंग को लेकर है. 8 अप्रैल को समन भेजा गया, मई तक दोनों फाउंडर्स एजेंसी के सामने पेश होते हैं और फिर 8 जून को कंपनी DRHP दाखिल करती है. ये सारी चीजें DRHP फाइल करने से ठीक पहले के हफ्तों में हुईं.
- दूसरा, इसकी प्लेसमेंट. इसको डॉक्यूमेंट के आखिर में लिटिगेशन सेक्शन में छुपाकर नहीं रखा गया है. Zepto के अपने बैंकरों और वकीलों ने इसे एक नॉमिनेटेड रिस्क फैक्टर के रूप में हाइलाइट किया है, यानी वे इसे इतना महत्वपूर्ण मानते हैं कि निवेशक इसमें पैसा लगाने से पहले इसे जरूर ध्यान में रखें. यानी निवेशकों को कंपनी ने पहले ही इसके बारे में पारदर्शी तरीके से जानकारी दी है.
- तीसरा, कानूनी नजरिए से देखें तो किसी कंपनी के लिए, जो स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने जा रही हो, ED की ओर से FEMA के तहत जारी किया गया समन कोई सामान्य सूचना नहीं मानी जाती है.
हालांकि, ये भी सच है कि विदेशी निवेशकों से बड़ी-बड़ी फंडिंग राउंड हासिल करने वाली तेजी से बढ़ती स्टार्टअप्स के लिए ED की जांच आम बात है, खासकर FEMA नियमों के पालन को लेकर, शायद यही बाद जेप्टो के लिए भी है.
Zepto का IPO
Zepto का IPO ₹8,010 करोड़ के फ्रेश इश्यू और शुरुआती संस्थागत निवेशकों की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) का मिक्स है. फ्रेश इश्यू से आने वाला पैसा सीधे कंपनी को जाएगा, जबकि OFS के साथ मिलाकर कुल IPO साइज ₹11,000 करोड़ से ₹12,000 करोड़ के बीच होने की उम्मीद है. इस में आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा अपनी कोई हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं.
शुरुआती निवेशक Nexus Ventures, Contrary Capital, Razor Ventures और Kaiser Permanente OFS के जरिए शेयर बेचने वालों में शामिल हैं. Nexus Ventures VI Holdings सबसे बड़ा शेयर बेचने वाला निवेशक है, जो 57.4 मिलियन शेयर बेच रहा है. इसके बाद Nexus Ventures VII Holdings 30.4 मिलियन शेयर बेच रहा है.
OFS में हिस्सा लेने वाले अन्य निवेशकों में Contrary ZEP Holdings LLC शामिल है, जो 7.8 मिलियन शेयर बेचेगा. Razor Ventures Zepto LLC 9.4 मिलियन शेयर, Kaiser Foundation Hospitals 4.39 मिलियन शेयर और Kaiser Permanente Group Trust 4.16 मिलियन शेयर बेचेंगे.
क्या है Zepto की रणनीति?
मीडिया के सूत्रों के मुताबिक, Zepto ने चालू तिमाही में नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) ₹10,000 करोड़ के पार कर लिया है. ये एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि देश के सबसे बड़े क्विक कॉमर्स प्लेयर्स के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है.
कंपनी ने कैश बर्न भी काफी कम कर दिया है, जो पिछले साल के लगभग ₹200 प्रति ऑर्डर से घटकर अब करीब ₹120 प्रति ऑर्डर रह गया है. आंतरिक रूप से Zepto को उम्मीद है कि पूरे बिजनेस में ऑप्टिमल ब्रेक-ईवन लेवल पहुंचने में अभी और चार से पांच तिमाहियां लगेंगी.
Zepto के IPO नैरेटिव में एक बड़ा बदलाव ये होने वाला है कि कंपनी अब मुख्य ऑपरेटिंग मैट्रिक के रूप में नेट रियलाइजेबल वैल्यू (NRV) पर फोकस कर रही है. ये कदम Zepto को लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी Eternal (Zomato) से अलग पहचान देगा. Eternal अपनी क्विक कॉमर्स बिजनेस Blinkit के लिए नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) रिपोर्ट करता है.
NOV प्लेटफॉर्म पर ट्रांजेक्शन हुए ऑर्डर्स की कुल वैल्यू को दर्शाता है, जबकि NRV कंपनी को वास्तव में मिलने वाले रेवेन्यू को दिखाता है, जिसमें कमीशन, सर्विस फीस और विज्ञापन आय शामिल होती है.
