बीते 7 साल में दोगुना बढ़े घरों के दाम, नोएडा में 125% का उछाल, किराये से कमाई भी खूब बढ़ी

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Home prices in India surge up to 125% since 2019, Noida leads property price growth - ANAROCK report

पिछले सात सालों में देश के रियल एस्टेट बाजार ने बड़ी करवट ली है. ANAROCK Research की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि 2019 से लेकर 2026 की दूसरी तिमाही तक देश के प्रमुख शहरों में घरों की औसत कीमतें (Average Housing Price) 45% से लेकर 125% तक बढ़ चुकी हैं, सिर्फ कीमतें ही नहीं बल्कि किराये से होने वाली कमाई यानी रेंटल यील्ड (Rental Yield) भी हर शहर में बढ़ गई है. आमतौर पर माना जाता है कि जब प्रॉपर्टी की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं, तो किराये का रिटर्न कमजोर पड़ जाता है, लेकिन इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के बड़े बाजारों में इस बार कुछ अलग हुआ है.

नोएडा, गुरुग्राम में सबसे ज्यादा बढ़े दाम

पूरी रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा Noida की है. पिछले सात साल में नोएडा में घरों की औसत कीमतों में 125% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. 2019 में जहां औसत कीमत करीब 4,795 रुपये प्रति वर्गफुट थी, वहीं Q2 2026 तक यह बढ़कर 10,780 रुपये प्रति वर्गफुट पहुंच गई. यानी जिसने सात साल पहले Noida में निवेश किया, उसकी प्रॉपर्टी की कीमत दोगुना से भी ज्यादा हो गई. सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमतें ही नहीं बढ़ी हैं, बल्कि किराए के मोर्चे पर भी नोएडा काफी आगे है. यहां रेंटल यील्ड 3.2% से बढ़कर 3.9% हो गई है.

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है गुरुग्राम, यहां घरों के दाम में 117% तक बढ़े हैं. साल 2019 के 6,150 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर अब सीधे 13,350 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है. किराये से कमाई भी बढ़ी है. रेंटल यील्ड 3.5% से बढ़कर 4.3% हो गई, यानी 80 बेसिस पॉइंट का उछाल. दिल्ली-NCR के इन दोनों बाजारों ने साफ दिखा दिया है कि यहां प्रॉपर्टी अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि एक मजबूत निवेश का ज़रिया बन चुकी है.

साउथ के मार्केट में ‘रेंटल मैजिक’

दक्षिण भारत की कहानी थोड़ी अलग है. यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में उतना बड़ा उछाल नहीं आया जितना नोएडा-गुरुग्राम में देखने को मिला, लेकिन किराए के मामले में बेंगलुरु और हैदराबाद ने सबको पीछे छोड़ दिया.

बीते 7 साल में बेंगलुरु में घरों के दाम 90% बढ़े, 2019 में 4,975 रुपये से 9,450 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गए, लेकिन असली कमाल हुआ रेंटल यील्ड में, जो 3.6% से बढ़कर 4.6% हो गई या पूरे 100 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी देखने को मिली.

वहीं हैदराबाद में घरों की कीमतें 93% बढ़ीं. 2019 में 4,195 रुपये थी, जो 2026 में 8,090 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गईं. यहां भी किराये से होने वाली आय में 100 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी देखी गई, जो 2.6% से बढ़कर 3.6% हो गई.

इस पूरे ट्रेंड पर ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी कहते हैं कि आमतौर पर जब प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो किराये से मिलने वाला रिटर्न घटने लगता है, लेकिन इस बार देश के कई बड़े बाजारों में ये पुराना ट्रेंड टूटता दिख रहा है, कीमतें भी बढ़ीं और रेंटल यील्ड भी साथ-साथ मजबूत हुई.

मुंबई का क्या हाल?

अब बात देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट मार्केट, मुंबई की. यहां घरों की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही थीं, फिर भी सात सालों में 64% का उछाल देखने को मिला है. 2019 में प्रॉपर्टी के रेट 17,845 रुपये से बढ़कर 2026 की दूसरी तिमाही तक 29,270 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गए. किराये से होने वाली आय भी बढ़ी है. जो कि 3.5% से बढ़कर 4.3% हो गई.

