Gold Silver Prices: सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार 21 जुलाई को जोरदार तेजी देखने को मिल रही है. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार दोनों ही जगह सोने के भाव 1-1.25% तक उछले हुए हैं. घरेलू मार्केट में MCX पर सोना वायदा मंगलवार सुबह 11:30 बजे 1,300 रुपये की तेजी के साथ 1,42,750 रुपये पर ट्रेड कर रहा है. बीते दो दिनों में सोना वायदा करीब 2,000 रुपये से ज्यादा चढ़ चुका है. चांदी वायदा भी 1.65% की तेजी के साथ 2,22,000 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रहा है, यानी 3,600 रुपये की दमदार तेजी दिख रही है.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी सोना वायदा 1.33% की मजबूती के साथ 4,069.20 डॉलर प्रति आउंस पर है, हालांकि इंट्राडे में ये 4,003.30 डॉलर तक फिसला भी था. पिछले ट्रेडिंग सेशन में सोना वायदा 4,000 डॉलर के नीचे चला गया था.
सोने की कीमतों में तेज़ी की वजह
सोने की कीमतों में आई तेज़ी की सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल में आई नरमी. सोमवार को कच्चा तेल 91 डॉलर के पार चला गया था, लेकिन आज यानी मंगलवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1% की कमजोरी के साथ 88 डॉलर के आस-पास ट्रेड कर रहा है.
जब कच्चा तेल कमजोर होता है तो महंगाई में कमी आने की उम्मीद बढ़त है. महंगाई कम रही तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव भी कम हो जाता है. सोना कोई ब्याज या इंटरेस्ट इनकम तो देता नहीं. इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो निवेशक अक्सर बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली एसेट्स की ओर रुख करते हैं, लेकिन अगर बाजार को लगता है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना घट रही है, तो सोना आकर्षक निवेश बन जाता है.
साथ ही, डॉलर में भी हल्की कमजोरी आई है, ये 101 के लेवल से नीचे फिसल चुका है. ये फैक्टर भी सोने की कीमतों को सपोर्ट करता है. चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर कमजोर होने पर दूसरे देशों की करेंसीज के मुकाबले सोना सस्ता हो जाता है. इससे ग्लोबल डिमांड बढ़ सकती है.
कच्चे तेल में गिरावट क्यों है?
बाजार में इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की खबरें हैं. जिससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आया है. रॉयटर्स को एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने बताया कि तेहरान को मध्यस्थों की तरफ से 10 दिन के सीज़फायर का प्रस्ताव मिला है. जिसका मकसद है 17 जून को हुए उस समझौते को फिर से पटरी पर लाना, जो 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल के हमलों से शुरू हुई जंग को खत्म करने के लिए एक स्थायी डील की दिशा में पहला कदम था.
ING के एनालिस्ट्स के मुताबिक, US-ईरान डी-एस्केलेशन की कुछ उम्मीद बनी है, और मध्यस्थ 10 दिन के सीज़फायर का प्रस्ताव रख रहे हैं जिससे MoU फिर पटरी पर आ सकता है. मगर, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बड़े मतभेद अब भी बरकरार हैं, और अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ट्रंप बदले की चेतावनी दे चुके हैं, जिससे यह डील आसान नहीं होगी.
एक्सपर्ट्स ये कहते हैं कि फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यी है कि क्या मौजूदा तनाव तेल उत्पादन या शिपिंग रूट्स पर असर डालेगा, अगर तेल की सप्लाई सामान्य बनी रहती है, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
हालांकि इन कोशिशों के बावजूद, ज़मीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. सोमवार रात अमेरिका ने ईरानी शहरों पर फिर हमले किए, जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया. सोमवार देर रात अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर हमलों का एक और दौर शुरू करने की बात कही.

