सोने में गिरावट कहां जाकर थमेगी? बीते तीन महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमतें 17% से ज्यादा टूट चुकी हैं. पिछले 13 साल में अपनी सबसे खराब तिमाही गिरावट दर्ज करने के बाद भी सोने की गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. कॉमेक्स पर सोना वायदा अब 4,000 डॉलर प्रति आउंस के नीचे फिसल चुका है, 1 जुलाई, 2026 को ये करीब 1.5% टूटकर 3,976 डॉलर तक चला गया.
घरेलू मार्केट में भी सोने और चांदी का भी यही हाल है. MCX पर सोना अगस्त वायदा 1 जुलाई को दोपहर 12 बजे 1,861 रुपये टूटा हुआ है और 1,40,670 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है. कल सोना वायदा 1,42,531 रुपये पर बंद हुआ था, यानी सोना 1.35% या करीब 2,000 रुपये कमजोर हुआ है. सोना जून के महीने में ही 12.6% या 20,000 रुपये से ज्यादा टूटा है. MCX पर 1 जून को सोना वायदा 1,60,911 रुपये पर था, लेकिन अब ये 1.40 लाख के करीब आ चुका है. जुलाई के महीने की शुरुआत भी भारी गिरावट के साथ हुई है.
चांदी का तो और भी बुरा हाल है. चांदी का जुलाई वायदा 1 जुलाई को करीब 6,000 रुपये या 2.57% की कमजोरी के साथ 2,21,060 रुपये प्रति किलो तक फिसल चुका है. चांदी सिर्फ जून के महीने में ही 45,000 रुपये प्रति किलो या 17% टूट चुकी है. MCX पर 1 जून को चांदी वायदा 2.66 लाख रुपये प्रति किलो था, जो कि अब 2.21 लाख रुपये पर आ चुका है.
सोने-चांदी में गिरावट क्यों?
सोना वायदा जून तिमाही में करीब 14% टूटा है, ये साल 2013 के बाद सबसे खराब तिमाही प्रदर्शन है. सोने और चांदी की कीमतों में आ रही भारी गिरावट की कई वजहें हैं, जैसे ईरान-अमेरिका की जंग, जो कि फरवरी के आखिर में शुरू हुई, लेकिन सोना सबसे ज्यादा पिघला जून के महीने में. इसकी दो सबसे बड़ी वजहें रही, फेड का ब्याज दरों को लेकर सख्त रवैया और महंगाई को लेकर बढ़ता खतरा.
फेड की जून की बैठक के बाद सोने की कीमतों में तेज कमजोरी देखने को मिली, क्योंकि पॉलिसीमेकर्स इस साल कम से कम एक बार ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में दिखाई दिए. इसकी वजह थी मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा. जबकि पहले यही पॉलिसीमेकर्स 2026 में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जता रहे थे, इसने सोने की कीमतों पर जबरदस्त दबाव डाला.
CME फेडवॉच के मुताबिक मार्केट भी यही मानकर चल रहा है कि इस साल कम से कम एक बढ़ोतरी तो तय है. अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं तो ये सोने के लिए एक और धक्का होगा, क्योंकि सोना बिना ब्याज देने वाला एसेट है यानी नॉन-यील्ड एसेट, इससे सोने की अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट बढ़ जाएगी, लोग उन एसेट की तरफ शिफ्ट होंगे जहां उन्हें बेहतर ब्याज मिलेगा. इससे सोने की कीमतों पर और दबाव बनेगा.
वॉर्श के भाषण पर टिकीं नजरें
अब दुनिया भर के बाजारों और मार्केट एक्सपर्ट्स की नजरें टिकी हैं अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के बुधवार को होने वाले संबोधन पर. वॉर्श पुर्तगाल में यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के एक फोरम पर भाषण देने वाले हैं. जून में हुई पॉलिसी बैठक के बाद किसी सार्वजनिक मंच पर ये उनका पहला संबोधन होगा.
वार्श अपने भाषण में महंगाई और आर्थिक हालातों को लेकर क्या कहेंगे, इससे ब्याज दरों को लेकर भविष्य के लिए संकेत मिल सकेंगे. इससे कम से कम मार्केट को ये अंदाजा हो सकेगा कि फेड ब्याज दरों को लेकर अपने सख्त रवैये पर कायम रहेगा या फिर इसमें ढिलाई की कोई गुंजाइश है. फेड का एक इशारा सोने के ट्रेंड को पलट सकता है.

