अगर आपको भी लगता है कि आपके पास जितने ज्यादा क्रेडिट कार्ड होंगे और आप जितना ज्यादा क्रेडिट कार्ड से खर्च करेंगे तो आपका CIBIL स्कोर भी उतना ही बढ़िया होगा. क्रेडिट कार्ड को लेकर लोगों के मन में बहुत सारी गलत धारणाएं हैं, बहुत से लोग क्रेडिट कार्ड को रखने में ही बुराई मानते हैं तो कई लोग भर-भर के क्रेडिट कार्ड रखते हैं. तो आखिर क्या है क्रेडिट कार्ड को सही तरीके से इस्तेमाल करने का तरीका. ये आर्टिकल आपकी सोच को क्लियर करे देगा.
CIBIL स्कोर बनता कैसे है?
CIBIL स्कोर एक दिन में नहीं बनता है, ये आपके पूरे क्रेडिट के बर्ताव (Credit Behaviour) यानी कर्ज़ और क्रेडिट कार्ड को संभालने के तरीके के आधार पर तैयार किया जाता है. CIBIL स्कोर 300 से 900 के बीच का एक तीन अंकों का नंबर होता है, जो आपकी क्रेडिट हेल्थ बताता है. स्कोर जितना 900 के करीब, लोन या कार्ड अप्रूवल की संभावना उतनी ज़्यादा. ये स्कोर चार मुख्य फैक्टर्स से मिलकर बनता है.
| पेमेंट हिस्ट्री | करीब 30-35% (यानी आप अपने बिल और EMI समय पर चुकाते हैं या नहीं, ये सबसे बड़ा फैक्टर है) |
| क्रेडिट यूटिलाइजेशन | करीब 25-30% (आप अपनी टोटल क्रेडिट लिमिट का कितना हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं) |
| क्रेडिट मिक्स और अवधि | करीब 25% (सिक्योर्ड, अनसिक्योर्ड क्रेडिट का हेल्दी मिक्स है या नहीं, क्रेडिट हिस्ट्री कितनी पुरानी है) |
| नई इंक्वायरीज़ | करीब 10% (आपने कितनी बार नए लोन या कार्ड के लिए अप्लाई किया) |
कोई भी क्रेडिट ब्यूरो अपना एग्ज़ैक्ट फॉर्मूला लोगों को नहीं बताता है, इसलिए ये आंकड़े अलग-अलग सोर्स में थोड़े अलग-अलग मिल सकते हैं, लेकिन दिशा हमेशा एक जैसी रहती है.पेमेंट हिस्ट्री और यूटिलाइजेशन, दोनों मिलाकर आपके स्कोर का आधे से ज़्यादा हिस्सा तय करते हैं.
क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो क्या है?
ये बताता है कि आपको जितनी कुल Credit Limit मिली है, उसमें से आप कितना इस्तेमाल कर रहे हैं. इसको एक फॉर्मूले के जरिए प्रतिशत में निकाला जाता है.
क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो = (कुल आउटस्टैंडिंग बैलेंस ÷ कुल क्रेडिट लिमिट) × 100
उदाहरण के लिए मान लीजिए आपके पास दो क्रेडिट कार्ड हैं.
कार्ड A: लिमिट ₹50,000, बैलेंस ₹15,000
कार्ड B: लिमिट ₹75,000, बैलेंस ₹10,000
तो कुल लिमिट = ₹1,25,000, कुल बैलेंस = ₹25,000
यूटिलाइजेशन रेश्यो = (25,000 ÷ 1,25,000) × 100 = 20%
कितना यूटिलाइजेशन रेश्यो सही माना जाता है?
कई रिपोर्ट्स पढ़ने के बाद ये बात समझ आती है कि ज़्यादातर फाइनेंस एक्सपर्ट्स एक बात पर सहमत हैं कि ये रेश्यो 30% से नीचे रहना चाहिए. यानी आपकी कुल क्रेडिट लिमिट ₹1,00,000 है, तो कभी भी ₹30,000 से ज़्यादा आउटस्टैंडिंग नहीं होना चाहिए. मगर, ये कोई आधिकारिक नियम नहीं है, एक्सपर्टर्स की सिर्फ एक सलाह है. इसको बेहतर स्कोर के लिए 10% से नीचे भी रखा जा सकता है. मगर, 60-70% से ऊपर यूटिलाइजेशन से बैंक्स को ये संदेश जाता है कि आप वित्तीय परेशानी से गुज़र रहे हैं.
