अमेरिका ने ईरान पर हमला फिलहाल टाला! ट्रंप बोले, जल्द डील हुई तो नहीं होगी और कार्रवाई; सोमवार को कैसे खुलेंगे बाज़ार?

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Iran Attack Put On Hold, Deal Hopes Rise

सोमवार को शेयर बाज़ारों के लिए डॉनल्ड ट्रंप ने माहौल सेट कर दिया है, क्योंकि मिडिल ईस्ट से राहत की खबर आ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों को फिलहाल टालने का ऐलान किया है. ट्रंप ने 1 अगस्त शनिवार को कहा कि वो ईरान पर नए हमले नहीं करेंगे, बशर्ते जल्द ही एक डील पर सहमति बन जाए. इस खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.22% उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बंद हुआ.

क्या है पूरा मामला?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TRUTH Social पर लिखा कि ईरान और खाड़ी के बाकी देशों ने डील पूरी करने के लिए कुछ समय मांगा है. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत और पूरी तरह से खोलना, साथ ही ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल है. इसी आधार पर उन्होंने नए हमलों को फिलहाल रोकने पर सहमति जताई है, हालांकि ये पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान के साथ डील कितनी जल्दी अमल में आती है. इजरायल ने भी इस रुख का समर्थन किया है, हालांकि उसने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका को इसी हफ्ते चेतावनी दी थी कि वो किसी भी “दुस्साहसी कार्रवाई” बचे. अगर अमेरिकी सेना ईरानी ठिकानों पर हमला करती है तो वो इसका करारा जवाब देगा. ईरान के विदेश मंत्री ने तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बड़े अधिकारियों से फोन पर बातचीत में अपना ये रुख दोहराया है. ईरान से जुड़े एक मीडिया आउटलेट ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया, तो जवाब में सऊदी अरब और UAE की ऑयल फील्ड्स के साथ-साथ कतर और इजरायल की गैस फील्ड्स को भी निशाना बनाया जा सकता है.

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ईरान पर भरोसा खो रहे ट्रंप

शुक्रवार को कैंप डेविड रिट्रीट में हुई कैबिनेट बैठक में ट्रंप ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अमेरिकी वार्ताकार, जिनमें उनके दामाद जेरेड कुशनर, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल हैं, अब भी ईरान के साथ डील तक पहुंच सकते हैं.

हालांकि वो ये भी कहते नजर आए कि वो ईरान पर अपना भरोसा खो रहे हैं. ट्रंप ने कहा ‘ईरान अक्सर अपनी बात से मुकर जाता है’. मज़े की बात ये है कि यही आरोप ईरान भी हमेशा से ही ट्रंप पर लगाता आया है.

ये ताजा घटनाक्रम अचानक सामने नहीं आया है. अमेरिका और इजरायल ने फरवरी 2026 के अंत में ईरान के सैन्य, सरकारी और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे. इसके बाद जून 2026 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन ये समझौता ज्यादा दिन तक टिक नहीं सका, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोलने को लेकर विवाद खड़ा हो गया. अमेरिका ने लगातार सैन्य कार्रवाई जारी रखी। पिछले कुछ हफ्तों में ईरान ने कतर, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे कई खाड़ी देशों को भी मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया है.

कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी

पिछले महीने जुलाई में क्रूड की कीमतों में हमें काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. जब ये खबर आई कि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने वाली है, कच्चा तेल लुढ़क गया. लेकिन जैसे ही अमेरिका और ईरान के बीच नए हमले शुरू हुए कच्चा तेल एक बार फिर से चढ़ने लगा.

अब जबकि एक बार फिर से हमले रुकने की खबर आई है, तो सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है, बशर्ते हमले रुके रहें. क्योंकि किसी भी तरह तरफ से अगर बातचीत की जगह मिलाइलें चलीं तो कच्चा तेल फिर चढ़ेगा. जुलाई में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 24% की बढ़ोतरी हुई, और रॉयटर्स की ओर से कराए गए सर्वे में शामिल एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इस साल कीमतें और बढ़ेंगी.

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