इस वक्त बाज़ार में जेप्टो (Zepto) के IPO को लेकर चर्चा गर्म है. जेप्टो ने अपनी प्रस्तावित IPO के लिए मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) दाखिल कर दिया है. अपडेटेड फाइलिंग में जेप्टो ने कई जानकारियां दी हैं.
इस IPO में ताज़ा शेयर जारी होंगे साथ ही शुरुआती शेयरहोल्डर्स की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) भी लाया जाएगा. IPO में ₹8,010 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू शामिल है. इस इश्यू में कंपनी 16.02 करोड़ फ्रेश शेयर जारी करेगी. जिनकी फेस वैल्यू 5 रुपये प्रति शेयर है. ऑफर फॉर सेल (OFS) को मिलाकर IPO का कुल साइज 9,000-10,000 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है.
दोनों फाउंडर्स नहीं बेचेंगे शेयर
जेप्टो के दोनों फाउंडर्स आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा ऑफर फॉर सेल में अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं. ये ऑफर फॉर सेल (OFS) पूरी तरह से निवेशकों की ओर से है. सबसे बड़ा शेयर बेचने वाला Nexus Venture Partners है, जो कुल 8.78 करोड़ शेयर बेचेगा. इनमें Nexus Ventures VI के 5.74 करोड़ शेयर और Nexus Ventures VII के 3.04 करोड़ शेयर शामिल हैं.
इसके अलावा, Razor Ventures Zepto 93.6 लाख शेयर बेचेगा, Contrary ZEP Holdings 78 लाख शेयर, Kaiser Foundation Hospitals 43.9 लाख शेयर और Kaiser Permanente Group Trust 41.6 लाख शेयर बेचने वाला है.
दोनों फाउंडर्स के लिए कुछ निवेशक और जो अपना हिस्सा इसमें नहीं बेच रहे हैं. जैसे – ग्लेड ब्रुक (Glade Brook), स्टेपस्टोन (StepStone), वाई कॉम्बिनेटर कंटीन्यूटी (Y Combinator Continuity) और जनरल कैटलिस्ट (General Catalyst) जैसे कई बड़े निवेशक अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं.
किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?
जिन लोगों ने जेप्टो में शुरुआत में ही निवेश किया था, उन्हें OFS में जबरदस्त फायदा मिलने का अनुमान है. जैसे कि नेक्सस वेंचर्स VI (Nexus Ventures VI) और कॉन्ट्रैरी (Contrary) ने 3.91 रुपये और 3.98 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयर खरीदे थे, इसलिए इनको रिटर्न भी ज्यादा मिलेगा.
जबकि रेज़र वेंचर्स (Razor Ventures) ने 11.37 रुपये और कैसर (Kaiser) ने करीब 11.30 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर एंट्री ली थी. इसलिए इनका रिटर्न शुरुआती निवेशकों के मुकाबले कम रहेगा. अगर IPO प्राइस एक जैसा रहता है, तो नेक्सस वेंचर्स VI और कॉन्ट्रैरी को रेज़र वेंचर्स और कैसर कंपनियों के मुकाबले लगभग 2.9 गुना ज्यादा रिटर्न मिलेगा.
नेक्सस वेंचर्स VII (Nexus Ventures VII) ने ₹23.65 प्रति शेयर की कीमत पर शेयर खरीदे हैं. यानी आगे चलकर IPO की कीमत जो भी हो, नेक्सस वेंचर्स VI और कॉन्ट्रैरी को नेक्सस वेंचर्स VII के मुकाबले लगभग 6 गुना ज्यादा मुनाफा होने की उम्मीद है.
हालांकि OFS के जरिए निवेशक अपनी कुछ हिस्सेदारी ही बेचेंगे, न पूरी तरह से बाहर निकलेंगे. OFS में हिस्सा बेचने के बाद भी नेक्सस (Nexus), ज़ेप्टो (Zepto) के सबसे बड़े शेयरधारकों में से एक बना रहेगा.
कहां होगा पैसों का इस्तेमाल?
ताज़ा शेयर जारी कर जो पैसे कंपनी को मिलेंगे, उसका इस्तेमाल कई कामों में किया जाएगा.
- इन पैसों का सबसे बड़ा हिस्सा ज़ेप्टो (Zepto) के डार्क-स्टोर नेटवर्क को बढ़ाने के लिए रखा गया है. कंपनी मौजूदा और नए बाज़ारों में लगभग 1,900 नए डार्क स्टोर्स खोलने के लिए 1,629 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है. इसके अलावा, FY30 तक मौजूदा डार्क स्टोर्स के किराये के लिए 1,735 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं.
- टेक्नोलॉजी पर भी कंपनी बड़ा खर्च करने की योजना बना रही है. टेक्नोलॉजी और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में 1,325 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. जबकि इसकी मार्केटप्लेस सब्सिडियरी के ज़रिए मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन के लिए 520 करोड़ रुपये खर्च होंगे
- IPO की रकम का एक हिस्सा कंपनियों के अधिग्रहण और सामान्य कॉर्पोरेट खर्चों के लिए भी रखा जाएगा.
कानूनी दिक्कतें और जोखिम
अप्रैल में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पालीचा और कैवल्य वोहरा को समन भेजकर विदेशी निवेश, शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर और बिजनेस से जुड़े अन्य पहलुओं पर जानकारी मांगी थी. फाउंडर्स एजेंसी के सामने पेश हुए और उन्होंने मांगी गई जानकारी सौंप दी है. ये जानकारी जेप्टो ने अपनी लेटेस्ट फाइलिंग में दी है.
कंपनी कई टैक्स, रेगुलेटरी और कंज्यूमर-प्रोटेक्टशन से जुड़ी कानूनी कार्रवाइयों का भी सामना कर रही है, जिसमें कथित तौर पर ‘डार्क-पैटर्न’ के इस्तेमाल से जुड़े मामले भी शामिल हैं.
IPO की फाइलिंग में डार्क-स्टोर नेटवर्क से जुड़े नियमों, गिग-वर्कर्स (डिलीवरी पार्टनर्स) के बदलते कानूनों, डेटा-प्रोटेक्शन एक्ट, विदेशी निवेश (FDI) के नियमों और लाइसेंसिंग की ज़रूरतों से होने वाले जोखिमों को हाईलाइट किया गया है

