साल 2022 गुरुग्राम में एक 47 साल के व्यक्ति ने खुद की जिंदगी खत्म कर दी, सितंबर 2024 में हापुड़ के सपनावत गांव में एक 48 साल के व्यक्ति, उसकी पत्नी और 18 साल की बेटी ने जहर खाकर आत्म हत्या कर ली, पिछले साल 2025 में कर्नाटक में एक 60 साल की महिला ने भी अपनी जिंदगी समाप्त कर ली. ये तो सिर्फ चंद उदाहरण हैं, देश के किसी न किसी कोने में ऐसी आत्म हत्याएं रोज होती हैं. मगर, इन आत्म हत्याओ में एक वजह कॉमन थी, बैंकों के रिकवरी एजेंटस की धमकियां.
आपके लोन की एक EMI चूकते ही बैंकों के रिकवरी एजेंट अपना असली रंग दिखाना शुरू कर देते हैं. बार-बार फोन करना, धमकियां देना, गाली-गलौज करना ये सबकुछ बिल्कुल आम बात है और ये होता ही रहा है. इसे लेकर रिजर्व बैंक ने पहले भी कई बार बैंकों को सख्त हिदायतें दी हैं. मगर कुछ खास असर होता हुआ दिखा नहीं. ऐसी घटनाओं को रोकने और बैंकों के रिकवरी एजेंट्स पर सख्ती से लगाम लगाने के लिए अब RBI ने नए और कड़े नियम जारी कर दिए हैं. जो कि 1 जनवरी, 2027 से लागू हो जाएंगे. तो सवाल अब ये है कि क्या ये नियम बैंकों के रिकवरी एजेंट्स की धमकियों और उनके बुरे बर्तावों पर लगाम लगा सकेंगे और ऐसी आत्म हत्याएं रुक सकेंगी.
क्या हैं RBI के नए नियम
Reserve Bank of India (Commercial Banks-Responsible Business Conduct) Fourth Amendment Directions, 2026 के तहत जारी इन संशोधित दिशानिर्देशों ने पहले के अलग-अलग निर्देशों की जगह एक ही सिंगल फ्रेमवर्क बनाया है, जो लोन वसूली, रिकवरी एजेंसियों की नियुक्ति और कर्जदारों के अधिकारों, तीनों को कवर करता है. ये नियम सभी कमर्शियल बैंकों पर लागू होंगे, हालांकि स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट्स बैंक, रीजनल रूरल बैंक और लोकल एरिया बैंक फिलहाल इसके दायरे से बाहर हैं.
बैंकों को लिखित रिकवरी पॉलिसी बनानी होगी
नए संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब बैंक मनमाने ढंग से रिकवरी नहीं कर पाएंगे. RBI चाहता है कि हर बैंक लिखित में एक डिटेल्ड पॉलिसी बनाए जिसमें साफ-साफ बताया गया हो कि
- रिकवरी की शुरुआत कब होगी
- मामला किस तरह आगे बढ़ेगा
- आर्थिक तंगी में फंसे कर्जदार से किस तरह बातचीत की जाएगी
- रिकवरी एजेंसियों की जांच-पड़ताल किन मानकों पर होगी
- उनके काम की निगरानी कैसे होगी
- अगर गलत तरीके से वसूली की गई तो कर्जदार को कितना मुआवज़ा मिलेगा.
रिकवरी एजेंसियों के लिए कडे़ नियम
अगर बैंक किसी रिकवरी एजेंसी को रखते हैं तो उन्हें अब पहले जांच पड़ताल करनी होगी. क्योंकि एजेंसियों को लेकर भी RBI ने नियम कड़े किए हैं. किसी रिकवरी एजेंसी को हायर करने से पहले बैंक को पूरी जांच करनी होगी, समय-समय पर एजेंट्स का बैकग्राउंड वेरिफाई करना होगा, और यह सुनिश्चित करना होगा कि सिर्फ वही एजेंट रिकवरी का काम करें जिनके पास Indian Institute of Banking and Finance (IIBF) या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान का सर्टिफिकेशन हो.
