सोमवार की बढ़त के बाद सोने की कीमतों में आज 23 जून, 2026 एक बार भारी गिरावट दिख रही है. घरेलू मार्केट में MCX पर सोना वायदा करीब 2,000 रुपये प्रति 10 ग्राम टूटा हुआ है. जबकि सोमवार को सोना वायदा 1,48,118 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था.
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड करीब 1.4% टूटकर $4,131.61 प्रति आउंस पर आ गया, जबकि फ्यूचर्स मार्केट में गोल्ड 2.2% टूटकर $4,151.10 प्रति आउंस तक फिसल गया. हालांकि इसके पिछले सत्र में सोना वायदा तकरीबन 0.75% तक मज़बूत हुआ था, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर सेंटीमेंट्स काफी पॉजिटिव थे.
कहां जाएगा सोने का भाव?
सोने की कीमतें अब यहां से कहां जाएंगी. इस पर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) का कहना है कि आने वाले हफ्तों में सोने की कीमतों पर दबाव दिख सकता है. इसके पीछे सबसे बड़े कारण हैं. डॉलर की मज़बूती, बढ़ता ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और सख्त मॉनिटरी पॉलिसी, जिससे ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने का अनुमान है. इन वजहों से सोने की चमक फीकी पड़ेगी.
पिछले हफ्ते हुई फेडरल रिजर्व की बैठक में चेयरमैन केविन वॉर्श के हॉकिश रवैये ने डॉलर को हवा दी, जिससे US डॉलर इंडेक्स 13 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया. US डॉलर इंडेक्स अब भी 101 के ऊपर बना हुआ है. पिछले हफ्ते फेड के पॉलिसीमेकर्स ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 3.50%-3.75% ही रखा. मगर, इस बात की ओर इशारा किया कि इस साल 2026 में ब्याज दरें ऊंची ही बनी रहेंगी, कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है, इसके उलट साल के खत्म होने से पहले पहले एक बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
बढ़ती महंगाई, मज़बूत डॉलर से दबाव
अब ध्यान देने वाली बात ये है कि मार्केट के 90% ट्रेडर्स और निवेशक मान चुके हैं कि दिसंबर के महीने में फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने जा रहा है. यहां तक कि कुछ निवेशक एक से ज्यादा बार ब्याज दर में बढ़ोतरी का अनुमान जता रहे हैं. क्योंकि फेड के पॉलिसीमेकर्स अब भी महंगाई के खतरों पर अपना ध्यान लगाए हुए हैं.
जब डॉलर मजबूत होता है और ब्याज दरें भी ज्यादा होती हैं तो ये स्थिति सोने के ट्रेडर्स के लिए निगेटिव होती है. क्योंकि डॉलर की मजबूती से दूसरे देशों के ट्रेडर्स के लिए सोना खरीदने की लागत बढ़ जाती है. अब चूंकि सोना कोई ब्याज तो देता नहीं है, ऐसे में सोने के निवेशकों के लिए अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है. ऐसे में बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशक सोने को छोड़कर ज्यादा यील्ड देने वाले एसेट्स की तरफ रुख करते हैं.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने इस बात पर जोर दिया कि अगर अमेरिकी डॉलर की ये मजबूती आगे भी जारी रहती है, तो इससे सोने की कीमतों पर थोड़ा और दबाव बन सकता है. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि निवेशक फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति के हिसाब से अपनी उम्मीदों और निवेश को बदलना शुरू कर देंगे.
एनालिस्ट्स ये कह रहे हैं कि अगर अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं या अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आंकड़े बेहतर बने रहते हैं, तो इससे ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने के फैसले को ताकत मिलेगी. ये स्थिति डॉलर को मजबूती देगी और सोने पर इससे दबाव बनेगा.
कहां है बाज़ार की नज़र
निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं पर भी है. स्विट्जरलैंड में हुई शुरुआती बातचीत के बाद, अमेरिका ने ईरानी तेल की कुछ बिक्री पर 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों से छूट दे दी है. इसका मतलब है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी. जब बाजार में तेल ज्यादा आएगा, तो कच्चे तेल की कीमतें घट सकती हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को फायदा होता है.
निवेशकों की निगाहें अमेरिका के रिटेल महंगाई के आंकड़े पर भी रहेगी, जिसे पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडीचर (PCE) कहते हैं. PCE के आंकड़े गुरुवार को जारी होंगे. ये आंकड़े इसलिए ज्यादा मायने रखते हैं क्योंकि ये फेड का पसंदीदा महंगाई का पैमाना है.

