मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के साथ ही सोने की कीमतों में एक बार फिर से तेज़ी आ गई है. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाज़ारों में सोना गुरुवार को 1% मज़बूत हुआ है. पिछले हफ्ते सोने में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी, इसके बाद अब निवेशकों ने सोने में खरीदारी शुरू कर दी है.
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में स्पॉट गोल्ड 1.14% की तेजी के साथ $4,123.91 डॉलर प्रति आउंस पर पहुंच गया, जबकि सोना वायदा 1.25% मजबूत होकर $4,132.95 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच गया. हालांकि बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से सोना 2% से ज्यादा टूटा था.
घरेलू मार्केट में भी सोना अगस्त वायदा 1,600 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी के साथ ट्रेड करता हुआ दिखा है. फिलहाल 1.54 लाख रुपये के ऊपर ट्रेड कर रहा है. हालांकि इंट्राडे में ये 1.43 लाख रुपये तक चला गया था.
सोने की कीमतों में तेज़ी की वजह क्या है?
गुरुवार को दूसरे दिन भी अमेरिका ने ईरान पर हमले किए हैं. जिसका जवाब ईरान ने भी दिया है. ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि अमेरिका ने आज ईरान के तटीय इलाकों में कई ठिकानों पर नए हमले किए. जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइलें दागी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स कहा गया है कि मध्यस्थ अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. मगर, पिछले दो दिनों में दोनों देशों ने लगातार हमले करके सीज़फायर की उम्मीदों को खत्म कर दिया है.
अमेरिकी सेना के मुताबिक, डॉनल्ड ट्रंप इस बात से नाराज़ हैं कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से आवाजाही के लिए नहीं खोला है. ईरान और अमेरिका इस संकरे समुद्री रास्ते को लेकर आमने सामने हैं. ट्रंप की नौसैनिक नाकेबंदी की चेतावनी के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जहाज़ों की आवाजाही धीमी पड़ गई है. मगर, सोना गिरने की बजाय चढ़ रहा है, आखिर इसकी वजह क्या है?
फेड के मिनट्स ने गोल्ड को सहारा
दरअसल, यहां पर गोल्ड के लिए मिडिल ईस्ट में दोबारा पैदा हुए तनाव से ज्यादा फेडरल रिजर्व की जून की बैठक के मिनट वाला फैक्टर ज्यादा काम कर रहा है, जो कि बुधवार को जारी हुए हैं. मिनट्स आने के बाद बाज़ार को उम्मीद है कि ब्याज दरों में इस साल के अंत तक कटौती हो सकती है.
फेडरल रिजर्व की जून 2026 की बैठक के मिनट्स से ये बात सामने आई है कि ब्याज दरों के भविष्य को लेकर फेड के सदस्यों की एक राय नहीं है. कुछ का मानना है कि अगर महंगाई का दबाव बना रहता है, तो आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है. जबकि कई सदस्य ये कह रहे हैं कि अगर इकोनॉमी की ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक ही रहती है, तो इस साल के अंत तक ब्याज दरें मौजूदा स्तर पर रह सकती हैं या इनमें हल्की कटौती की भी गुंजाइश बन सकती है.
महंगाई की चिंता बिगाड़ेगी खेल
मगर, फेड अधिकारियों को अब भी महंगाई के ऊंचे बने रहने की चिंता सता रही है, उनका मानना है कि AI से जुड़ी मजबूत मांग, मिडिल ईस्ट में में जारी तनाव और टैरिफ जैसे कई फैक्टर्स महंगाई को ऊंचा बनाए रख सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो फेडरल रिजर्व को पॉलिसी को और सख्त करना पड़ सकता है.
14 जुलाई को अमेरिका के रिटेल महंगाई के आंकड़े आएंगे, बाजार की नजर इस पर होगी. इसके बाद 28-29 जुलाई को फेड की बैठक होगी. इसलिए ये महीना ब्याज दर पर फैसले के लिए काफी अहम है, क्योंकि महंगाई के आंकड़ों को ध्यान में रखकर ही फेडरल रिजर्व दरों को लेकर कोई फैसला करेगा.
क्रूड और डॉलर की सुस्ती से सपोर्ट
हालांकि सोने के लिए अच्छी खबर ये भी है कि मिडिल ईस्ट में दोबारा तनाव बढ़ने की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों जोरदार उछाल आया, ये 79.54 डॉलर प्रति बैरल तक उछला भी, लेकिन फिलहाल 2.5% की कमजोरी के साथ 76 डॉलर पर आ चुका है.
साथ ही, डॉलर इंडेक्स जो कि 13 महीने की ऊंचाई की सैर कर रहा था और 101 डॉलर के ऊपर था. अब ये भी 101 डॉलर से नीचे फिसलकर 100.85 पर आ गया है. क्रूड का गिरना और डॉलर का कमजोर होना, दोनों ही फैक्टर सोने की कीमतों को सपोर्ट करते हैं.

