कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर देश की सरकारी तेल कंपनियों पर दिख रहा है. 22 जून को बाज़ार के शुरुआती कारोबार में IOC, BPCL, HPCL के शेयरों में 05%-1% तक की तेज़ी देखने को मिल रही है. ये तेल कंपनियां कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से लंबे समय से मार्जिन पर दबाव झेल रही हैं. अपना मार्जिन सुधारने के लिए तेल कंपनियों ने पेट्रोल, डीज़ल, गैस के दाम बढ़ाए, लेकिन असली राहत उन्हें अब मिल रही है, जब क्रूड की कीमतें 100 डॉलर से फिसलकर 80 डॉलर के करीब आई हैं.
IOC 22 जून की सुबह करीब 2 रुपये की मज़बूती के साथ 145.43 रुपये पर खुला, सुबह 10:15 बजे ये 0.57% की मजबूती के साथ 144.25 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. BPCL 1.03% की तेजी के साथ 309.55 रुपये पर और HPCL 0.51% बढ़त के साथ 394.10 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.
कच्चे तेल की नरमी से मिला सहारा
कच्चे तेल की कीमतें इसलिए कम हुई हैं क्योंकि स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत हुई, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं. ब्रेंट क्रूड फिलहाल 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे ट्रेड कर रहा है. सप्लाई बढ़ने और ईरानी कच्चे तेल के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंधों में मिलने वाली ढील की उम्मीद में पिछले हफ्ते भी कच्चा तेल काफी टूटा था.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में फरवरी के आखिर में शुरू हुआ युद्ध था. अमेरिका, इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला लिया, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्रूड ऑयल की सप्लाई बाधित हुई और कच्चा तेल 126 डॉलर तक गया. जिसके बाद तेल कंपनियों के शेयरों पर असर दिखा. IOC के शेयर ने मिडिल ईस्ट में लड़ाई शुरू होने से ठीक पहले 27 फरवरी 2026 को 188.96 रुपये का 52वीक हाई बनाया था. इसी तरह BPCL ने भी 02 अप्रैल को 266.60 रुपये का 52 वीक हाई बनाया था और HPCL ने 23 मार्च 2026 को 316.20 रुपये का 52 वीक हाई बनाया था.
तेल कंपनियों का आगे प्रदर्शन कैसा रहेगा इसे लेकर ब्रोकरेजेस ने अपने अनुमान जारी किए हैं. जिसमें उन्होंने तेल कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद जताई है. जे पी मॉर्गन और कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज दोनों का ही मानना है कि तेल कीमतों में आई तेज़ गिरावट ने IOC, BPCL, HPCL के मुनाफे पर पड़ रहे दबाव को कम किया है. मगर, इस बात को लेकर चेताया भी है कि ये अब भी तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव और पॉलिसी से जुड़े फैसलों पर निर्भर है.
जे पी मॉर्गन का आउटलुक
जेपी मॉर्गन का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से पेट्रोल और डीजल का मार्केटिंग मार्जिन युद्ध से पहले के स्तर से ऊपर निकल गया है. इससे तेल कंपनियों के लिए शॉर्ट टर्म का आउटलुक काफी बेहतर हुआ है. जेपी मॉर्गन का कहना है कि BPCL और IOCL उसकी पसंदीदा पिक्स बने हुए हैं.
ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में सब्सिडी वाले LPG की बिक्री पर होने वाला नुकसान ऊंचा बना रहेगा. हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो इस नुकसान में कमी आ सकती है.
ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि जून तिमाही पर तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट की वजह से ‘इन्वेंट्री लॉस’ का असर दिख सकता है. मगर, आने वाली तिमाहियों में मुनाफे में सुधार दिखने की उम्मीद है, जिसकी शुरुआत दूसरी तिमाही से होने का अनुमान है.
कोटक का अनुमान
कोटक ने BPCL, HPCL और IOCL को “Sell” से अपग्रेड करके “Reduce” की रेटिंग दी है और सभी कंपनियों के टारगेट प्राइस को भी बढ़ा दिया है. ब्रोकरेज का कहना है कि मार्च-मई के दौरान मुनाफे पर पड़े दबाव के बाद तेल कंपनियों के मुनाफे में सुधार हुआ है और FY27 में घाटे का अनुमान नहीं है. कोटक इसको इस तरह से बयां करता है कि अच्छे दिन कहीं जल्दी वापस आ गए हैं. कच्चे तेल की घटती कीमतों और बेहतर कारोबार माहौल की मदद से, OMCs वित्त वर्ष 2027 में नुकसान से बची रहेंगी.