मुंबई के आसपास के इलाकों में भी प्रॉपर्टी के रेट बढ़े हैं और रेंटल यील्ड में भी उछाल देखने को मिला है. जैसे- नवी मुंबई में प्रॉपर्टी के दाम सात साल में 71% बढ़े हैं. रेंटल यील्ड 80 bps का उछाल देखने को मिला है. ठाणे में प्रॉपर्टीज के रेट 63% बढ़े हैं, रेंटल यील्ड में 80 bps का सुधार हुआ, पुणे में प्रॉपर्टी रेट में 51% की बढ़ोतरी हुई है, रेंटल यील्ड 65 bps का सुधार देखने को मिला है.

कहां बढ़े सबसे ज्यादा दाम

शहर2019 (₹/sq ft)Q2 2026 (₹/sq ft)बढ़ोतरी
नोएडा4,79510,780125%
गुरुग्राम6,15013,350117%
हैदराबाद4,1958,09093%
बैंगलुरु4,9759,45090%
मुंबई17,84529,27064%

सबसे धीमी ग्रोथ वाले शहर

हर शहर की ग्रोथ एक जैसी नहीं रही, राजधानी दिल्ली प्रॉपर्टी कीमतों के बढ़ने के मामले में बाकी शहरों के मुकाबले थोड़ी पीछे रही, यहां पर कीमतें 47% बढ़ीं, जबकि रेंटल यील्ड में 100 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ, जो 2.2% से बढ़कर 3.2% पर पहुंच गई.

चेन्नई में कीमतें 47% बढ़ीं और यील्ड में 55 bps का सुधार हुआ, जबकि कोलकाता में कीमतें सिर्फ 45% बढ़ीं और यील्ड 60 bps सुधरी. रिपोर्ट में शामिल 11 शहरों में ये दोनों सबसे धीमी रफ्तार वाले बाजार रहे.

कीमतों, रेंटल में तेज़ उछाल क्यों आया

अब सवाल यह उठता है कि आखिर पिछले सात सालों में इतना बड़ा बदलाव आया कैसे. ANAROCK की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें हैं

  • इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट: पिछले कुछ सालों में देश के बड़े शहरों में सड़कों, मेट्रो लाइनों और एक्सप्रेसवे का जाल तेजी से बिछा है. नोएडा और गुरुग्राम इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं, नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, द्वारका एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने इन इलाकों को दिल्ली से जोड़ने में लगने वाला समय आधा कर दिया है.
  • GCCs का विस्तार: पिछले कुछ सालों में भारत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी GCCs का सबसे बड़ा ठिकाना बनकर उभरा है, ये वो ऑफिस हैं जिन्हें विदेशी कंपनियां अपने रिसर्च, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशन्स के काम के लिए भारत में खोलती हैं. बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरो को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला. इन शहरों में हजारों की संख्या में मोटी सैलरी वाली टेक जॉब्स पैदा हुई हैं, और इनमें काम करने वाले ज्यादातर लोग युवा प्रोफेशनल्स हैं जो शुरुआत में घर खरीदने की बजाय किराये पर रहना पसंद करते हैं.
  • बेहतर कनेक्टिविटी: शहरों के भीतर मेट्रो नेटवर्क का विस्तार, बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और नए फ्लाईओवर्स ने भी घरों की मांग को नई दिशा दी. मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में इसका असर साफ दिखता है. जैसे-जैसे मुंबई और उसके आसपास के इलाकों जैसे नवी मुंबई और ठाणे के बीच मेट्रो और ट्रांस-हार्बर लिंक जैसे प्रोजेक्ट्स आगे बढ़े, वैसे-वैसे इन सैटेलाइट शहरों में भी घरों की मांग और कीमतें दोनों बढ़ीं
  • रोज़गार के लिए माइग्रेशन: रोजगार, शिक्षा के लिए पलायन हुआ, खासकर उन शहरों में ज्यादा जहां GCCs, IT कंपनियां और स्टार्टअप्स का जमावड़ा है, जैसे बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम. यही वजह है कि इन शहरों में सिर्फ खरीदारों की ही नहीं, बल्कि किरायेदारों की तादाद भी लगातार बढ़ रही है, जो रेंटल यील्ड को मजबूत रखने में मदद कर रही है.

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