Gold Hallmarking: अब ज्वेलरी के HUID पर लग सकता है ‘SOLD’ टैग, चोरी की ज्वेलरी बेची तो पकड़े जाएंगे!

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Gold Hallmarking Gets New Twist: ‘SOLD’ Tag May Help Track Jewellery

सोने की ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों की सुरक्षा और चोरी की ज्वेलरी की दोबारा बिक्री पर लगाम लगाने के लिए सरकार एक नई व्यवस्था पर विचार कर रही है. इसके तहत हॉलमार्क वाली हर सोने की ज्वेलरी के HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर को बिक्री के बाद ‘SOLD’ के रूप में टैग किया जा सकता है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक – इस मैकेनिज्म का मकसद HUID के दोबारा इस्तेमाल को रोकना और चोरी के गहनों को दोबारा बेचने से रोकना है.

गोल्ड ज्वेलरी की HUID को ट्रैक करने की तैयारी!

मतलब, जब ये व्यवस्था लागू हो जाएगी तो एक बार किसी ज्वेलरी की बिक्री हो जाने के बाद उसके HUID नंबर का दोबारा इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा. अगर वही HUID नंबर किसी दूसरी ज्वेलरी के साथ इस्तेमाल किया जाता है, तो सिस्टम उसे पहले ही बिक चुके आर्टिकल के तौर पर पहचान सकता है. इसके लिए नए सिस्टम में एक ही HUID दोबारा इस्तेमाल होने पर सिस्टम अलर्ट देने की भी व्यवस्था की जा रही है. इस पूरे सिस्टम के लागू होने के बाद चोरी की ज्वेलरी को बाजार में खपाना मुश्किल हो सकता है.

अगर कोई ज्वेलरी किसी एक ग्राहक ने किसी दूसरे को बेचा है या फिर गिफ्ट किया है तो इसका भी ट्रैक रिकॉर्ड रखा जाएगा. इसके लिए बिक्री के बाद गहने का HUID नए रिकॉर्ड और खरीदार के साथ ट्रांसफर करने की व्यवस्था का परीक्षण किया जा रहा है. हर हॉलमार्क वाले गहने के 6 डिजिट HUID की ट्रैकिंग और बिक्री रिकॉर्ड तैयार होगा. मतलब ये कि अगर कोई व्यक्ति ये कहता है कि गोल्ड ज्वेलरी उसकी है और उसे किसी ने गिफ्ट किया है या उसने खरीदा है तो उस व्यक्ति को HUID का सर्टिफिकेट भी दिखाना होगा. इससे ये पता चलेगा कि कोई गोल्ड ज्वेलरी कब कब किस खरीदार को ट्रांसफर हुई.

ज्यादा पारदर्शी होगा सिस्टम

इसके अलावा, HUID के साथ गहने का वजन और फोटो जोड़ने की सुविधा पर भी काम हो रहा है, यानी जिस वक्त गहने का वजन लिया जा रहा है और उस पर HUID का टैग लग रहा है, वो फोटो भी डेटा के तौर पर लिया जाएगा. ताकि भविष्य में अगर कोई गोल्ड ज्वेलरी दोबारा बेची जा रही है, तो ये पता चल सके कि वो वही गोल्ड ज्वेलरी है और उसका वज़न क्या है और HUID क्या है. इससे पुरानी गोल्ड ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए ये व्यवस्था और ज्यादा पारदर्शी हो सकेगी.

इसको आसान भाषा में ऐसे समझें कि हर हॉलमार्क वाली सोने की ज्वेलरी की एक अलग डिजिटल पहचान होती है. ये पहचान उसके छह अंकों वाले HUID नंबर के जरिए पहले से मौजूद है. जब कोई ग्राहक ज्वेलरी खरीदता है, तो नए सिस्टम के तहत उसके HUID को सिस्टम में ‘SOLD’ के रूप में दर्ज किया जाएगा. इसके बाद अगर भविष्य में वही HUID नंबर किसी दूसरी ज्वेलरी के साथ दर्ज किया जाता है, तो सिस्टम उसे पहचान सकता है. यानी सरकार का मकसद केवल सोने की शुद्धता की जांच करना नहीं है, बल्कि ज्वेलरी की ट्रेसेबिलिटी यानी उसकी खरीद-बिक्री की पूरी पहचान और हिस्ट्री को मजबूत करना भी है. क्योंकि अभी तक HUID सिर्फ गहने की शुद्धता और उसकी पहचान को प्रमाणित करने के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें ये ट्रैक करने की कोई व्यवस्था नहीं है कि वो गहना बिक चुका है या नहीं. इसी का फायदा धोखेबाज़ उठा सकते हैं.

