Mutual Fund Investment: क्या होता है Growth और Dividend Option? निवेश करने से पहले समझिए पूरा फर्क, कौन सा विकल्प आपके लिए बेहतर है?

sureofficialmedia_admin
14 Min Read
Growth or IDCW: The Mutual Fund Choice That Decides How Much Wealth You Build

जब भी हम म्यूचुअल फंड में निवेश की शुरुआत करते हैं, तो हमारे सामने एक दुविधा आती है कि Growth Option चुनें या फिर Dividend Option जिसे अब IDCW (Income Distribution cum Capital Withdrawal) कहा जाता है. इन दोनों ऑप्शंस में से कौन ज्यादा फायदेमंद है, आपको कौन सा चुनना चाहिए. आज इसी दुविधा को दूर करते हैं.

शुरुआत करते हैं एक बहुत आसान से उदाहरण के साथ. मान लीजिए दो दोस्त हैं, राहुल और अमित.

दोनों ने एक ही दिन, एक ही Mutual Fund में ₹10 लाख का निवेश किया. दोनों ने एक ही फंड चुना, इसलिए फंड मैनेजर भी वही है और जिन कंपनियों में पैसा लगाया गया है, वे भी बिल्कुल एक जैसी हैं.

15 साल बाद, जब दोनों अपना पोर्टफोलियो खोलकर देखते हैं तो राहुल के पास अमित से कहीं ज़्यादा पैसा होता है. ये बात अमित हैरान होकर पूछता है, ऐसा केसै हुआ? “हमने तो एक ही Mutual Fund में निवेश किया था, फिर मेरे पैसे कम कैसे हो गए?”

इस पर राहुल का जवाब होता है कि क्योंकि तुमने Dividend Option चुना था, जबकि मैंने Growth Option चुना था.

अब यहीं से शुरू होती है वो कंफ्यूजन, जिसमें हर साल लाखों नए निवेशक घूमते रहते हैं. कई लोगों को लगता है कि Dividend Option चुनने पर उन्हें Mutual Fund की तरफ से अतिरिक्त कमाई मिलेगी, जबकि सच्चाई ये है कि ये पूरा सच नहीं है.

अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सोच रहे हैं या पहले से निवेश करते हैं, तो Growth और IDCW Option का फर्क समझना बेहद ज़रूरी है. क्योंकि यही फैसला करता है कि आपका पैसा आने वाले 10, 15 या 20 साल में कितनी तेज़ी से बढ़ेगा.

Mutual Fund काम कैसे करता है

हम सबके लिए म्यूचुअल फंड कोई नई चीज नहीं है, लेकिन ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं कि म्यूचुअल फंड काम कैसे करता है, क्योंकि ये समझे बिना Growth और IDCW को समझना मुश्किल है. इसको एक बहुत आसान से उदाहरण से समझते हैं.

मान लीजिए आपके मोहल्ले के 100 लोग मिलकर एक बड़ा सा गुल्लक बनाते हैं. हर आदमी उसमें ₹1,000 जमा करता है. अब उस गुल्लक में कुल 1 लाख रुपये जमा हो गए. इस जमा हुए पैसे को एक दूसरे समझदार आदमी को दिया जाता है, जिसे कि म्यूचुअल फंड की भाषा में फंड मैनेजर कहा जाता है. ये फंड मैनेजर इस पूरे पैसे को लेकर शेयर मार्केट में लिस्ट अच्छी अच्छी कंपनियों में निवेश करता है. जैसे जैसे इन कंपनियों के शेयर बढ़ते जाते हैं, वैसे-वैसे इस गुल्लक में रखे पैसों की भी वैल्यू बढ़ती जाती है. यही Mutual Fund है.

Growth Option क्या होता है?

अब समझिए कि म्यूचुअल फंड में Growth Option क्या होता है.

मान लीजिए आपने अपने घर में आम का एक पौधा लगाया. पहले साल उसमें 100 आम आए. आपने उन आमों को बेचने या तोड़ने के बजाय पेड़ पर ही रहने दिया. उनसे बीज तैयार हुए, पेड़ और मज़बूत हुआ, अगले साल उसी पेड़ पर 150 आम आ गए, तीसरे साल 220 आम, हर साल पेड़ बड़ा होता गया और फल भी बढ़ते गए.

यही Growth Option की सबसे बड़ी ताकत है. Mutual Fund में जब कंपनियों से मुनाफा आता है या शेयरों की कीमत बढ़ती है, तो Growth Option में वह पैसा आपके बैंक अकाउंट में नहीं भेजा जाता, बल्कि उसी पैसे को फिर से निवेश कर दिया जाता है. यानी आपका पैसा लगातार आपके लिए काम करता रहता है. इसी को कंपाउंडिंग की ताकत कहा जाता है.