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए नियम
रिजर्व बैंक ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बैंकों को निर्देश दिया है कि वो अपनी वेबसाइट पर एम्पैनल्ड रिकवरी एजेंसियों की अपडेटेड लिस्ट डालें. अगर कोई रिकवरी एजेंट किसी कर्जदार से मिलने जा रहा है तो एक दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी. अगर बीच में एजेंसी बदली जाती है या उसकी सेवाएं खत्म हो जाती हैं तो इसकी जानकारी भी कर्जदार को देनी होगी.
रिकवरी एजेंट्स के लिए कड़े नियम
रिजर्व बैंक ने रिकवरी एजेंट्स के लिए कड़े नियम तय किए हैं. रिकवरी एजेंट्स के पास पहचान पत्र (Identity Card) और ऑथराइजेशन लेटर होना जरूरी होगा. एजेंट्स किसी भी वक्त कर्जदार से मिलने के लिए नहीं धमक सकते. वो सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क या मुलाकात कर सकेंगे. जब तक कि कर्जदार खुद इससे अलग समय की मांग न करे.
कर्जदारों से रिकवरी एजेंट्स कैसे बात करेंगे, इसे लेकर भी SOP जारी किया है. कर्जदार से बात करते समय एजेंट्स का लहजा बिल्कुल शालीन होना चाहिए, और किसी परिवार में शोक, मेडिकल इमरजेंसी या किसी दूसरी तरह की घटना होने पर एजेंट्स कर्जदार से संपर्क नहीं कर सकेंगे.
रिकवरी एजेंट्स कर्जदारों के साथ अपशब्दों का कतई इस्तेमाल नहीं करेंगे और धमकी नहीं दे सकेंगे. कर्जदार को बार-बार फोन नहीं कर सकेंगे, नंबर बदल-बदलकर कॉल नहीं कर सकेंगे.
रिकवरी एजेंट्स कर्जदार को समाज में अपमानित करने, सोशल मीडिया पर कर्जदार की जानकारी उजागर करने की धमकी नहीं देंगे. कर्जदार के रिश्तेदारों को भी को डराना-धमकाना बिल्कुल प्रतिबंधित कर दिया गया है. RBI ने बैंकों को ये भी निर्देश दिया है कि रिकवरी टारगेट्स और इंसेंटिव स्ट्रक्चर ऐसे न हों जो कठोर वसूली के तरीकों को बढ़ावा दें.
फोन नहीं होगा ब्लॉक!
आजकल कुछ डिजिटल लोन में जिस मोबाइल को लोन देकर खरीदा गया है, उसे रिमोटली लॉक करने की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है. RBI ने इसके लिए भी कड़े नियम जारी किए हैं. बैंक किसी कर्जदार के मोबाइल फोन को रिमोटली लॉक या ब्लॉक नहीं कर सकते हैं. हां, अगर लोन उसी मोबाइल फोन को खरीदने के लिए लिया गया था, तो कुछ शर्तों के साथ प्रतिबंध लगा सकता है.
ऐसे मामले में भी, लॉक सिर्फ तभी कर सकते हैं जब खाता 30 दिन से ओवरड्यू हो, और पूरी तरह से फोन ब्लॉक करने की इजाजत सिर्फ 60 दिन बाद ही मिलेगी. इनकमिंग कॉल्स, SMS, इमरजेंसी SOS फीचर, और नौकरी के लिए जरूरी फंक्शन्स इन्हें किसी भी हाल में ब्लॉक नहीं किया जा सकता.
अगर कोई बैंक गलत तरीके से फोन को ब्लॉक करता है, या लोन चुकाने के बाद भी एक्सेस बहाल करने में देरी करता है, तो उसे कर्जदार को ₹250 प्रति घंटे की दर से मुआवज़ा देना होगा. जिसकी अधिकतम सीमा लोन की कुल राशि के बराबर होगी.
शिकायत करने की अलग व्यवस्था
हर बैंक को शिकायत निवारण की एक अलग व्यवस्था बनानी होगी, और ग्रीवांस ऑफिसर का कॉन्टैक्ट डिटेल्स भी देना जरूरी होगा.

