Nifty IT इंडेक्स 6% टूटा, इंफोसिस, TCS, टेक महिंद्रा की जमकर पिटाई; आखिर IT शेयरों में क्यों मची मारकाट?

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Why are tech stocks down today

टेक शेयरों (Tech Shares) में आज भारी गिरावट देखने को मिल रही है. बाज़ार खुलने के तुरंत बाद ही इंफोसिस, टेक महिंद्रा और TCS 5%-7% तक टूट गए. जिससे निफ्टी IT इंडेक्स 6% तक लुढ़क गया. टेक कंपनियों में ये गिरावट ग्लोबल कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी सर्विसेज की दिग्गज कंपनी एक्सेंचर (Accenture) के रेवेन्यू गाइडेंस घटाने के बाद देखने को मिली है.

एक्सेंचर (Accenture) ने चालू तिमाही के लिए अपने रेवेन्यू गाइडेंस में कटौती की है, जिससे मजबूत मुनाफा दर्ज करने के बावजूद निवेशकों को निराशा हाथ लगी है. गुरुवार को अमेरिकी बाजार में कंपनी का शेयर 19% तक लुढ़क गया, जिस वजह से इंफोसिस और विप्रो जैसी प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs) में भी भारी बिकवाली देखने को मिली.

टेक शेयरों में मची मारकाट की वजह से Nifty IT इंडेक्स सभी सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा टूटने वाला सेक्टर रहा, जो इंट्राडे में करीब 6% तक टूट गया. इसमें सबसे बड़ा झटका इंफोसिस को लगा जो 8% तक गिरा. Mphasis, TCS, Tech Mahindra, HCL Technologies, LTI Mindtree , Persistent Systems और कई बाकी IT शेयरों में भी बड़ी गिरावट देखी गई.

Accenture की गाइडेंस के मायने क्या हैं?

Accenture ने साल में लगातार दूसरी बार गाइडेंस घटाया है, ये भारत की IT कंपनियों के लिए एक बड़ा संकेत है. चूंकि Accenture दुनिया की कुछ बड़ी दिग्गज IT कंपनियों में से एक है, उसका गाइडेंस भारत की IT कंपनियों के लिए एक तरह से पथ-प्रदर्शक का काम करता है. IT कंपनियों को ये पता चलता है कि मार्केट अब आगे किस तरह चलने वाला है. दुनिया की टेक कंपनियां टेक्नोलॉजी पर कितना खर्च करने वाली हैं. Accenture की गाइडेंस को इसके लिए एक पैरामीटर की तरह लिया जाता है. इसलिए Accenture जब भी कोई रणनीतिक बदलाव करता है उसका असर भारत की टेक कंपनियों पर दिखता है. Accenture ने अपने रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है, इसका सीधा मतलब ये है कि शॉर्ट-टर्म यानी आने वाले कुछ महीनों में IT सेक्टर की ग्रोथ और धीमी रहने वाली है.

जेफरीज की राय

इस पर जेफरीज का कहना है कि रेवेन्यू गाइडेंस में इस कटौती के बाद, मार्केट एक्सपर्ट्स भारत की IT कंपनियों की कमाई के अनुमान को और घटा सकते हैं. इससे कंपनियों की लंबी अवधि की ग्रोथ पर सवाल उठेंगे. साथ ही उनके PE मल्टीपल्स पर भी दबाव आएगा, यानी निवेशकों के लिए ये शेयर महंगे दिखने लगेंगे और उनकी वैल्यूएशन कम हो सकती है.

जेफरीज का कहना है कि कंपनियां ग्रोथ बढ़ाने के लिए M&A और नए ग्राहक जोड़ने पर ध्यान दे रही हैं, जिससे थोड़ा सहारा तो मिल सकता है, लेकिन सामने उनके दो बहुत बड़ी चुनौतियां हैं. AI के आने के बाद उनके पारंपरिक ऊपर लगातार दबाव बना हुआ है और दूसरा दुनिया में आर्थिक हालात अब भी ठीक नहीं हुए हैं. इसीलिए जेफरीज ने इस सेक्टर पर ‘अंडरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है.

एक दिलचस्प बात जेफरीज ने भारत की IT कंपनियां के वैल्यूएशन को लेकर कही है. Accenture में 18% की गिरावट के बाद, भारत की टॉप 5 IT कंपनियों का वैल्यूएशन एक्सेंचर के मुकाबले 70% प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं, जो भारतीय IT कंपनियों के PE multiples के लिए आगे और गिरावट का जोखिम पैदा करता है.

HSBC की राय

HSBC का कहना है कि एक्सेंचर के रेवेन्यू गाइडेंस में ये गिरावट AI की वजह से प्रोडक्टिविटी में होने वाले फायदों की चिंताओं के बजाय, जियो-पॉलिटिकल उठा-पटक की वजह से ज्यादा लगती है. भारतीय IT कंपनियों के पास फिलहाल शॉर्ट-टर्म में रिकवरी के लिए कोई बड़ा ट्रिगर नहीं दिख रहा है, हालांकि इस सेक्टर की वैल्यूएशन अब अपने निचले स्तर के करीब पहुंच रही है.

मॉर्गन स्टैनली की राय

मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि कि एक्सेंचर के नतीजे एक बेहद मुश्किल आर्थिक माहौल की ओर इशारा कर रहे हैं, जो दूसरी तिमाही में भी जारी रह सकता है. मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि खतरा तो इस बात का है कि ये ये अनिश्चितता आगे आने वाली तिमाहियों में भी फैल सकती है और भारतीय IT कंपनियों के FY27 के गाइडेंस पर असर डाल सकती हैं.

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