भारतीय बाज़ार फिर $5 ट्रिलियन के पार; क्या अब लौटेंगे विदेशी निवेशक?

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India Reclaims $5-Trillion Market Cap

भारतीय शेयर बाज़ार ने एक बार फिर 5 ट्रिलियन डॉलर का कीर्तिमान हासिल कर लिया है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की सभी लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैपिटलाइजेशन 17 जून, 2026 को 5 ट्रिलियन डॉलर की ऊंचाई को पार कर गई. इसके साथ ही भारतीय शेयर बाज़ार 6 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया.

US और ईरान के बीच शांति समझौते की खबर ने भारतीय बाज़ारों में नई जान फूंकी है, जिसके चलते BSE-लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप एक बार फिर से 5 ट्रिलियन के पार निकल गया. आखिरी बार इस ऊंचाई पर ये 8 मई को था.

BSE की लिस्टेड कंपनियों ने पहली बार 21 मई 2024 को 5 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का ऐतिहासिक आंकड़ा छुआ था. ये भारतीय बाज़ारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि इस उपलब्धि के साथ ही भारतीय बाज़ार अमेरिका, चीन, जापान और हॉन्गकॉन्ग के बाद दुनिया का 5वां सबसे बड़ा बाज़ार बन गया था.

क्या रही इस तेजी की वजह?

बाज़ार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता है. इस समझौते के तहत शुक्रवार तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाएगा, इससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय बाज़ारों को सपोर्ट मिला है. साथ ही, जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की वजह से बाज़ार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, क्योंकि जोखिम काफी हद तक कम हुआ है.

बीते चार ट्रेडिंग सेशन में सभी लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में 6% से ज्यादा की तेज़ी दर्ज की गई है. जबकि अप्रैल की शुरुआत से लेकर अब तक ये करीब 14% तक मजबूत हुआ है. बाज़ार की इस तेजी को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने लीड किया. BSE MidCap 150 इस दौरान 16% चढ़ा और BSE SmallCap 250 में 22% का उछाल दर्ज किया गया. जबकि सेंसेक्स सिर्फ 7% ही मजबूत हुआ, जिससे ये पता चलता है कि बड़ी कंपनियों के शेयरों का योगदान इस ऐतिहासिक ऊंचाई को फिर से हासिल करने में कम रहा है.

आसान नहीं रहा $5 ट्रिलियन का सफर

5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का सफर भारतीय बाज़ार के लिए आसान नहीं रहा. 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने में भारतीय बाज़ार को कई दशक लग गए, और 1 ट्रिलियन डॉलर से 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने में पूरे 19 साल का वक्त लगा. जबकि सिर्फ 6 महीने से भी कम वक्त में 4 ट्रिलियन डॉलर से 5 ट्रिलियन डॉलर का मील का पत्थर पार किया था.

बीते 2 साल बेहद खराब

भारतीय बाज़ारों के लिए साल 2025 काफी बुरा साबित हुआ, विदेशी निवेशकों ने 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए. 2026 में भी आउटफ्लो 2 लाख करोड़ रुपये के आस-पास है. मई 2026 में ही भारत ने दुनिया के 5वें सबसे बड़ा बाज़ार होने का रुतबा खोया था. मई 2026 में पहले ताइवान ने भारत को पीछे छोड़कर 5वां पायदान पर कब्जा किया और भारत छठे नंबर पर फिसल गया.
फिर जून, 2026 की शुरुआत में दक्षिण कोरिया ने भारत को छठे पायदान से खिसकार 7वें पर धकेल दिया, क्योंकि कोरिया का मार्केट कैप करीब $5.01 ट्रिलियन हो गया और भारतीय बाज़ार का मार्केट कैप $4.84-4.85 ट्रिलियन पर आ गया. यानी सिर्फ दो हफ्तों में ये 2 पायदान नीचे खिसक गया.

क्यों पिछड़ गया भारत?

सबसे दिचलस्प बात ये है कि इसके 18 महीने पहले तक भारत का मार्केट कैप दक्षिण कोरिया से 3.5 गुना और ताइवान से 2 गुना ज़्यादा था. मगर, ये गैप इतनी जल्द खत्म हो जाएगा, इसका अंदाजा नहीं था. इसके कारणों को खोजने जाएंगे तो सबसे बड़ी वजह ये रही कि भारत AI/सेमीकंडक्टर थीम में दुनिया से पिछड़ता नज़र आया.

इस वक्त पूरी दुनिया के निवेशक AI और चिप से जुड़े शेयरों की तरफ भाग रहे हैं. ताइवान के पास TSMC है, दक्षिण कोरिया के पास Samsung Electronics और SK Hynix हैं, दोनों ही AI हार्डवेयर सप्लाई चेन का हब हैं. जबकि भारत की टेक कंपनियां IT-सर्विसेज देती हैं, AI-हार्डवेयर में उनकी कोई सीधी हिस्सेदारी नहीं है. यही वजह रही कि इधर भारतीय बाज़ार तो पिटते रहे लेकिन, कोरिया का KOSPI इंडेक्स इस साल करीब 107% और ताइवान का इंडेक्स करीब 59% उछल गया.

अगर लेटेस्ट अपडेट देखें तो भारत और ताइवान दोनों की ही मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर या इससे ज्यादा है.

तो अब सवाल ये है कि क्या बाज़ार में जो ये मोमेंटम बना है, ये आगे भी जारी रहेगा. क्या विदेशी निवेशक भारतीय बाज़ारों में लौटेंगे.

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