सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को जोरदार गिरावट देखने को मिल रही है, क्योंकि अमेरिका की ओर से तेहरान पर किए गए हमलों की वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिका ने ये हमलने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर पर हुए हमले के जवाब में किए.
आज MCX पर सोने का अगस्त वायदा इंट्राडे में 2,900 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा फिसलकर 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे चला गया. जबकि चांदी का जुलाई वायदा 5,000 रुपये प्रति किलो टूटकर 2,33,400 रुपये तक फिसल गया. चांदी वायदा अब अपने लाइफ टाइम हाई से आधा हो चुका है.
ग्लोबल मार्केट्स में भी सोना करीब 11 हफ्तों के अपने सबसे निचले स्तर पर फिसल गया है. स्पॉट गोल्ड करीब 2% गिरकर 4,181 डॉलर प्रति आउंस पर चला गया है. जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 2% टूटकर 4,204 डॉलर प्रति आउंस पर आ गया है. लेकिन सोने की कीमतों में ये गिरावट यहीं नहीं थमेगी, ये आगे भी जारी रह सकती है, लेकिन पहले ये समझ लीजिए कि ये गिरावट आ क्यों रही है.
इस कमज़ोरी की वजह क्या है?
MCX पर सोने की कीमतों में ये ताजा गिरावट इसलिए आई है क्योंकि ग्लोबल मार्केट में सोना लगातार कमजोर होता जा रहा है. ग्लोबल मार्केट में पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1.6% की गिरावट के बाद, बुधवार को भी 2% टूटा है.
मिडिल ईस्ट में हुए हालिया हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी का खतरा बना हुआ है. जिससे युद्ध खत्म करने की कोशिशों को झटका लगा है. इस युद्ध ने ग्लोबल मार्केट्स को हिलाकर रख दिया है और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है. जिसकी वजह से अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका लगा है.
इसके साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है, जिससे निवेशकों को अब ये आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है. ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों पर दबाव डालती हैं. क्योंकि बॉन्ड्स और ब्याज देने वाले दूसरे एसेट्स की तरह इस सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है.
CME FedWatch टूल के मुताबिक, ट्रेडर्स ये मानकर चल रहे हैं कि दिसंबर तक 70% संभावना है कि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ेंगी.
दूसरी तरफ मजबूत होते डॉलर ने भी सोने पर दबाव बनाया है. महंगे डॉलर ने सोने की खरीदारी को उन खरीदारों के लिए महंगा कर दिया है जो दूसरी करेंसीज का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इसकी डिमांड घट गई है और कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है.
आगे भी गिरावट के आसार!
अब सवाल यही है कि सोने की कीमतों में आगे क्या होना वाला है, भाव और गिरेंगे या तेजी आएगी, ये सिर्फ एक डेटा पर निर्भर करता है और वो है अमेरिकी की रिटेल महंगाई, जो कि आज यानी बुधवार को आएगी. अमेरिका में गोल्ड वायदा 4,300 डॉलर प्रति आउंस के करीब है. लगातार ऊंची महंगाई के सामने फेडरल रिजर्व (US Fed) ने महीनों से ब्याज दरों को जस का तस रखा है. बाजार अब दरों में कटौती के बजाय बढ़ोतरी की संभावना जता रहा है. ऐसे में, CPI का ये एक अकेला आंकड़ा सोने की कीमतों को जनवरी के अपने रिकॉर्ड स्तर से आई भारी गिरावट की तरफ और धकेल सकता है, या फिर सोने में वो तेजी ला सकता है जिसका खरीदार बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
देखिए, इस बार दांव बहुत बड़ा है, सोने ने 29 जनवरी को 5,595 डॉलर प्रति आउंस का रिकॉर्ड हाई बनाया था, लेकिन तब से ये अपनी वैल्यू का 22% से ज्यादा खो चुका है. इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों का खत्म होना है. अप्रैल में महंगाई दर (CPI) सालाना आधार पर 3.8% रही थी, जो मई 2023 के बाद सबसे ज्यादा थी. मिडिल ईस्ट तनाव की वजह से ईंधन की बढ़ी कीमतों ने इसे हवा दी थी, और यही वो मोड़ था जहां से सोने के बुरे दिन शुरू हुए.
महंगाई बढ़ेगी या घटेगी?
अब, जानकारों का अनुमान है कि मई में ये आंकड़ा बढ़कर 4.2% हो सकता है, जिससे ट्रेडर्स आने वाले दिनों में सोने की कीमतों को लेकर डरे हुए हैं. अगर महंगाई का आंकड़ा अनुमान के मुताबिक 4.2% या उससे ऊपर आता है, तो ये साफ हो जाएगा कि महंगाई सिर्फ अटकी नहीं है बल्कि फिर से बढ़ रही है. इससे बाजार में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें और मजबूत हो जाएंगी. कोर CPI के भी 3% से 4% के बीच रहने की आशंका है.
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने पिछले हफ्ते ही साल 2026 में ब्याज दरों में कटौती की अपनी सभी उम्मीदों को खत्म कर दिया है और पहली कटौती की उम्मीद को जून 2027 तक टाल दिया है. साथ ही, उसने दरें बढ़ने की संभावना को 10% से बढ़ाकर 20% कर दिया है. BNP Paribas तो एक कदम और आगे निकल गया है, जिसका मानना है कि फेड दिसंबर से ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर देगा जो 2027 तक जारी रहेगा.
बुधवार को अगर महंगाई का आंकड़ा बढ़कर आता है, तो इन दोनों दावों को मजबूती मिलेगी, जिससे ‘रियल यील्ड्स’ बढ़ेगी और सोने पर दबाव आएगा. ऐसे में अप्रैल से टिका हुआ 4,300 डॉलर का सपोर्ट लेवल तुरंत टूट सकता है.
महंगाई का ये आंकड़ा इसलिए भी खास है क्योंकि इसके ठीक बाद फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक होने वाली है. 16-17 जून को नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) की अगुवाई में ये पहली बैठक होगी, जिन्होंने 15 मई को जेरोम पॉवेल की जगह ली थी. केविन वॉर्श की इस पहली बैठक में नए आर्थिक अनुमान और ‘डॉट प्लॉट’ जारी किया जाएगा, जिससे साफ होगा कि दरें किस दिशा में जाएंगी.
CPI के आंकड़े और फेड की ये बैठक मिलकर तय करेंगे कि आगे सोने की चाल कैसी रहेगी. महंगाई का ये डेटा माहौल तैयार करेगा और 17 जून को आखिरी फैसला आएगा. अगर महंगाई ज्यादा रही और नए चेयरमैन का रुख भी सख्त रहा, तो यह सोने के लिए सबसे बुरा होगा और कीमतें 4,300 डॉलर के नीचे जा सकती हैं। वहीं, अगर महंगाई कम रही और चेयरमैन का रुख नरम रहा, तो सोने की रिकवरी का रास्ता साफ हो जाएगा.

