8वें वेतन आयोग के गठन के बाद आयोग का बेहद अहम काम रहा है केंद्रीय कर्मचारियों और उनके संगठनों से सुझाव, प्रस्ताव हासिल करना. आयोग को नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) स्टाफ साइड की ओर से कर्मचारियों के लिए कई अहम सुझाव दिए गए हैं.
दरअसल, 8वें वेतन आयोग ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संगठनों से उनकी मांगों और सुझावों के पत्र मांगे थे. इन सुझावों को जमा करने की आखिरी तारीख 15 जून 2026 थी. ये एक अहम पड़ाव था जो कि खत्म हो चुका है. अब वेतन आयोग इन सभी मांग पत्रों और सुझावों का अध्ययन करेगा. इसी के आधार पर आयोग सरकारी कर्मचारियों की नई सैलरी, भत्तों और पेंशन के लिए अपनी फाइनल रिपोर्ट तैयार करेगा.
इस बार आयोग को कई जरूरी प्रस्ताव और सुझाव मिले हैं, जिनमें से एक है मकान किराया भत्ते (HRA) में बदलाव करने की मांग. NC-JCM स्टाफ साइड की ओर से HRA से जुड़े 5 सुझाव मिले हैं.
1- आबादी के आधार पर HRA सीमा
स्टाफ साइड ने प्रस्ताव दिया है कि HRA के नियमों और उसकी सीमाओं को शहरों की आबादी के आधार पर बदलना चाहिए. पिछले कुछ सालों में अलग-अलग शहरों में मकानों के किराए और लागत बहुत तेजी से बढ़ी है. स्टाफ साइड की मांग है कि बढ़ती महंगाई और शहरों की जनसंख्या के स्लैब के हिसाब से HRA की दरों में बदलाव करना चाहिए.
| शहरों की आबादी | शहरों का क्लास | प्रस्तावित HRA (बेसिक सैलरी का %) |
| 50 लाख से ऊपर | X | 40% |
| 5-50 लाख | Y | 35% |
| 5 लाख से नीचे | Z | 30% |
2- HRA मिसमैच को खत्म किया जाए
स्टाफ साइड ने प्रस्ताव दिया है कि वास्तविक हाउसिंग लागत और केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के बीच मिसमैच को खत्म किया जाए. फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को जो HRA मिलता है, वो उनके शहर की कैटेगरी (X, Y, Z) के हिसाब से एक तय प्रतिशत होता है, लेकिन हकीकत में, खासकर बड़े और मेट्रो शहरों में, मकानों के असल किराए बहुत ज्यादा होते हैं, जबकि कर्मचारियों को मिलने वाला HRA काफी कम होता है.
3- हर 5 साल में शहरों की समीक्षा
स्टाफ साइड की तरफ से एक और बहुत जरूरी सुझाव दिया गया है. हर 5 साल में शहरों के वर्गीकरण की समीक्षा की जानी चाहिए. इसके पीछे असल कारण ये है कि देश की आबादी तेजी से बढ़ी है, शहरों का विकास भी तेजी से हुआ है. छोटे शहर तेजी से बड़े शहर बन जाते हैं और महंगे भी हो जाते हैं. मगर, सरकारी फाइलों में इनका स्टेटस छोटे शहर का ही रहता है, जिससे भत्ता उनको उसी स्टेटस के हिसाब से मिलता है. इससे केंद्रीय कर्मचारी जो ऐसे शहरों में रहते हैं, उनकी जेब पर बोझ आता है.
4- DA से लिंक हो HRA
स्टाफ साइड ने प्रस्ताव दिया है कि मंथली HRA को महंगाई भत्ते (DA) से सीधे जोड़ा (DA-Indexed) जाए. ताकि महंगाई बढ़ने पर कर्मचारियों को मिलने वाला HRA अपने आप ही महंगाई से एडजस्ट हो जाएगा. मतलब ये कि जिस तरह हर 6 महीने में महंगाई के हिसाब से कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अपने आप बढ़ जाता है, ठीक उसी तरह HRA भी सीधे DA से लिंक हो जाना चाहिए. अभी HRA की दरें कई सालों तक फिक्स रहती हैं. जब तक कि DA 50% या 100% जैसे किसी खास आंकड़े को पार न कर जाए.
5- पेंशनर्स के लिए भी HRA
स्टाफ साइड चाहता है कि जो पेंशनर्स हैं, उनके लिए मकान किराया भत्ता (HRA) देने की व्यवस्था की जाए, क्योंकि उनकी पेंशन का एक बड़ा हिस्सा तो घर का किराया देने में निकल जाता है, जिससे उनका गुज़ारा मुश्किल हो जाता है. इसलिए पेंशनर्स को भी अगर मंथली HRA दिया जाए तो उनका जीवन आसानी से कट सकता है.

