मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में आया 40% कम निवेश; लेकिन SIP करने वाले डटे रहे

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Equity mutual fund inflows fall 40 percent in May

बाज़ार में मचा कोहराम म्यूचुअल फंड निवेशकों की घबराहट को बढ़ा रहा है. मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश एक साल के निचले स्तर पर फिसल गया है. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड का इनफ्लो 40% गिरकर 22,908 करोड़ रुपये पर आ गया, जो अप्रैल में 38,440 करोड़ रुपये था.

इस भारी गिरावट के बावजूद, इक्विटी फंड्स लगातार एक और महीने नया निवेश हासिल करने में कामयाब रहे. हालांकि मंथली आधार पर आई इस गिरावट के बावजूद, ये इनफ्लो मई 2025 में दर्ज किए गए 19,013 करोड़ रुपये के मुकाबले 20% ज्यादा है. साथ ही, ये लगातार 63वां महीना रहा जब इक्विटी फंड्स में पॉजिटिव इनफ्लो दर्ज हुआ.

मई में ओवरऑल आउटफ्लो बढ़ा

मगर सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि पूरी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने मई के महीने में -64,021 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया, जबकि अप्रैल में 3.22 लाख करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया था. ये बदलाव मुख्य रूप से डेट फंड्स (debt funds) के इनफ्लो में आई भारी गिरावट और कई दूसरी कैटेगरीज में कम निवेश होने की वजह से हुआ.

मई में डेट म्यूचुअल फंड्स में 96,949 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो रहा, जबकि अप्रैल में 2.47 लाख करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज हुआ था. यही वजह रही कि ओवरऑल आउटफ्लो इतना ज्यादा बढ़कर आया है.

  • हाइब्रिड फंड्स में मई में 10,560 करोड़ रुपये का निवेश आया है, जबकि अप्रैल में 20,565 करोड़ रुपये का इनफ्लो था, यानी इस बार इनफ्लो आधा रहा है.
  • सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स, जिनमें रिटायरमेंट और चिल्ड्रन्स फंड शामिल हैं, इस महीने के दौरान 270 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया, जो कि अप्रैल में 306.98 करोड़ रुपये रहा था.
  • क्लोज्ड-एंडेड में मई में 1,156 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि अप्रैल में ये आउटफ्लो 4,467 करोड़ रुपये था.
  • Gold ETFs में मई के दौरान 725 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो देखा गया, जबकि अप्रैल में इसमें 3,040 करोड़ रुपये का इनफ्लो था. इस कैटेगरी में इस साल की शुरुआत में निवेशकों की भारी दिलचस्पी देखी गई थी, जिसमें जनवरी में 24,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनफ्लो भी शामिल था.
  • लार्ज-कैप फंड्स में भी इनफ्लो घटकर 1,593 करोड़ रुपये रह गया, जो अप्रैल में 2,525 करोड़ रुपये था, जबकि ELSS में एक और महीने आउटफ्लो जारी रहा, यानी निवेश बढ़ने के बजाय निवेशकों ने पैसा निकाला.

इससे ये संकेत मिलता है कि निवेशक मार्च और अप्रैल की तुलना में अब बाजार में कम पैसा लगा रहे हैं, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद वे अभी भी मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश करने के लिए तैयार हैं, वो डरे हुए नहीं हैं, क्योंकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में लगातार बड़ा निवेश आता रहा, जिसमें 4,385 करोड़ रुपये और 4,946 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया. इस महीने के दौरान आए कुल नए निवेश में अकेले इन दोनों कैटेगरीज की हिस्सेदारी 9,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की रही.

SIP पर डटे रहे निवेशक

SIP के मोर्चे पर अच्छी खबर ये है कि मई के महीने में जितने लोगों ने SIPs बंद की हैं या मैच्योर हुई हैं, उससे ज्यादा नई SIP खोली गई हैं. AMFI के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक मई में कुल 54.16 लाख SIP खोली गईं, जबकि 51.70 लाख बंद हुईं या मैच्योर हुईं. इस आधार पर SIP स्टॉपेज रेश्यो (stoppage ratio) 95.46% बनता है.

मतलब ये कि 100 नई SIPs खुलने पर 95 बंद हुईं. जबकि यही रेश्यो मार्च और अप्रैल में 100 के ऊपर था, यानी नई SIPs खुलने की संख्या, बंद होने वाली से कम थी या बराबर थीं. भले ही SIP स्टॉपेज रेश्यो में सुधार हो, लेकिन कुल SIP इनफ्लो घटकर 30,954 करोड़ रुपये पर आ गया है, जो कि अप्रैल में 31,225 करोड़ रुपये था.

दूसरा नज़रिया ये भी है कि SIP इनफ्लो लगातार तीसरे महीने 30,000 करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर बना रहा, जो ये दर्शाता है कि नया एकमुश्त निवेश और म्यूचुअल फंड का कुल इनफ्लो कमजोर होने के बावजूद भी लोगों का रेगुलर मासिक निवेश जारी रहा.

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