मान लीजिए कि आपने 1 लाख रुपये Growth Option में लगाए. अगर पहले साल 12% रिटर्न मिला, तो ये पैसा बढ़कर 1,12,000 रुपये हो जाएगा. अब अगले साल 12% रिटर्न 1 लाख पर नहीं, बल्कि 1,12,000 रुपये पर मिलेगा. यानी अब सिर्फ मूलधन नहीं, बल्कि उस पर मिला मुनाफा भी मुनाफा कमाने लगता है. यही वजह है कि लंबे समय में Growth Option निवेशकों की संपत्ति तेज़ी से बढ़ाता है.

अवधिनिवेश की वैल्यू
शुरुआत₹1,00,000
1 साल बाद₹1,12,000
2 साल बाद₹1,25,440
3 साल बाद₹1,40,493
10 साल बाद3,10,585

IDCW (Dividend) Option क्या होता है?

कई निवेशक ये मान लेते हैं कि IDCW का मतलब “मुफ्त में मिलने वाला अतिरिक्त पैसा” है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. अगर Growth Option में पैसा बाहर नहीं आता, तो IDCW Option में आखिर होता क्या है? क्या इसमें Mutual Fund आपको अपनी जेब से बोनस देता है, या यह कंपनी के Dividend की तरह होता है? यहीं सबसे ज़्यादा गलतफहमी होती है.

एक बात हमेशा याद रखिए, अगर कोई आपसे कहे कि इस Mutual Fund में हर साल Dividend मिलता है, तो सबसे पहले ये जानने की कोशिश करिए कि ये पैसा आ कहां से रहा है. क्या AMC अपनी जेब से आपको पैसा दे रही है? जवाब है, बिल्कुल नहीं. असल में ये पैसा आपका ही है, ये आपके ही Mutual Fund के निवेश से निकलकर आपके बैंक खाते में आता है. यानी आपके निवेश का एक हिस्सा आपको वापस दिया जाता है.

ALSO READ –

इसे NAV से समझिए

म्यूचुअल फंड में हर यूनिट की एक कीमत होती है, जिसे NAV यानी Net Asset Value कहते हैं. यही वो कीमत होती है जिस पर आप म्यूचुअल फंड खरीदते और बेचते हैं.

मान लीजिए आपके पास किसी म्यूचुअल फंड की 1,000 यूनिट पड़ी हुई हैं. प्रति यूनिट NAV 100 रुपये है. मतलब आपका कुल निवेश 1,00,000 रुपये है. कुछ समय बाद फंड अच्छा प्रदर्शन करता है, और फंड हाउस फैसला करता है कि वो 5 रुपये प्रति यूनिट IDCW यानी डिविडेंड देगा. आपके पास 1,000 यूनिट्स हैं, इसलिए आपके बैंक खाते में आएंगे ₹5 × 1,000 = 5,000 रुपये.

अब आप यहीं खुश हो जाते हैं कि आपको ₹5,000 एक्स्ट्रा मिल गए. लेकिन मामला इससे बिल्कुल अलग है. जैसे ही फंड हाउस आपको 5 रुपये प्रति यूनिट डिविडेंड देता है, उसी समय फंड के अंदर मौजूद पैसा भी उतना ही कम हो जाता है. इसलिए NAV भी लगभग 100 रुपये से घटकर 95 रुपये हो जाती है. यानी आपके बैंक खाते में 5,000 रुपये आए ज़रूर, लेकिन आपके म्यूचुअल फंड की वैल्यू भी 5,000 रुपये घट गई.

थोड़ा और आसान तरीके से समझिए, मान लीजिए आपकी शर्ट की दो जेबें हैं. बाईं जेब में 1,000 रुपये हैं. आपने 200 रुपये निकालकर दाईं जेब में रख दिए. क्या आपकी कुल संपत्ति बढ़ गई? बिल्कुल नहीं, पहले भी 1,000 रुपये थे, अब भी 1,000 रुपये ही हैं, बस पैसे की जगह बदल गई. IDCW या डिविडेंड में भी लगभग यही होता है. पैसा आपकी इन्वेस्टमेंट से निकलकर आपके बैंक खाते में पहुंचता है, इसीलिए इसे ‘एक्स्ट्रा इनकम’ तो कतई न मानें.

तो फिर लोग IDCW क्यों चुनते हैं?

अगर डिविडेंड ऑप्शन से आपकी वेल्थ नहीं बढ़ती है तो लोग इसको चुनते क्यों हैं. देखिए, हर निवेशक एक जैसा नहीं होता, उसकी जरूरतें एक जैसी नहीं होती, उसके लक्ष्य एक जैसे नहीं होते. इसलिए हर निवेशक ग्रोथ ऑप्शन नहीं चुनता, कुछ डिविडेंड ऑप्शन भी चुनते हैं.

मान लीजिए एक 65 साल के रिटायर्ड व्यक्ति हैं, जिनके पास 50 रुपये लाख का म्यूचुअल फंड निवेश है. उन्हें हर महीने घर का खर्च चलाने के लिए कुछ कैश चाहिए, क्योंकि इनकम का कोई दूसरा सोर्स नहीं है. अगर वो हर महीने यूनिट्स बेचते रहें, तो उन्हें बार-बार रिडिम्पशन करना पड़ेगा. ऐसे निवेशकों के लिए समय-समय पर मिलने वाला IDCW पेआउट सबसे आसान हो सकता है.

