8वां वेतन आयोग इस वक्त करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 70 लाख पेंशनर्स के लिए एक नई वेतन और पेंशन स्ट्रक्चर की सिफारिश पर काम कर रहा है. इसी दिशा में ताज़ा अपडेट ये है कि आयोग ने सरकारी मंत्रालयों, विभागों और संस्थानों से एक डेटिकेटेड ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए डेटा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है. आयोग ये सिफारिशें सरकार को सौंपेगा, मंजूर होने के बाद अगले दशक के लिए वेतन, भत्ते और पेंशन बेनेफिट का निर्धारण होगा.
सरकार ने अक्टूबर, 2025 में टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दी थी, यानी वो शर्तें कि आयोग कैसे काम करेगा और उसके दायरे क्या होंगे. इस बात को 8 महीने के करीब हो गए हैं. आयोग को अपना काम पूरा करने और रिपोर्ट सौंपने के लिए जो समय मिला है, उसमें से अब केवल 10 महीने का ही वक्त बचा है. इसके भीतर आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार के सामने रखनी होंगी.
डेटा कलेक्शन भी उसी दिशा में एक बहुत ज़रूरी कदम है. बिना इसके नया पे-स्ट्रक्चर बनाना मुमकिन नहीं है. सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में किस ग्रेड-पे या लेवल पर कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं, इसकी सटीक जानकारी होना जरूरी है. इसी डेटा के आधार पर आयोग ये तय करेगा कि किस स्तर के कर्मचारी को कितनी बढ़ोतरी की जरूरत है. सैलरी, भत्ते या पेंशन बढ़ाने से देश के खजाने पर कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, इसका हिसाब लगाने के लिए भी इस डेटा की जरूरत है.
किसका और कैसे होगा डेटा कलेक्शन
आयोग का कहना है कि नया सैलरी स्ट्रक्चर तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा चाहिए, इसके लिए ज़रूरी लिंक्स और फॉर्मेट्स सभी मंत्रालयों, विभागों और संस्थानों और दफ्तरों को भेजे जा रहे हैं. यह डेटा कलेक्शन सिर्फ सामान्य दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें देश की पूरी प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था शामिल है. इसमें केंद्र सरकार के सकर्मचारी, अखिल भारतीय सेवाएं, डिफेंस, केंद्र शासित प्रदेश, रेगुलेटरी संस्थाएं, सुप्रीम कोर्ट, ऑडिट और अकाउंट्स डिपार्टमेंट्स, साथ ही देश के लाखों रिटायर्ड कर्मचारी, सर्विस एसोसिएशन और कर्मचारी यूनियन भी इसमें शामिल हैं.
डेटा केवल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के ऑनलाइन डेटा पोर्टल 8cpc.gov.in के जरिए ही जमा होगा. ये ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी तरह के फिजिकल डॉक्यूमेंट्स, हार्ड कॉपियां, अलग से भेजी गईं एक्सेल शीट्स और ईमेल को स्वीकार नहीं किया जाएगा. कोई भी जानकारी या डेटा सबमिट करने से पहले, आवेदकों को अपनी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल करके रजिस्ट्रेशन करना होगा और कैप्चा वेरिफिकेशन पूरा करना होगा.
नोट करिए अंतिम तारीख
ऑनलाइन पोर्टल के जरिए डेटा जमा करने की अंतिम तारीख है 10 जून, 2026. इसको मेमोरेंडम एंड सजेशंस प्रक्रिया से कन्फ्यूज मत करिएगा, क्योंकि वो प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. आयोग ने मेमोरेंडम एंड सजेशंस के लिए डेडलाइन पहले ही दो बार बढ़ाई थी, पहले 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 31 मई 2026 की थी, फिर इसे बढ़ाकर 15 जून 2026 किया था.
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ये सिफारिशें सरकार के पास कब तक पहुंचेंगी और कर्मचारियों की जेब में बढ़ा हुआ पैसा कब से आना शुरू होगा? इस कमीशन को 3 नवंबर 2025 को ऑफिशियली गठित किया गया था. सरकार ने इन्हें अपना काम पूरा करने के लिए पूरे 18 महीने का समय दिया है, 8 महीने गुजर चुके हैं, 10 महीने और बचे हैं. इस हिसाब से देखें, तो मई 2027 तक आयोग को अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंप देना चाहिए.
कब तक बढ़ जाएगी सैलरी?
लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मई 2027 से ही सैलरी बढ़ जाएगी. अगर हम पुराने वेतन आयोगों का पैटर्न देखें तो पता चलता है कि आयो जब अपनी रिपोर्ट सरकार को देता है, तो उसके बाद सरकार उसे तुरंत मंजूर नहीं कर लेती है, बल्कि उसकी समीक्षा करती है. कैबिनेट की बैठकें होती हैं, मंजूरियां मिलती हैं और फिर जाकर कहीं नोटिफिकेशन जारी होता है. इस पूरे प्रोसेस में आराम से 2 से 3 साल का वक्त लग जाता है. इस हिसाब से भले ही रिपोर्ट अगले साल आ जाए, लेकिन केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को इसका पूरा फायदा 2029 या 2030 से पहले नहीं मिलने वाला है. मगर, अच्छी बात ये होती है कि इसका एरियर मिलता है. जो एक मोटी रकम होती है.

