स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) खुलेगा या नहीं, इस अनिश्चितता ने एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil prices) में उबाल ला दिया है. इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल एक बार फिर 84 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है. दरअसल, ईरान ने कहा है कि ओमान के साथ डील अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन इस शिपिंग रूट को फिर से खोलने से पहले अमेरिका को तीन शर्तें पूरी करनी होगीं, जिसमें मुआवज़ा देना, प्रतिबंधों को खत्म करना और सैन्य धमकियां देना बंद करना होगा.
कच्चा तेल $85 के करीब पहुंचा
सोमवार, 10 अगस्त की सुबह 8:30 बजे ब्रेंट क्रूड 0.81% की मज़बूती के साथ 84 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड करता हुआ दिख रहा है. इसने इंट्राडे में 84.97 डॉलर को भी छुआ. WTI क्रूड में भी 0.5% की मजबूती दिखी और ये 78.50 डॉलर के आस-पास ट्रेड कर रहा है.
पिछले हफ्ते अमेरिका ने दावा किया कि वो ईरान के साथ एक डील कर रहा है, जो एक-दो दिन में होने वाली है, लेकिन आखिर में वही हुआ जो हमेशा होता आया है. कोई डील नहीं हुई. फिर खबर आई कि ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए एक डील हो गई है. इन संभावनाओं के बीच कच्चा तेल पिछले हफ्ते 7% तक टूट गया.
जून के समझौते पर अड़ा ईरान
फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान ने इस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था. दुनिया भर की तेल सप्लाई का 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. पिछले हफ्ते दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई. मगर, ईरान और अमेरिका आपस में सीधे बात नहीं कर रहे हैं. दोनों देश मध्यस्थों के जरिए एक-दूसरे को संदेश भेज रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि जब तक अमेरिका जून में किया गया अंतरिम समझौता मानता नहीं, तब तक सीधी बातचीत नहीं होगी. जून में दोनों देशों के बीच सीज़फ़ायर हुआ था, लेकिन जुलाई में अमेरिका ने गल्फ में ईरानी जहाजों पर फिर से नाकाबंदी लगा दी. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने ये कदम उठाकर समझौते का उल्लंघन किया है.
अराघची का कहना है कि रास्ता खोलने के लिए अमेरिका को उन हमलों से हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी जो उसने ईरान पर किए थे. इसके अलावा, ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहम्मद बाक़िर ज़ुलकद्र ने रास्ते को फिर से खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई और डिमांड्स रखी हैं. जुलकद्र ने कहा कि ईरान और उसके सहयोगी समूहों पर हमले रोके जाएं, पर्शियन गल्फ में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म की जाए और ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और उसके फ्रीज किए गए एसेट्स को वापस किया जाए.
हम जल्दबाज़ी में नहीं: ट्रंप
इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि वो इस मुद्दे को लेकर बहुत ज्यादा जल्दबाजी में नहीं हैं, जबकि यही ट्रंप बीते हफ्ते खुद बयान दे रहे थे कि बहुत जल्द डील होने वाली है. अब वो ये कह रहे हैं कि ईरान भारी महंगाई और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, इसलिए अमेरिका सिर्फ स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
KCM Trade के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वॉटरर कहते हैं कि ट्रेडर्स इस तरह की बार-बार बनती-बिगड़ती बातचीत के आदी हो चुके हैं. वे अब सिर्फ बातों पर भरोसा नहीं कर रहे है, कच्चे तेल की कीमतों में रिस्क प्रीमियम घटाने से पहले वो ऑफिशियल डील या समुद्र में तेल के टैंकरों की वास्तविक आवाजाही जैसे पक्के सबूतों का इंतजार कर रहे हैं.
दूसर तरफ, तेल सप्लाई को लेकर एक और चिंता सामने आई है, वीकेंड में सऊदी अरब के एक तेल प्लांट पर हमला हुआ है. ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने रविवार को सऊदी अरामको की जाज़ान (Jazan) रिफाइनरी पर हमला किया. ये हमला सऊदी अरब की ओर से अमेरिका-इजराइल और ईरान के युद्ध की वजह से बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता करने के दो दिन बाद हुआ.

