एथेनॉल पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी खत्म होने से चीनी शेयरों में घुली मिठास, 5% तक उछले शेयर

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Excise Duty Waiver on Ethanol Petrol Sweetens Sugar Stocks

चीनी शेयरों की मिठास थोड़ी और बढ़ गई है. 11 जून, गुरुवार को शुगर कंपनियों के शेयरों में 5% से ज्यादा की तेज़ी देखने को मिली है, क्योंकि सरकार ने ब्लेंडेड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को खत्म कर दिया है. E20 से लेकर E30 पेट्रोल पर अब सरकार एक्साइज ड्यूटी नहीं वसूलेगी.

चीनी शेयरों की मिठास बढ़ी

ये खबर चीनी कंपनियों के लिए इसलिए अच्छी है क्योंकि इससे एथेनॉल ब्लेंडिंग की डिमांड बढ़ेगी. इसलिए धामपुर शुगर मिल्स, द्वारिकेश शुगर, बलरामपुर चीनी, बजाज हिंदुस्तान शुगर, डालमिया भारत के शेयरों में आज 11 जून को अच्छी तेजी देखने को मिली है.

धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स और SBEC शुगर दोनों ही आज 5% का अपर सर्किट बनाया है. धामपुर बायो 112.42 रुपये पर पहुंचा और SBEC ने 66.32 रुपये का स्तर छुआ. बाकी शुगर स्टॉक्स में भी 1.5%-2% की तेजी देखने को मिली है.

सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, सरकार ने E22, E25, E27 और E30 फ्यूल से एक्साइज ड्यूटी को खत्म कर दिया है. ये E20 से ज्यादा एथेनॉल मिक्स फ्यूल के लिए पहला बड़ा टैक्स इंसेंटिव है. सरकार इस फैसले के जरिए कच्चे तेल के इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करना चाहती है और घरेलू बायोफ्यूल को बढ़ावा देना चाहती है.

इससे पहले, 28 अप्रैल को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बायोडीजल और हाइड्रोजन-मिक्स्ड ईंधनों के साथ-साथ E85 और E100 एथेनॉल ब्लेंड को शामिल करने के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया था. E85 में पेट्रोल के साथ 85% एथेनॉल मिलाया जाता है, जबकि E100 पूरी तरह से शुद्ध एथेनॉल होता है. इसका इस्तेमाल सिर्फ फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में किया जाता है.

चीनी कंपनियों को कैसे फायदा होगा

हायर एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म होने से चीनी कंपनियां खुश हैं, क्योंकि इसका बड़ा और लॉन्ग टर्म फायदा इनको ही होने वाला है, जो लिस्टेड कंपनियों के शेयरों के लिए भी ये पॉजिटिव है. क्योंकि एथेनॉल अब देश के लिए एक लॉन्ग टर्म स्टोरी बन चुका है, ये 1-2 साल की कहानी नहीं है. सरकार का एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर सकारात्मक रवैया एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को इस बात का भरोसा देता है कि भविष्य में एथेनॉल की डिमांड हमेशा बनी रहेगी.

इसलिए चीनी मिलों को सिर्फ चीनी की कीमतों पर निर्भर नहीं रहना होगा, उनके लिए कमाई का एक लॉन्ग टर्म रास्ता खुल गया है. जब वे ज्यादा इथेनॉल बेचेंगी, तो उनका मुनाफा बढ़ेगा, कंपनियों में कैश फ्लो बेहतर होगा और कंपनियों की वित्तीय सेहत भी सुधरेगी.

मिडिल ईस्ट में तनाव अगर और बढ़ता है, कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर संकट पैदा होता है तो ये भी चीनी कंपनियों के लिए अच्छा होगा, क्योंकि तब ज्यादा एथेनॉल की डिमांड होगी. क्योंकि कच्चा तेल महंगा होने की स्थिति में सरकार का फोकस ज्यादा से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग पर होगा. इसलिए वो कंपनियां जिनके पास चीनी से एथेनॉल बनाने की ज्यादा क्षमता है, वो इसमें बाज़ी मारेंगी.

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