जो लोग बार-बार नौकरी बदलते हैं, उनको इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय बड़ी सावधानी की ज़रूरत होती है. क्योंकि ज्यादातर कर्मचारी जानकारी के अभाव में सिर्फ मौजूदा कंपनी के फॉर्म-16 के आधार पर ITR फाइल कर देते हैं. नतीजा, टैक्स डिमांड या इनकम टैक्स का नोटिस आता है. इसलिए ज़रूरी है कि अगर आप वित्त वर्ष के बीच में नौकरी बदलें तो Income Tax Return (ITR) फाइल करते समय दोनों कंपनियों के फॉर्म-16 के आधार पर ही करें.
फॉर्म-16 क्या होता है?
बहुत से लोग फॉर्म-16 को लेकर कंफ्यूज रहते है कि ये आखिर है क्या? Form 16 क्या होता है? फॉर्म-16 एक टैक्स सर्टिफिकेट होता है जो कि आपकी कंपनी की ओर से जारी किया जाता है, जिसमें आप काम करते हैं या करते थे. इसमें ऐसी कई सारी जानकारियां होती है. जैसे- सैलरी, टैक्स छूट, डिडिक्शन और सरकार के पास जमा कराए गए TDS (Tax Deducted at Source) की डिटेल्स होती हैं. फॉर्म-16 को ही Income Tax Return (ITR) भरने का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है.
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ITR में एक वित्त वर्ष सैलरी बतानी होती है, उसको इस बात से कोई मतलब नहीं कि आपने एक साल में कितनी बार नौकरियां बदलीं और सैलरी पाई. मान लीजिए कि आपने FY2025-26 के दौरान जॉब बदली. मतलब आपने AY2026-2027 के दौरान कई कंपनियों में काम किया है. आपको सिर्फ मौजूदा कंपनी की सैलरी नहीं बतानी है, क्योंकि इससे टैक्स कैलकुलेशन गलत होगा.
कई फॉर्म-16 मिलने पर क्या करें?
जिन-जिन कंपनियों में आपने एक वित्त वर्ष के दौरान काम किया होगा, सभी का फॉर्म-16 आपको मिलेगा. अगर आपकी पिछली कंपनी ने फॉर्म-16 नहीं दिया है तो आपको उससे संपर्क करना चाहिए और फॉर्म-16 की मांग करनी चाहिए, ताकि आप समय पर अपना ITR फाइल कर सकें. ध्यान रहे कि अलग अलग फॉर्म-16 होने के मतलब अलग अलग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना नहीं है, बल्कि सभी फॉर्म 16 की जानकारी मिलाकर एक रिटर्न फाइल करना है.
तो अब सवाल ये है कि इन फॉर्म-16 के साथ क्या करें, इसका इस्तेमाल इनकम टैक्स रिटर्न में कैसे करें. सबसे पहले एक वित्त वर्ष के दौरान पिछली सभी कंपनियों से मिले फॉर्म-16 या सैलरी से जुड़े TDS दस्तावेज अपने पास संभालकर रखें, इन सभी का इस्तेमाल इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग में होता है. अब आपको नीचे बताए गये 7 स्टेप्स ध्यान में रखनी हैं.
- आपने एक वर्ष के दौरान जितनी भी कंपनियों में काम किया है, वहां से जारी फॉर्म-16 या सैलरी TDS सर्टिफिकेट जरूर लें
- ITR में केवल मौजूदा नहीं बल्कि एक वित्त वर्ष के दौरान पिछली सभी कंपनियों की कुल ग्रॉस सैलरी का जिक्र करें
- हर कंपनी TDS काटती है, सारी कंपनियों के TDS को ITR में शामिल करें, ताकि आपको पूरा टैक्स क्रेडिट मिल सके
- फॉर्म 16 में दर्ज TDS और इनकम का मिलान फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) से जरूर करें
- अगर मिलान करने के बाद आपको कुछ मिसमैच दिखता है तो पहले उसे ठीक कराएं, उसके बाद ITR फाइल करें
- अगर नौकरी बदलते समय आपने नई कंपनी को फॉर्म 12B के जरिए पिछली नौकरी की सैलरी की जानकारी नहीं दी थी, तो पूरे साल के हिसाब से पर्याप्त TDS नहीं कटा होगा ऐसी स्थिति में ITR दाखिल करते समय आपको बचा हुआ टैक्स और उस पर लागू ब्याज चुकाना पड़ सकता है
- प्री-फिल्ड डेटा पर आंख बंद करके भरोसा न करें, सैलरी की जानकारी को अपने फॉर्म 16 से जरूर मिलाएं, सैलरी, TDS, कटौतियों और टैक्स क्रेडिट की दोबारा जांच करने के बाद ही ITR फाइल करें
थोड़ी-सी सावधानी और धैर्य आपको भविष्य में टैक्स नोटिस और अतिरिक्त भुगतान से बचा सकती है.
जॉब बदली तो फॉर्म 12B दो
जब हम जॉब बदलते हैं, नई कंपनी में जाते हैं तो हमें कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. नौकरी बदलते समय कर्मचारी को नई कंपनी को पिछली कंपनी की सैलरी की जानकारी देनी चाहिए. इसके लिए आमतौर पर फॉर्म 12B का इस्तेमाल किया जाता है. अगर कर्मचारी इसकी जानकारी नहीं देता है तो हो सकता है कि उसने केवल अपनी तरफ से दी गई सैलरी पर TDS काटा हो. ऐसे में पूरे साल की कुल आय पर जितना टैक्स बनता है, उससे कम TDS जमा हो सकता है. ऐसे में आपको ITR फाइल करते समय अतिरिक्त टैक्स के साथ ब्याज भी देना पड़ सकता है.