क्या जीरो यूटिलाइजेशन सही है?
अक्सर लोग क्रेडिट कार्ड लेकर बैठ जाते हैं, ये सोचकर कि कार्ड का इस्तेमाल ही नहीं करेंगे तो कुछ होगा भी नहीं. यहां पर ये समझना जरूरी है कि जीरो यूटिलाइजेशन का मतलब है कि आपकी कोई एक्टिव क्रेडिट हिस्ट्री नहीं बन रही. कार्ड का थोड़ा इस्तेमाल करके समय पर पूरा भुगतान करना, कार्ड को बिल्कुल न छूने से बेहतर माना जाता है.
कितने क्रेडिट कार्ड रखने चाहिए?
ये ऐसा सवाल है जो बहुत पूछा जाता है और सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन भी पैदा करता है. तो सच ये है कि इसके लिए कोई फिक्स्ड संख्या नहीं है. अगर कुछ मायने रखता है तो वो ये कि आप उन कार्ड्स को कैसे मैनेज करते हैं. आपको कितने क्रेडिट कार्ड्स रखने चाहिए ये पूरी तरह से आपकी आय, खर्च और फाइनेंशियल डिसिपलिन पर निर्भर करता है.
ज़्यादा कार्ड्स रखने के अपने फायदे हैं और नुकसान भी हैं.
फायदा: ज़्यादा कार्ड्स रखने से आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट बढ़ जाती है. अगर आपका खर्च वही रहता है, तो कुल लिमिट बढ़ने से आपका ओवरऑल यूटिलाइजेशन रेशियो अपने-आप कम हो जाता है, जो कि CIBIL स्कोर के लिए अच्छा है.
नुकसान: ज़्यादा कार्ड्स का मतलब है ज़्यादा बिल का ट्रैक करना, तारीखों को याद रखना, डेडलाइन मिस होने का खतरा. हर नए कार्ड के लिए किया गया एप्लीकेशन एक “हार्ड इंक्वायरी” बनाता है जो थोड़े समय के लिए स्कोर को कम कर सकता है.
अगर आपको अलग-अलग कार्ड की पेमेंट ड्यू डेट याद रखने में परेशानी होती है, तो कम कार्ड रखना बेहतर रहेगा. अपना रेगुलर खर्च एक या दो कार्ड्स पर फोकस करें, और बाकी कार्ड्स को बंद करने की बजाय चालू रहने दें, बशर्ते आप कोई मोटी सालाना फीस न भरते हों. इससे आपकी टोटल क्रेडिट लिमिट भी ऊंची रहती है और क्रेडिट हिस्ट्री की उम्र भी बरकरार रहती है, दोनों ही CIBIL स्कोर के लिए पॉज़िटिव हैं.
मान लीजिए आपके पास 5 कार्ड हैं, हर एक की लिमिट ₹50,000 है. अगर आप हर कार्ड पर ₹10,000-₹10,000 खर्च फैला देते हैं, तो हर कार्ड पर यूटिलाइजेशन 20% दिखेगा, ठीक लगता है. लेकिन अगर आपका खर्च पैटर्न बदलता है और किसी एक कार्ड पर ज़्यादा दबाव आ जाए, तो उस कार्ड का यूटिलाइजेशन 70% हो जाएगा, जो कि ठीक नहीं है.
इसकी बजाय, अगर आप एक ऐसे कार्ड पर फोकस करें जिसकी लिमिट ₹1,00,000 है और उस पर सिर्फ ₹20,000 खर्च करें, तो यूटिलाइजेशन सिर्फ 20% रहेगा, ट्रैक करना भी आसान और रिस्क भी कम होगा.
क्रेडिट कार्ड एक दोधारी तलवार की तरह है, इस्तेमाल करना आ जाए तो एक बेहद दमदार क्रेडिट को मजबूत करने वाला टूल है, नहीं तो मुश्किलें भी पैदा कर सकता है. यानी क्रेडिट कार्ड न अच्छा है न बुरा, ये पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं.

