रिटेल महंगाई के बाद अब देश की थोक महंगाई दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, मई में होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) 9.68% रही है, जो कि अप्रैल में 8.3% थी. ईंधन की ऊंची कीमतों, खाद्य पदार्थों के बढ़े हुए दाम, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और प्राइमरी आर्टकल्स की महंगाई की वजह से थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी देखने को मिली है.
थोक महंगाई के ये आंकड़े रिटेल महंगाई के बढ़ने के कुछ दिनों बाद आए हैं. रिटेल या कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित महंगाई दर भी मई में बढ़कर 16 महीने के उच्चतम स्तर 3.93% पर पहुंच गई, जबकि पिछले महीने यह 3.48% थी. जो खाने-पीने की चीज़ों और ईंधन की बढ़ती कीमतों को दिखाती है.
अप्रैल में थोक महंगाई दर के आंकड़े 42 महीने की ऊंचाई पर थे, मई के आंकड़े अब इससे भी ऊपर जा चुके हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल और मई में थोक महंगाई में सबसे ज़्यादा योगदान मिनरल ऑयल, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, केमिकल और केमिकल उत्पादों, और बेसिक मेटल्स का रहा.
कहां बढ़ी सबसे ज्यादा महंगाई
ईंधन और बिजली की महंगाई अप्रैल के 24.89% से बढ़कर मई में 30.33% हो गई, जो थोक कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण है. इस कैटेगरी में, मिनरल ऑयल की महंगाई 40.74% से बढ़कर 49.82% हो गई, जबकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 56.31% से बढ़कर 61.51% हो गई.
इसके अलावा, मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की महंगाई अप्रैल के 6.68% से बढ़कर मई में 7.48% हो गई, जबकि प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई 3.78% से बढ़कर 4.99% रही है.
मई में खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई भी बढ़ी है, इस बार WPI फ़ूड इंडेक्स अप्रैल के 3.11% से बढ़कर सालाना आधार पर 4.49% हो गया है. खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई 2.43% से बढ़कर 3.60% हो गई, जबकि प्रोसेस्ड फ़ूड की महंगाई 4.53% से बढ़कर 6.14% हो गई.
नई WPI सीरीज भी लॉन्च
इसके अलावा, सरकार ने सोमवार को WPI की एक नई सीरीज़ की भी शुरुआत की है, जिसमें 2022-23 को नया बेस ईयर बनाया गया है; इसने पुरानी 2011-12 वाली सीरीज़ की जगह ली है. नई WPI बास्केट में अब 957 आइटम शामिल हैं, जबकि पहले 697 थे और इसमें सोलर और विंड एनर्जी जैसे रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स भी शामिल किए गए हैं. क्रूड और प्राकृतिक गैस को प्राइमरी आर्टिकल्स की कैटेगरी से हटाकर ईंधन और बिजली की कैटेगरी में डाला गया है.
सरकार ने कहा है कि WPI और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) को पांच साल तक एक साथ जारी किया जाएगा, जिसके बाद होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) को बंद कर दिया जाएगा. बैंकिंग, सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन, इंश्योरेंस, पेंशन फंड मैनेजमेंट, रेलवे, हवाई यात्री परिवहन और टेलीकॉम सेवाओं के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स जारी किए गए हैं.