चोरी की ज्वेलरी बेचना मुश्किल होगा

ये व्यवस्था लागू हुई तो इसके बाद चोरी की ज्वेलरी बेचना बहुत मुश्किल हो जाएगा. मान लीजिए किसी ग्राहक की हॉलमार्क वाली सोने की अंगूठी चोरी हो गई उस अंगूठी का HUID नंबर पहले ही किसी सिस्टम में बिक्री के बाद ‘SOLD’ के रूप में दर्ज है. अब अगर कोई व्यक्ति उसी HUID नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरी ज्वेलरी को बेचने या दर्ज कराने के लिए करता है, तो सिस्टम में डुप्लीकेट पहचान सामने आ सकती है. इससे जुड़े कारोबारी या जांच एजेंसी को तुरंत पता चल जाएगा कि इस HUID का रिकॉर्ड पहले से मौजूद है और इसकी दोबारा एंट्री की जा रही है. हालांकि ये व्यवस्था अपने आप इस बात को साबित नहीं करेगी कि ज्वेलरी चोरी की ही है, लेकिन यह एक चेतावनी जरूर मिल सकती है. जिसके बाद ज्वेलरी और उसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा सकती है

बड़े ज्वेलर्स से शुरुआत, फिर होगा विस्तार

अभी इस प्रस्ताव पर शुरुआती चर्चा हो रही है और टेस्टिंग की जा रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक – कॉरपोरेट ज्वेलर्स के साथ HUID ट्रांसफर का ट्रायल शुरू किया गया है, यानी जितने बड़े ज्वेलर्स हैं, उनके साथ टेस्टिंग शुरू हो चुकी है. उम्मीद की जा रही है कि नया सिस्टम अगले तीन महीने में लागू कर दिया जाएगा. मगर, इसको एक साथ पूरे देश में लागू करने की बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की संभावना है.

सूत्रों के मुताबिक शुरुआती चरण में इसका दायरा शहरी क्षेत्रों में मौजूद ऑर्गनाइज्ड ज्वेलरी रिटेलर्स यानी बड़े ज्वेलर्स तक होगा. इसके बाद सिस्टम के अनुभव और तकनीकी क्षमता के आधार पर इसे ग्रामीण इलाकों और छोटे-छोटे ज्वेलर्स तक बढ़ाया जाएगा. ऐसा करने की एक वजह यह भी है कि बड़े संगठित ज्वेलर्स के पास पहले से डिजिटल इन्वेंटरी और बिलिंग सिस्टम्स मौजूद होते हैं. इसलिए उनके सिस्टम में HUID को बिक्री के रिकॉर्ड से जोड़ना आसान है.

HUID नंबर क्या होता है?

भारतीय मानक ब्यूरो यानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के मुताबिक, HUID एक यूनिक 6-अंकों वाला अल्फान्यूमेरिक नंबर है, जो हर हॉलमार्क वाले सोने के गहने को अलग से दिया जाता है. ये नंबर उस गहने की शुद्धता, उसे बनाने वाले जौहरी और उसकी जांच करने वाले सेंटर की जानकारी को डिजिटल रूप से जोड़ता है. कोई भी ग्राहक BIS केयर ऐप के जरिए इस नंबर को वेरीफाई कर सकता है और ये पता कर सकता है कि उसका गहना असली है या नहीं या उसकी शुद्धता कितनी है.

ये HUID सिस्टम पहले से ही गहनों की शुद्धता को प्रमाणित करने और नकली हॉलमार्क को पकड़ने में मददगार साबित हुआ है. अब इसमें ‘SOLD’ टैग जोड़ने का प्रस्ताव, इसी सिस्टम की क्षमता को एक कदम आगे बढ़ाकर, चोरी और धोखाधड़ी रोकने की दिशा में इस्तेमाल करने की कोशिश है.

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