वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. वोडाफोन आइडिया ने बताया है कि कोर्ट ने दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से कंपनी और उसकी पूर्व सब्सिडियरी कंपनी स्पाइस कम्यूनिकेशंस के खिलाफ वन टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) की डिमांड को खारिज कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद Vodafone Idea के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली. खबर के बाद शेयर BSE पर 3.6% चढ़कर ₹14.90 रुपये पर पहुंच गए.
इस फैसले के बारे में एक एक्सचेंज फाइिंग में Vodafone Idea ने बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 जून को Idea Cellular और Spice Communications को जारी किए गए डिमांड नोटिस को खारिज कर दिया है. इनकी कुल राशि 2,113 करोड़ रुपये थी, इसके अलावा, हाई कोर्ट ने DoT को जमा की गई बैंक गारंटी वापस करने का भी निर्देश दिया है.
कहां से शुरू हुआ मामला?
ये मामला DoT के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें उसने उन टेलीकॉम ऑपरेटर्स पर वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज लगाने का फैसला किया था, जिनके पास 6.2 MHz से ज्यादा की स्पेक्ट्रम होल्डिंग है.
जनवरी 2013 में, दूरसंचार विभाग ने पुरानी आइडिया सेल्युलर लिमिटेड और स्पाइस कम्यूनिकेशंस पर स्पेक्ट्रम को लेकर डिमांड उठाईं थीं. इसमें 1 जुलाई, 2008 से 31 दिसंबर, 2012 तक के रेट्रोस्पेक्टिव पीरियड में 6.2 MHz से ज्यादा स्पेक्ट्रम रखने और 1 जनवरी 2013 से लाइसेंस के एक्सपायर होने तक 4.4 MHz से ज्यादा स्पेक्ट्रम रखने के लिए दावा किया गया था.
आइडिया सेल्युलर जो कि अब वोडाफोन आइडिया बन चुकी है, इसने 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट में इन मांगों को चुनौती दी थी. कंपनी का तर्क था कि ये मांगें कई साल पहले दिए गए टेलीकॉम लाइसेंस की वित्तीय शर्तों में रेट्रोस्पेक्टिव बदलाव के समान हैं. हाईकोर्ट ने जनवरी 2013 में अंतरिम राहत देते हुए DoT को विवादित बकाए को लेकर कंपनी के खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई करने से रोक दिया था.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार के अपने फैसले में कहा कि ये तर्क नहीं दिया जा सकता कि चूंकि स्पेक्ट्रम एक दुर्लभ और सीमित प्राकृतिक संसाधन है, इसलिए केंद्र सरकार को एकतरफा तरीके से कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों से पीछे हटने का अधिकार है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार के पास ऐसा फैसला लेने की कोई कानूनी शक्ति होने पर सवाल उठाया.
बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला एक व्यापक फैसले का हिस्सा है जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार टेलीकॉम ऑपरेटर्स पर बिना लाइसेंस एग्रीमेंट या Indian Telegraph Act में कोई कानूनी आधार के रेट्रोस्पेक्टिव यानी पिछली तारीख से वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज नहीं लगा सकती.
Vodafone Idea के मुताबिक, साल 2018 में DoT की ओर से Vodafone India Ltd. और Vodafone Mobile Services Ltd. के Idea Cellular के साथ मर्जर को मंजूरी मिलने के बाद ये विवाद और जटिल हो गया. उस समय विभाग ने स्पेक्ट्रम चार्ज की मांग को बढ़ाकर 3,322 करोड़ रुपये कर दिया और विवादित राशि को सुरक्षित करने के लिए कंपनी से बैंक गारंटी मांगी.
Vodafone Idea ने विरोध दर्ज करते हुए बैंक गारंटी दी थी और बाद में इस जरूरत को Telecom Disputes Settlement and Appellate Tribunal (TDSAT) के सामने चुनौती दी. TDSAT ने कंपनी को राहत दी, बाद में DoT ने सुप्रीम कोर्ट से TDSAT के आदेश पर स्टे हासिल कर लिया.
