फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के साथ गुजरात में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस डेटा सेंटर (AI-enabled data centre) बनाने के लिए एक करार किया है. इस खबर का असर रिलायंस के शेयरों पर दिखा, NSE पर रिलायंस का शेयर इंट्राडे में 2.46% उछलकर ₹1,300.50 तक पहुंच गया.
मेटा (Meta) के फाउंडर और CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि भारत में अपना पहला AI-enabled डेटा सेंटर बनाने के लिए रिलायंस के साथ काम करने पर हमें गर्व है. जामनगर की यह वर्ल्ड-क्लास फैसिलिटी हमें वैश्विक स्तर पर अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में मदद करेगी, और साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में हमारे लॉन्ग टर्म निवेश को और गहरा करेगी. गुजरात के जामनगर में बनने वाली ये फैसिलिटी मेटा के प्रोडक्ट्स और AI क्षमताओं को ताकत देगा, ताकि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक भारत को ‘पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस’ की सुविधा दी जा सके.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि मेटा के साथ ये साझेदारी भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ा बदलाव लाने वाला पल है. मेटा जैसे वैश्विक टेक लीडर के लिए भारत का पहला ‘बिल्ट-टू-सूट’ यानी जरूरत के हिसाब से खास तैयार किया गया डेटा सेंटर बनाना ये दिखाता है कि भारत ग्लोबल AI क्रांति में सबसे आगे रहने के लिए पूरी तरह तैयार है.
डील में क्या है?
इस डील के तहत, रिलायंस गुजरात के जामनगर में एक 168-मेगावाट का डेटा सेंटर बनाएगी, जिसे मेटा अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटिंग की जरूरतों के लिए लीज़ पर लेगी.
रिलायंस इस प्रोजेक्ट के लिए शुरू से लेकर अंत तक सभी सेवाएं देगी, जिसमें डिजाइन, कंस्ट्रक्शन, बिजली-पानी का मैनेजमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी की सप्लाई, नेटवर्क कनेक्टिविटी और मैनेज्ड सर्विसेज शामिल हैं.
रिलायंस की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि ये साझेदारी रिलायंस को भारत में हाइपरस्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक ‘सिंगल-विंडो सॉल्यूशन प्रोवाइडर’ यानी एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं देने वाला बनाती है. जिस जगह पर ये डेटा सेंटर बनाया जाएगा वो लोकेशन बहुत खास है और बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर चलाने के लिए बहुत फायदेमंद है.
यहां काम पूरा करने की बेहतर क्षमता, रिन्यूएबल एनर्जी, पानी की उपलब्धता, भारत के पश्चिमी सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशनों की नजदीकी और Jio का विशाल फाइबर नेटवर्क जैसी खूबियां मौजूद हैं. ये डेटा सेंटर पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी से चलेगा और इसे ठंडा रखने के लिए समुद्र के खारे पानी को साफ करके इस्तेमाल किया जाएगा, जो पर्यावरण सुरक्षा के प्रति रिलायंस और मेटा की प्रतिबद्धता को दिखाता है.
रिलायंस ने कहा कि ये साझेदारी भारत सरकार की प्राथमिकताओं के बिल्कुल अनुकूल है, जिसके तहत डेटा सेंटर्स को ‘रणनीतिक राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा’ का दर्जा दिया गया है और भारत में ग्लोबल AI इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने के लिए एक लॉन्ग-टर्म पॉलिसी फ्रेमवर्क पेश की गई है.
रिलायंस और मेटा के बीच हुई ये नई डील दोनों कंपनियों के बीच के रणनीतिक रिश्तों को और आगे बढ़ाता है. इससे पहले, दोनों ने भारत और कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिजनेसेज के लिए AI सॉल्यूशंस तैयार करने के लिए एक जॉइंट वेंचर किया था. इसके अलावा, मेटा ने साल 2020 में 5.7 बिलियन डॉलर का निवेश करके जियो प्लेटफॉर्म्स में 9.99% हिस्सेदारी भी खरीदी थी.
भारत के लिए डील के क्या मायने हैं?
अब सवाल ये है कि इस डील से भारत को क्या मिलेगा? अब दुनिया की बड़ी AI कंपनियां भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में नहीं देख रही हैं, बल्कि भारत को डेटा सेंटर बनाने और कंप्यूटिंग की जगह के रूप में देख रही हैं.
डेटा सेंटर स्थापित करने की ये डील दुनिया को साफ संदेश देती है कि भारत के पास वो सब कुछ है, जो ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी है. क्योंकि आने वाले समय में AI की क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि आपके पास सस्ती बिजली, अच्छा नेटवर्क, ठंडा रखने के साधन, जमीन और सरकार की स्थिर नीतियां हैं या नहीं, और भारत में ये सब मौजूद है.
मगर, इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं. डेटा सेंटर बनाने में भारी-भरकम निवेश लगता है और इन्हें चलाने में बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है. इसलिए भारत को 3 चीजों पर फोकस करना होगा, अपने पावर ग्रिड को मजबूत रखना होगा, कंप्यूटर हार्डवेयर की लोकल सप्लाई चेन बनानी होगी और रेगुलेटरी दिक्कतों को दूर करना होगा.
अगर भारत ने इस तीनों चीजें ठीक कर लीं, तो ये स्ट्रैटेजी भारत को सिर्फ डिजिटल डेटा ‘इस्तेमाल करने वाले’ देश से हटाकर, दुनिया के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का हब बना देगी.

