ईरान के साथ अमेरिका की डील की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं. कच्चे तेल में गुरुवार को गिरावट देखने को मिली थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि वो ईरान पर हमला करना की योजना को रद्द करते हैं.
कच्चे तेल में शुक्रवार को भी गिरावट है, क्योंकि संभावना अब इस बात की बन रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक डील हो सकती है. डॉनल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर बात बन गई है, इसलिए आज से ईरान के साथ जंग खत्म हुई. फिलहाल ब्रेंट क्रूड 2% to टूटकर 88.38 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया और WTI क्रूड 86 डॉलर के नीचे फिसलकर $85.16 पर आ गया है.
ट्रंप का दावा, लेकिन ईरान चुप
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप जो कि अभी तक ईरान पर बहुत तेज हमला करने की धमकी दे रहे थे, उन्होंने अचानक ही गुरुवार को ऐलान कर दिया कि वो ईरान पर हमला नहीं करेंगे. जबकि ईरान ने गुरुवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया, ईरान ने कहा कि वो इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज पर गोलीबारी करेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें “अगले कुछ दिनों में” एक समझौते पर दस्तखत होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि एक बार समझौता अंतिम रूप ले लेगा तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल दिया जाएगा. मगर हर बार की तरह, ईरान की ओर से ऐसे किसी समझौते या बातचीत को लेकर कोई हामी नहीं भरी गई है. ईरान की समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने रिपोर्ट दी है कि ईरान ने अभी तक किसी भी समझौते के मसौदे को मंजूरी नहीं दी है.
ईरान का ट्रंप के दावों पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं देना नया नहीं है. इसके पहले भी कई बार ऐसी खबरें आई थीं कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने वाला है, लेकिन बाद में वे खबरें गलत साबित हुईं और समझौता नहीं हो पाया. इसलिए, हो सकता है कि ये खबर भी सिर्फ एक अफवाह साबित हो, लेकिन मार्केट ने इस खबर को पकड़ लिया और कच्चे तेल की कीमतों पर इसका असर भी देखने को मिल रहा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला या बंद?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों तरफ से अलग अलग खबरें आ रही हैं, ईरान की सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को रिपोर्ट दी कि ईरानी सेना ने बिना उनकी इजाजत लिए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे एक तेल टैंकर को रोक दिया, यानी वो ये जताने की कोशिश कर रहे हैं कि ये रास्ता पूरी तरह से उनके नियंत्रण में हैं. दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर कहा कि कमर्शियल जहाजों की इस जलमार्ग से आवाजाही लगातार जारी है. यानी अमेरिका ये दिखाना चाहता है कि ईरान की धमकियों के बावजूद ट्रेड बंद नहीं हुआ है.
ING के एनालिस्ट्स ने अपने एक नोट में कहा कि हम ये मान लेने में सावधानी बरतेंगे कि युद्धविराम हो ही जाएगा. भले ही ऐसा हो जाए, फिर भी ये नाजुक हो सकता है और साफ तौर पर अगर परमाणु चर्चा आगे नहीं बढ़ती है, तो ये बहुत आसानी से टूट सकता है.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद ट्रेडर्स को सतर्क रहना होगा, क्योंकि क्योंकि ईरान ने कहा है कि वो इस मामले पर अभी तक किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचा है. इसलिए बातचीत में किसी भी तरह की रुकावट या झटका, तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताओं को फिर से बढ़ा सकता है.
वहीं दूसरी ओर, कीमतों में ज्यादा गिरावट को रोकते हुए, इस हफ्ते जारी अमेरिकी सरकार के आंकड़ों से पता चला है कि कच्चे तेल का भंडार 72 लाख बैरल गिर गया है. ये गिरावट उम्मीद से कहीं ज्यादा है, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता अमेरिका में मजबूत मांग का संकेत देती है.

