ITR Filing: टैक्स रिटर्न भरें या नहीं? कानूनी पचड़े से रहना है दूर, तो इन बातों का रखें ध्यान

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ITR filing is mandatory for AY 2026-27

‘इस दुनिया में समझने के लिए सबसे कठिन चीज इनकम टैक्स है’. ये बात आइंसटीन ने ऐसे ही नहीं कही थी. उनके टैक्स सलाहकार लियो मैटर्सडॉर्फ ने एक बार बताया था कि जब वो आइंसटीन का टैक्स रिटर्न फाइल करने में उनकी मदद कर रहे थे, तब आइंसटीन ने गणित की जटिलताओं से परेशान होकर हार मानते हुए यह बात कही थी.

इनकम टैक्स रिटर्न को आसान करने की कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन इसका हौव्वा खत्म नहीं होता. एक बार फिर से इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग को लेकर बहस चल रही है. कई तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं, मेरी इनकम तो बहुत कम है, क्या मेरे लिए ITR फाइल करना जरूरी है. मैं कौन सा फॉर्म भरूं, क्या मैं खुद भर सकता हूं इत्यादि.

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि अगर उनकी सालाना कमाई टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो उन्हें ITR फाइल करने की जरूरत ही नहीं है. लेकिन यहीं पर वो गलती करते हैं. इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक, भले ही आपकी कुल कमाई पर कोई टैक्स न बन रहा हो, लेकिन कुछ मामलों में जैसे कि अगर आप विदेश में कोई प्रॉपर्टी रखते हैं या बैंक अकाउंट से बहुत बड़ा लेन-देन करते हैं, तो सरकार को इसकी जानकारी देना जरूरी होती है.

टैक्स छूट की लिमिट कैलकुलेशन आपकी उन सेविंग्स और डिडिक्शंस को घटाने से पहले की जाती है. अगर डिडक्शंस से पहले आपकी ग्रॉस इनकम सीमा से ऊपर है, तो रिटर्न भरना ही होगा.
यानी कोई इंडिविजुअल और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUFs) को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना ही होता है, अगर उनकी इनकम एग्जेम्पशन या डिडक्शन को क्लेम करने से पहले अधिकतम टैक्स छूट की सीमा से ज्यादा है.

अब उन परिस्थितियों के बारे में जानते हैं जब आपको इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य होता है.

1- छूट की सीमा से ज्यादा कमाई

अगर किसी इंडिविजुअल की या HUF की सालाना कमाई कुछ खास डिडिक्शंस और एग्जेम्पशंस को क्लेम करने से पहले बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट से ज्यादा है. वो डिडक्शंस और एग्जेम्पशंस नीचे दी गई हैं.

सेक्शन 10A, 10B, and 10BA के तहत डिडक्शन
जैसे नए बने या एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बिजनेस को मिलने वाली छूट

सेक्शन 54, 54B, 54D, 54EC, 54F, 54G, 54GA, या 54GB के तहत एग्जेम्पशंस
जैसे घर या जमीन बेचने पर हुए मुनाफे/कैपिटल गेन को दोबारा निवेश करने पर मिलने वाली छूट

सेक्शन 80C से 80U के तहत मिलने वाले डिडक्शंस
जैसे LIC, PPF, मेडिकल इंश्योरेंस या होम लोन के मूल पर मिलने वाली टैक्स छूट

2- करंट अकाउंट में डिपॉजिट

वित्त वर्ष के दौरान एक या एक ज्यादा करंट अकाउंट्स में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा की गई हो.

3- सेविंग्स अकाउंट में डिपॉजिट

वित्त वर्ष के दौरान किसी एक या एक से ज्यादा सेविंग्स अकाउंट में कुल 50 लाख रुपये से ज्यादा की रकम हो

4- विदेश यात्रा पर खर्च

वित्त वर्ष के दौरान खुद की या किसी अन्य व्यक्ति की विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च किया गया हो

5- TDS/TCS की लिमिट

एक साल के दौरान कुल कटा हुआ TDS या वसूला गया TCS 25,000 रुपये या इससे ज्यादा हुआ. सीनियर सिटिजंस के लिए ये लिमिट 50,000 रुपये या इससे ज्यादा है

6- बिजनेस का टर्नओवर

अगर कोई बिजनेस करते हैं और एक वित्त वर्ष के दौरान उसका टर्नओवर 60 लाख रुपये से ज्यादा हो जाए.

7- प्रोफेशनल कमाई

अगर आप एक डॉक्टर, वकील, सलाहकार हैं. आपकी सालाना कमाई 10 लाख रुपये से ज्यादा है

8- बिजली का बिल

एक वित्त वर्ष के दौरान अगर बिजली का बिल 1 लाख रुपये से ज्यादा आता है

9- विदेशी संपत्तियां

विदेश में किसी संपत्ति के मालिक हैं, लाभार्थी हैं, या उसमें वित्तीय हित रखते हैं, या फिर विदेश के किसी बैंक खाते में Signing Authority रखतें हैं.

इसलिए अगर आप भी ITR फाइल करने जा रहे हैं तो ऊपर दी गई इन शर्तों का जरूर ध्यान रखें, ताकि किसी भी तरह की गलती की कोई गुंजाइश न रहे और आप किसी टैक्स नोटिस या कानूनी पचड़े में न पड़ें.

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