NSE के IPO से पहले बड़ा खुलासा! एक्सचेंज में विदेशी शेयरहोल्डिंग को लेकर उठे सवाल, जांच की मांग

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मार्केट और निवेशकों के बीच आजकल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO की चर्चा है. आने वाला 30,000 करोड़ रुपये डका प्रस्तावित IPO देश का सबसे बड़ा IPO होगा. NSE ने बुधवार को SEBI में DRHP दाखिल किया है. जिसके बाद से एक और ही कहानी सामने आई है.

DRHP में खुलासा

ड्राफ्ट पेपर्स में NSE ने इस बात का खुलासा किया है कि बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका पड़ी हुई है, जिसमें NSE के कुछ निवेशकों की विदेशी शेयरहोल्डिंग और बेनेफिशियल ओनरशिप की जांच करने की मांग की गई है. साथ ही, जांच पूरी होने तक लिस्टिंग की प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी मांग की गई है.

ये याचिका मुंबई के एक 38 साल के इंडिविजुअल की ओर से दी गई है. जिसमें उन्होंने मांग की है कि SEBI को इस पर विचार करने और निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए. साथ ही, NSE से उसके शेयरधारकों के बारे में पूरी जानकारी साझा करने को भी कहा है. जिसमें जिसमें बेनेफिशियल ओनरशिप की जानकारी और KYC रिकॉर्ड्स शामिल हैं.

DRHP में दी गई जानकारी के मुताबिक, ‘याचिकाकर्ता ने कई मांगें की थी, जिसमें SEBI को पेंडिंग आवेदनों पर फैसला लेने का निर्देश देने वाला एक रिट मैनडमस (writ of mandamus) भी शामिल है.’ ये एक ऐसा कानूनी आदेश होता है जिसके जरिए कोर्ट किसी सरकारी संस्था या अधिकारी को अपना कानूनी कर्तव्य पूरा करने का निर्देश देती है.

जांच पूरी होने तक IPO पर रोक!

NSE ने DRHP में बताया ‘याचिकाकर्ता ने हमारी कंपनी को अपने प्रमोटर ग्रुप और शेयरहोल्डर्स /अंतिम लाभार्थियों के KYC दस्तावेजों के साथ उनका खुलासा करने का निर्देश देने, और याचिका के अंतिम निपटारे तक हमारी कंपनी की IPO प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिकाकर्ता ने 8 अप्रैल 2026 को SEBI को एक आवेदन दिया था, जिसमें SEBI से NSE में होने वाले कुछ विदेशी निवेशों की जांच करने की मांग की गई थी. इस आवेदन में कुछ विशेष शेयरहोल्डिंग्स का जिक्र किया गया था, जैसे मॉर्गन स्टेनली से जुड़ी MS स्ट्रेटेजिक (मॉरीशस), सिटीग्रुप से जुड़ी सिटीग्रुप स्ट्रेटेजिक होल्डिंग्स (मॉरीशस), महोगनी लिमिटेड, क्राउन कैपिटल और ‘DVI फंड (मॉरीशस) है.

38 साल के इस याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने विदेशी फंड्स बेहद मामूली भाव पर अपने इक्विटी शेयर खरीदने की मंजूरी दे दी. याचिकाकर्ता ने कहा कि NSE में विदेशी हिस्सेदारी करीब 43.7% है और इसके वास्तविक मालिकों के बारे में कोई पारदर्शिता नहीं है, जो इन कंपनियों के पीछे छिपे हुए व्यक्तिगत निवेशक हो सकते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिका में ऐसी संस्थाओं के Ultimate Beneficial Ownership और पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-Notes) से जुड़े मुद्दों पर भी सफाई मांगी गई है. याचिकाकर्ता ने जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि इन फंड्स ने NSE के शेयरों को बहुत कम कीमत पर खरीदा और अब वे इन्हें रिटेल निवेशकों को ऊंची कीमत पर बेच रहे हैं.

ये मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में 2 मई को फाइल किया गया था, 17 जून को इसकी पहली सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया था. सुनवाई की अगली तारीख 24 जून है

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