IRFC यानी Indian Railway Finance Corporation का OFS 24 जून, 2026 से नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है. सरकार इस रेलवे फाइनेंस कंपनी में अपनी 2% हिस्सेदारी बेचना चाहती है. इसमें 1% हिस्सा OFS के जरिए बेचने की योजना है, जबकि 1% का ग्रीन शू ऑप्शन होगा. IRFC को मिलाकर FY27 में ये सरकार का छठा विनिवेश होगा. रिटेल निवेशकों के लिए ये ऑफर गुरुवार को खुलेगा.
OFS का दबाव, 5% से ज्यादा टूटा IRFC
सरकार ने मंगलवार को IRFC के विनिवेश का ऐलान किया था, बुधवार को शेयर मार्केट खुलते ही इसके शेयरों पर सुबह से ही दबाव देखने को मिल रहा है. इंट्राडे में ये 92.92 रुपये तक फिसल गया यानी 5.82% की गिरावट देखने को मिली. सुबह 11 बजे तक शेयर 5.08% की गिरावट के साथ 93.65 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.
IRFC के विनिवेश की सरकार की ये पहली कोशिश नहीं है. फरवरी में भी सरकार ने इसके 2% शेयरों को बेचने की कोशिश की थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई थी, क्योंकि संस्थागत निवेशकों की तरफ से ज्यादा दिलचस्पी देखने को नहीं मिली थी और उनका हिस्सा पूरी तरह भर नहीं पाया था. सरकार ने 23.52 करोड़ शेयर संस्थागत निवेशकों के लिए रिजर्व रखे थे, लेकिन उनकी ओर से 22.34 करोड़ शेयरों की बोली आई यानी 94.98% हिस्सा ही भर पाया था. मतलब सरकार की ये कोशिश कामयाब नहीं हो सकी थी.
तीन महीने बाद सरकार ने एक बार फिर से कोशिश की है. करीब 26.13 करोड़ शेयरों को दो दिनों के लिए बिक्री के लिए रखा गया है. इसका फ्लोर प्राइस 91 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. जो कि मंगलवार को IRFC की क्लोजिंग प्राइस से 7.79% के डिस्काउंट पर है. शायद इसलिए कि पिछली बार की तरह इस बार ये शेयर सेल फ्लॉप न हो जाए. इस विनिवेश से सरकार को 2,300 करोड़ रुपये मिलेंगे.
क्या करती है IRFC
IRFC भारतीय रेलवे के लिए एक मजबूत स्तंभ है. इसने भारतीय रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण और विस्तार में काफी बड़ा योगदान दिया है. IRFC का मुख्य काम रेलवे के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को फंडिंग की कमी की वजह से अटकने से रोकना है. ये रेलवे के कई बड़े प्रोजेक्ट्स की फंडिंग करती है. जैसे रेलवे को अगर कहीं इलेक्ट्रिफिकेशन का काम करना है, पोर्ट्स और इंडस्ट्रियल हब्स को रेलवे से कनेक्टिविटी जोड़नी है, इसके लिए फाइनेंस IRFC ही करती है. इसके अलावा, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए फंडिंग सॉल्यूशंस IRFC ही मुहैया कराती है. IRFC एक बहुत सफल कंपनी है, इसके क्रेडिट प्रोफाइल बहुत मजबूत है इसलिए ये सरकार की ‘नवरत्न’ कंपनियों में शुमार है.
इस बार सरकार का बड़ा लक्ष्य
सरकार ने विनिवेश के जरिए FY27 में 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. ये पिछली बार FY26 के संशोधित अनुमान यानी करीब 33,800 करोड़ रुपये से 136% ज्यादा है. इस वित्त
में अबतक सरकार ने 5 CPSE और बैंकों में मॉइनॉरिटी हिस्सेदारी बेचकर 16,480 करोड़ रुपये जुटाए हैं. जिसमें कि Coal India, NHPC, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शामिल है. जो कि एक बहुत अच्छी शुरुआत है.
बीते कुछ सालों से सरकार की विनिवेश की गाड़ी पटरी पर नहीं चल रही थी, सरकार हर बार लक्ष्य को चूक रही थी. जैसे कि पिछले साल भी 47,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य था, जो कि बाद में घटकर करीब 34,000 करोड़ रुपये रह गया था. मगर इस बार सरकार पूरे जोश में है, इसलिए बड़ा लक्ष्य भी तय किया है.
LIC का OFS कब आएगा?
लंबे समय से देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन-LIC के विनिवेश का इंतजार हो रहा है. कई मीडिया रिपोर्ट्स इस बात का दावा कर रहे हैं कि सरकार जून के अंत में या जुलाई की शुरुआत में 2% हिस्सेदारी बेचने के लिए OFS लेकर आ सकती है. डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने इसके लिए मर्चेंट बैंकर्स जैसे Goldman Sachs, मोतीलाल ओसवाल, BNP पारिबा के साथ मिलकर तैयारियां शुरू कर दी हैं. सरकार इस OFS के जरिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखती है.
दरअसल ये विनिवेश जरूरी भी है, क्योंकि SEBI के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों के मुताबिक- शेयर बाजार में लिस्टेड हर कंपनी में कम से कम 25% हिस्सेदारी पब्लिक की होनी चाहिए अभी LIC में सरकार की हिस्सेदारी 96.5% है, मतलब ये कि केवल 3.5% हिस्सा ही पब्लिक के पास है. इसलिए सरकार को इसे घटाकर 75% पर लाना होगा. सरकार को ऐसा करने के लिए मई 2032 तक की डेडलाइन दी गई है. इसलिए सरकार एक बार में सारा शेयर न बेचकर थोड़ा-थोड़ा करके हिस्सा बेच ही है.

