हिमाचल में आज से पेट्रोल-डीजल महंगा! सरकार ने लगाया अनाथ और विधवा सेस

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Himachal Government Notifies New Fuel Cess for Widow and Orphan Welfare Fund

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के लोगों के लिए पेट्रोल और डीज़ल (Petrol Diesel) आज से थोड़ा और महंगा हो गया है. क्योंकि यहां की कांग्रेस सरकार ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीज़ल पर 60 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से अनाथ और विधवा सेस (Orphan and Widow Cess) लगा दिया है. राज्य के टैक्स और एक्साइज विभाग की ओर से जारी वोटिफिकेश के मुताबिक ये सेस 11 अगस्त, 2026 की आधी रात से लागू हो चुका है.

सरकार ने कानून में किया संशोधन

ये सेस हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2005 की धारा 6A के तहत अधिसूचित किया गया है. इसे काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की तरफ से मंजूरी मिली है. ये सेस हिमाचल प्रदेश विधानसभा में इस साल मार्च में पास हुए हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स (संशोधन) बिल, 2026 के बाद अस्तित्व में आया है. इसी संशोधन ने राज्य सरकार को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर अनाथ और विधवा सेस लगाने का कानूनी ढांचा दिया था.

संशोधित कानून के तहत सरकार को अधिकतम 5 रुपये प्रति लीटर तक की दर से ये सेस लगाने का अधिकार मिलता है. हालांकि सरकार ने अभी 60 पैसे प्रति लीटर की दर से सेस लगाया है, जो कि कानून में तय की गई अधिकतम सीमा से काफी कम है. मतलब ये कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाकर अधिकतम 5 रुपये प्रति लीटर तक किया जा सकता है.

क्यों लगाया नया सेस, सरकार का तर्क

जब ये बिल हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में पेश किया गया था, तब राज्य सरकार ने साफ किया था कि इस सेस का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़ी विधवाओं और अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए एक डेडिकेटेड कमाई का जरिया तैयार करना है. सरकार का तर्क था कि समाज के इन कमजोर वर्गों के लिए लगातार आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने के लिए एक स्थिर फंड की जरूरत है, जो सामान्य बजटीय आवंटन पर निर्भर न हो.

इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए ये प्रावधान किया गया कि सेस से मिलने वाली सारी रकम सीधे अनाथ एवं विधवा कल्याण कोष (Orphan and Widow Welfare Fund) में जमा की जाएगी, ताकि इस राशि का इस्तेाल केवल तय कल्याणकारी योजनाओं के लिए ही हो सके.

कैसे होगी सेस की वसूली

राज्य सरकार ने पहले ही ये साफ कर दिया था कि ये सेस हिमाचल प्रदेश के भीतर पहले बिक्री बिंदु (first point of sale) पर वसूला जाएगा, न कि बिक्री की बाद की अवस्थाओं में. यानी जब तेल कंपनी अपना पेट्रोल-डीजल पंप संचालकों को बेचती है, उसी समय ये सेस वसूल लिया जाएगा.

इसे आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है, पेट्रोल-डीजल पहले तेल कंपनियों के डिपो से पेट्रोल पंपों तक पहुंचता है, और फिर पेट्रोल पंप से आम ग्राहकों तक. सरकार ये सेस बीच की किसी अवस्था में नहीं, बल्कि सबसे पहले चरण में ही, यानी डिपो से पंप तक तेल बिकते समय ही वसूल लेगी. इसके बाद ये राशि पेट्रोल-डीजल की कीमत में पहले से ही जुड़ी होगी.

इस तरीके का फायदा ये है कि सरकार को अलग-अलग जगह पर, बार-बार टैक्स वसूलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. एक ही बार में, शुरुआती स्तर पर टैक्स ले लिया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे बाद में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी और पारदर्शिता बनी रहेगी. ये नया सेस मौजूदा वैट कानून के तहत पहले से लागू टैक्स के अतिरिक्त होगा. यानी उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल पर पहले से लागू वैट के साथ-साथ ये नया सेस भी चुकाना होगा.

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