देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में सरकार 6.5% हिस्सेदारी बेच रही है, 4 अगस्त यानी आज से ये हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के ज़रिए बेची जा रही है. इसका फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर रखा गया है. जो कि BSE पर सोमवार के क्लोजिंग प्राइस 424.35 रुपये प्रति शेयर से 10% डिस्काउंट पर है. ये सिर्फ एक हिस्सेदारी बिक्री नहीं है, बल्कि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम और SEBI के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है.
यह OFS दो दिनों तक चलेगा, आज पहले दिन यानी 4 अगस्त को केवल नॉन-रिटेल इन्वेस्टर्स बोली लगा सकेंगे, दूसरे दिन, 5 अगस्त को रिटेल निवेशक इसमें हिस्सा ले सकेंगे. अगर ये इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो जाता है, तो सरकार को करीब 31,000 करोड़ रुपये मिलेंगे.
2.5% बेस ऑफर, 4% ग्रीन शू ऑप्शन
DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) के सचिव अरुणीश चावला के मुताबिक, इस OFS में सरकार पहले चरण में 2.5% हिस्सेदारी बेचेगी, अगर निवेशकों की ओर से ज्यादा डिमांड देखने को मिलती है तब सरकार 4% अतिरिक्त हिस्सेदारी ग्रीन शू ऑप्शन के ज़रिए बेच सकती है. इस तरह कुल मिलाकर सरकार 6.5% हिस्सेदारी बेच सकती है.
सरकार क्यों बेच रही है हिस्सा
LIC में हिस्सा बिक्री की सबसे बड़ी वजह मार्केट रेगुलेटर SEBI का मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों को पूरा करना है. जिसके मुताबिक किसी भी लिस्टेड कंपनी में कम से कम 10% हिस्सा पब्लिक यानी आम निवेशकों के पास होना चाहिए. SEBI ने LIC को मई 2027 तक का वक्त दिया है, जिसमें उसे सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 90% करना है. ताकि मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों को पूरा किया जा सके.
LIC में इस वक्त भारत सरकार के पास 96.5% हिस्सेदारी है. इस OFS के बाद सरकार की हिस्सेदारी घटकर करीब 90% रह जाएगी. यानी सरकार अभी भी LIC की सबसे बड़ी शेयरधारक बनी रहेगी, लेकिन कंपनी में आम निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी.
जब LIC का IPO आया था, तब सरकार ने केवल 3.5% हिस्सेदारी ही बेची थी. इसके बाद सरकार की हिस्सेदारी 96.5% रह गई थी, जबकि पब्लिक शेयरहोल्डिंग केवल 3.5% थी. 6.5% की इस ताज़ा हिस्सा बिक्री के बाद पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़कर 10% हो जाएगी.
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पहले जुटाए थे ₹21,000 करोड़
4 मई, 2022 को सरकार LIC का IPO लेकर आई थी. सरकार ने 3.5% हिस्सेदारी बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे. IPO का प्राइस बैंड 902-949 रुपये तय किया गया था. 17 मई को इसकी लिस्टिंग हुई, लेकिन लिस्टिंग उतनी धमाकेदार नहीं हुई, जितनी उम्मीद की गई. ये अपने इश्यू प्राइस से NSE पर 8.11% के डिस्काउंट पर 872 रुपये पर लिस्ट हुआ, BSE पर इसकी लिस्टिंग 8.62% डिस्काउंट के साथ 867.20 रुपये पर हुई थी.
लिस्टिंग के बाद से 2022–2025 के दौरान LIC का शेयर कभी भी IPO के इश्यू प्राइस ₹949 के आसपास वापस नहीं पहुंच पाया. क्योंकि IPO की वैल्यूएशन काफी ऊंची मानी गई और विदेशी निवेशकों (FIIs) ने खूब बिकवाली की.
अब हो सकता है आप सोचें कि साल 2022 में सरकार 949 रुपये पर IPO लेकर आई, जबकि आज 382 रुपये के फ्लोर प्राइस पर शेयर बेच रही है, जो IPO कीमत से काफी नीचे है. क्या शेयर फिसलता हुआ आज 424 रुपये पर पहुंच गया. तो इसका जवाब है, 13 अप्रैल 2026 को LIC के बोर्ड ने 1:1 बोनस इश्यू को मंजूरी दी थी. मतलब, शेयरों की संख्या दोगुनी हुई तो, बाज़ार ने शेयर की कीमत लगभग आधी एडजस्ट कर दी. LIC देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है, इसका मार्केट कैप सोमवार को ₹424.35 के शेयर प्राइस पर ₹5.36 लाख करोड़ रुपये था.
विनिवेश लक्ष्य के करीब पहुंचेगी सरकार
LIC में हिस्सा बिक्री से सरकार के विनिवेश अभियान को बड़ी ताकत मिलेगी. सरकार लगातार PSUs में अपनी हिस्सेदारी बेचकर राजस्व जुटा रही है. चालू वित्त वर्ष में अब तक सरकार 7 सरकारी कंपनियों में हिस्सा बिक्री और SUUTI (Specified Undertaking of the Unit Trust of India) से मिली रकम के जरिए 21,082 करोड़ रुपये जुटा चुकी है. LIC का OFS अगर कामयाब रहा तो सरकार के खजाने में करीब 31,000 करोड़ रुपये और जुड़ जाएंगे. जिससे इस वित्त वर्ष के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी.
इस वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है. 31,000 करोड़ रुपये जुड़ने के बाद ये रकम बढ़कर 52,000 करोड़ रुपये पहुंच जाएगी. यानी सरकार इस वित्त वर्ष के लक्ष्य का करीब 65% हिस्सा हासिल कर लेगी. हालांकि पिछले वित्त वर्ष में सरकार अपने 47,000 करोड़ रुपये के बजट को हासिल करने से चूक गई थी, इसलिए संशोधित लक्ष्य में इसे घटाकर 33,837 करोड़ रुपये कर दिया था.
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
मार्केट के जानकार ये मानते हैं कि OFS में दिया गया डिस्काउंट निवेशकों को आकर्षित कर सकता है. बीते कुछ सालों में सरकार की ओर से लाए गए कई OFS में संस्थागत और रिटेल निवेशकों ने अच्छी भागीदारी दिखाई है. बाजार भाव से कम कीमत पर शेयर मिलने की वजह से इस इश्यू में भी अच्छी मांग देखने को मिल सकती है. हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि OFS के दौरान शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
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