वेदांता ग्रुप की चार कंपनियों की आज 15 जून, 2026 को शेयर बाज़ार में लिस्टिंग हुई. इसके साथ ही इस ग्रुप के मेगा मर्जर का आखिरी चरण पूरा हो गया. जो 4 कंपनियां लिस्ट हुई हैं, लिस्टिंग के तुरंत बाद ही तीन कंपनियों में 5% का लोअर सर्किट लग गया. लिस्टिंग डिटेल्स ये रहीं
- वेदांता एल्युमीनियम मेटल (Vedanta Aluminium Metal) का शेयर NSE पर ₹522 और BSE पर ₹527 पर लिस्ट हुआ. शानदार लिस्टिंग के बाद इस शेयर में 5% का लोअर सर्किट लगा और ये ₹495.90 पर आ गया.
- वेदांता ऑयल एंड गैस (Vedanta Oil & Gas) NSE पर ₹38 और BSE पर ₹41.30 पर हुई, इसमें 5% का लोअर सर्किट लगा और 36.10 रुपये पर आ गया.
- वेदांता आयरन एंड स्टील (Vedanta Iron & Steel) NSE पर ₹20 और BSE पर ₹21 पर हुई, इसमें भी लोअर सर्किट लगा, इसने 19.06 रुपये का इंट्राडे लो बनाया है.
- वेदांता पावर (Vedanta Power) की लिस्टिंग NSE पर ₹41.80 और BSE पर ₹41.30 पर हुई, इंट्राडे में ये शेयर 2.5% तक टूटा और 39.71 रुपये तक लुढ़क गया.
वैल्यू अनलॉकिंग कैसी रही?
अगर इस आंकड़ों को ध्यान से देखें तो अनिल अग्रवाल की वेदांता ग्रुप को ये दांव सही बैठा है. वो ऐसे कि जब कंपनी के अलग-अलग बिज़नेस एक ही कंपनी के नीचे होते हैं, तो निवेशक उसको उतनी वैल्यू नहीं देते हैं, मगर, जैसे ही ये बिज़नेस अलग-अलग हुए, निवेशकों ने इसे हाथों हाथ लिया.
इसको समझिए – 29 अप्रैल को प्री-डिमर्जर क्लोजिंग प्राइस था 773.6 रुपये, ये ये डिमर्जर के रिकॉर्ड डेट से पहले की कंबाइंड वैल्यू थी. पोस्ट-लिस्टिंग पांचों स्वतंत्र कंपनियों की कुल इंप्लाइड वैल्यू 933 रुपये हो गई, यानी कुल वैल्यू गेन 159.4 रुपये प्रति शेयर का हुआ, प्रतिशत में देखें तो ये 20.6% है. जो इस बात को दर्शाता है कि मार्केट ने अलग-अलग बिजनेस को बहुत प्रीमियम वैल्यू दी.
इस पूरी रीस्ट्रक्चरिंग में वैल्यू अनलॉकिंग का एक बड़ा हिस्सा एल्युमीनियम बिजनेस से आया है. लिस्टिंग से पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि एल्यूमीनियम यूनिट 420-450 रुपये प्रति शेयर की रेंज में होगी, लेकिन लिस्टिंग हुई 522 रुपये प्रति शेयर पर, यानी इसने बाज़ार को अनुमानों को काफी पीछे छोड़ दिया. हालांकि एनालिस्ट पहले से ही मानकर चल रहे थे कि ये एल्यूमीनियम यूनिट सबसे वैल्युएबल एसेट के रूप में उभरकर सामने आएगा.
डिमर्जर स्कीम क्या है?
डिमर्जर योजना के मुताबिक 1:1 की स्कीम मंजूर की गई. यानी जिन शेयरधारकों के पास 1 मई की रिकॉर्ड डेट तक अकाउंट में वेदांता के शेयर मौजूद थे, उनको वेदांता लिमिटेड के हर 1 शेयर के बदले अलग होने वाली हर नई कंपनी का 1-1 शेयर मिला है. मतलब हर 1 शेयर के बदले वेदांता एल्युमीनियम मेटल, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता पावर और वेदांता आयरन एंड इसके स्टील का 1-1 शेयर मिला है.
30 अप्रैल को वेदांता के शेयरों का ‘एक्स-डिमर्जर’ था, जब एक स्पेशल प्री-ओपन सेशन में इसके शेयर की वैल्यू पिछले क्लोजिंग प्राइस 773.6 रुपये से एडजस्ट होकर 289.5 रुपये पर आ गई थी. कीमत में आया ये बड़ा बदलाव अलग हो रहे चार बिजनेस की वैल्यू को दर्शाता था, न कि शेयरधारकों की वेल्थ के नुकसान को. ऐसा इसलिए क्योंकि निवेशकों को नई बनी कंपनियों के शेयर मिलने थे.
वेदांता ग्रुप ने रीस्ट्रक्चरिंग क्यों की?
इस रीस्ट्रक्चरिंग के जरिए वेदांता ग्रुप ने अपनी साम्राज्य को 5 अलग-अलग कंपनियों में बांट दिया. ऐसा इसलिए किया गया ताकि हर बिजनेस या कंपनी अपनी अलग टीम के साथ काम कर सके, अपने फैसले खुद ले सके और अपने पैसों का मैनेजमेंट भी खुद करे. इससे अलग अलग कंपनियां अपने स्पेसिफिक बिजनेस पर ही ध्यान देंगी. जैसे- डिमर्जर के बाद बनी कंपनियों में एक एल्युमीनियम उत्पादक, एक अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस बिजनेस, एक बिजली उत्पादन कंपनी और एक फेरस मैटेरियल्स बिजनेस में शामिल है. जबकि खुद वेदांता लिमिटेड, हिंदुस्तान जिंक में अपनी हिस्सेदारी और दूसरे एसेट्स के दम पर टिकी हुई है.