मगर, ये सभी के लिए सही नहीं होता, क्योंकि मान लीजिए आप अभी युवा हैं और आपकी उम्र 28 साल है, आप नौकरी करते हैं, और अगले 20 साल तक पैसा नहीं निकालना चाहते, तो IDCW आपके लिए शायद सही विकल्प नहीं होगा, क्योंकि जितना पैसा बाहर निकलेगा, उतना पैसा कंपाउंडिंग से दूर हो जाएगा.

टैक्स का एंगल भी समझिए

कई निवेशक सिर्फ IDCW देखकर खुश हो जाते हैं, लेकिन टैक्स के पहलू पर ध्यान नहीं देते. IDCW के रूप में मिलने वाली रकम पर टैक्स लगता है. दूसरी तरफ Growth Option में जब तक आप अपनी Units बेचते नहीं हैं, तब तक आमतौर पर कोई Capital Gains Tax नहीं लगता. यानी आपका पैसा बिना बीच में टैक्स दिए लंबे समय तक कंपाउंडिंग का फायदा उठाता रहता है. यही वजह है कि लंबे समय के वेल्थ क्रिएशन के लिए फाइनेंशियल एडवाइजर्स Growth Option को प्राथमिकता देते हैं.

फर्क पैदा कैसे होता है?

अब तक आपने समझ लिया कि Growth Option में पैसा फंड के अंदर ही रहता है, जबकि IDCW में फंड समय-समय पर निवेशकों को पैसा बांटता रहता है, और IDCW मिलने के बाद फंड की NAV भी उसी हिसाब से कम हो जाती है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी है. अगर दोनों विकल्प एक ही Mutual Fund में निवेश करते हैं, तो लंबे समय में फर्क कैसे पैदा होता है?

मान लीजिए दो दोस्त हैं, रोहित और विकास. दोनों ने एक ही इक्विटी म्यूचुअल फंड में 10 लाख रुपये का निवेश किया. फंड भी एक ही है, Fund Manager भी वही है, जिन कंपनियों में पैसा लगाया वो भी एक ही हैं. बस एक फर्क है, रोहित ने Growth Option चुना, विकास ने IDCW Option चुना.

पहले कुछ साल फंड लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहा. जब भी फंड को मुनाफा हुआ, Growth Option में वो पैसा वापस निवेश हो गया, वहीं IDCW Option में समय-समय पर कुछ राशि निवेशकों को बांट दी गई. विकास को बैंक खाते में पैसे मिलते रहे, और उसे लगा कि मेरा फंड तो मुझे रेगुलर इनकम दे रहा है. लेकिन उसने एक बात पर ध्यान नहीं दिया, हर बार पेआउट के बाद उसके निवेश का एक हिस्सा फंड से बाहर निकल रहा था, यानी आगे चलकर वही पैसा Compounding का हिस्सा नहीं बन पाया.

हर महीने पैसे चाहिए तो क्या करें?

इसका सबसे सही तरीका होता है SWP यानी Systematic Withdrawal Plan. ये आपकी तब मदद करता है जब आपको हर महीने एक रेगुलर इनकम चाहिए. ये बिना चूक और बहुत आसानी के साथ काम करता है

इसको ऐसे समझिए. मान लीजिए आपके पास 50 लाख रुपये का Growth Mutual Fund है, आप रिटायर हो चुके हैं, और अब आपको हर महीने 30,000 रुपये चाहिए. ऐसे में आपके पास दो रास्ते हैं.

  • पहला तो ये कि आप IDCW चुनिए और उम्मीद कीजिए कि फंड समय-समय पर भुगतान करता रहे, लेकिन मुश्किल ये है कि डिविडेंड की रकम तय नहीं होती है और कब मिलेगी, कितनी मिलेगी, ये कई फैक्टर्र पर निर्भर करता है, जैसे फंड हाउस के फैसले और बांटने योग्य रकम.
  • दूसरा ये कि Growth Option रखिए और हर महीने 30,000 रुपये का SWP शुरू कर दीजिए. इसमें फंड आपकी ज़रूरत के अनुसार कुछ यूनिट्स बेचकर आपके बैंक खाते में पैसा भेज देता है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको नियमित कैश फ्लो मिलता है, बाकी पैसा निवेश में बना रहता है, और आप जितना पैसा निकालना चाहते हैं, वो रकम भी आप तय करते हैं और जब चाहें बदल सकते हैं.

इसी वजह से कई फाइनेंशियल प्लानर्स IDCW की जगह Growth + SWP का विकल्प सुझाते हैं. हालांकि कौन-सा विकल्प आपके लिए बेहतर है, यह आपकी ज़रूरत, टैक्स और फाइनेंशियल प्लानिंग पर निर्भर करता है.

ALSO READ –

Share This Article