क्या आपने सोने की तेज़ी मिस कर दी! निवेश से पहले चीन की ये चेतावनी जान लीजिए

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Don't Chase Gold at These Levels, Warns China's Securities Daily

सोने में तेज़ी को देखकर अगर आप भी निवेश करने की सोच रहे हैं, आपको भी लग रहा है कि कहीं आपने सोने की तेज़ी को मिस तो नहीं कर दिया तो, ये बहुत नैचुरल सी बात है. क्योंकि किसी को भी ऐसा लग सकता है. इसे FOMO यानी Fear Of Missing Out कहा जाता है, यही सोच अक्सर लोगों को ऊंचे भाव पर भी बिना सोचे-समझे खरीदारी करने पर मजबूर कर देता है, लेकिन चीन की सरकारी वित्तीय मीडिया आउटलेट Securities Daily ने ऐसे निवेशकों के लिए एक चेतावनी जारी की है. उसका कहना है कि मौजूदा ऊंचे स्तर पर सोना अंधाधुंध खरीदना जोखिम भरा हो सकता है.

तेजी की असली वजह क्या है

इंटरनेशनल मार्केट में सोना वायदा इस वक्त 4,470 डॉलर प्रति आउंस के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जबकि घरेलू बाजार में MCX पर सोना वायदा 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर निकल गया है. अब पहले ये समझना ज़रूरी है कि आखिर सोने में ये रैली आई क्यों? इसके पीछे बाज़ार की सोच काफी सीधी है, अमेरिकी अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ रही है, महंगाई धीरे-धीरे नीचे आती दिख रही है, जिससे उम्मीद जागी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर खत्म होने वाला है. जब ब्याज दरें कम होने की उम्मीद बनती है, तो सोना निवेशकों को ज़्यादा आकर्षक लगने लगता है, क्योंकि तब Opportunity cost कम हो जाती है. यही सोच पूरी दुनिया में सोने की मौजूदा तेजी को सहारा दे रही है.

Gold Story का सबसे बड़ा ‘रिस्क फैक्टर’

Securities Daily ने आगाह किया है कि यही थ्योरी, जो सोने की तेजी को सहारा दे रही है, इसका सबसे बड़ा जोखिम भी बन सकती है. दरअसल, ये पूरा समीकरण इस बात पर टिका है कि अमेरिका में महंगाई काबू में आती रहेगी, अगर अमेरिका में भविष्य की महंगाई दर उम्मीद से ज्यादा आई, तो पूरी तस्वीर पलट सकती है. ऐसी स्थिति में बाज़ार ये मान लेगा कि महंगाई अभी पूरी तरह काबू में नहीं आई है, और इसलिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को जल्दी नहीं घटाएगा, यानी दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं.

इसका सीधा असर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स पर पड़ेगा, जो ऊपर जा सकती हैं, इसे अमेरिकी डॉलर को भी मज़बूती मिलती है, और डॉलर मज़बूत होने का मतलब है सोने पर दबाव बढ़ना. यही वजह है कि Securities Daily ने फेड की आगे की पॉलिसी को सोने के लिए इस वक्त सबसे बड़ा “uncertainty factor” यानी अनिश्चितता का सबसे बड़ा फैक्टर बताया है.

टेक्निकल पहलू भी समझिए

Securities Daily की चेतावनी का दूसरा पहलू टेक्निकल एनालिसिस से जुड़ा है. हाल के दिनों में सोने की जो रैली देखी गई है, वो काफी तेज़ रही है, और ऐसी तेज़ चाल के बाद अक्सर टेक्निकल इंडिकेटर्स “ओवरबॉट ज़ोन” में पहुंच जाते हैं. इसका सीधा मतलब ये नहीं है कि सोना तुरंत गिरना शुरू हो जाएगा, बल्कि इसका मतलब ये है कि जिन निवेशकों ने नीचे के स्तरों पर सोने में खरीदारी की थी, वो अब मुनाफावसूली की भी सोच सकते हैं.

मतलब, अगर नई खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ेगी और दूसरी तरफ पुराने निवेशक मुनाफा काटने लगेंगे, तो बाज़ार में एक ‘शॉर्ट टर्म करेक्शन’ देखने को मिल सकता है. यही वजह है कि रिपोर्ट ये सलाह दे रही है कि सिर्फ इसलिए सोना नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि उसकी कीमत लगातार ऊपर जा रही है.

तो क्या सोने में रैली खत्म हो गई?

इसका मतलब ये कतई नहीं है कि सोने में रैली खत्म हो गई है, यहां एक बात साफ समझनी ज़रूरी है, Securities Daily ऐसा बिल्कुल भी नहीं कह रहा है कि सोने की लंबी अवधि वाली तेजी खत्म हो चुकी है. बल्कि उसका कहना है कि इस वक्त बाज़ार में दो तरह के खरीदार आमने-सामने हैं, और यही टकराव आगे की चाल तय करेगा.

पहले तरह के खरीदार जो सट्टेबाज़ी वाला पैसा बाजार में डाल रहे हैं. इसमें कुछ ऑफशोर निवेशक और ट्रेडर्स शामिल हैं, जो फेडर की पॉलिसी से जुड़ी खबरों, उम्मीदों और बाज़ार के मोमेंटम को देखकर तेज़ी से सोने में पैसा लगाते हैं. यह पैसा जितनी तेज़ी से बाज़ार में आता है, उतनी ही तेज़ी से निकल भी सकता है. स्थायी पैसा नहीं है.

दूसरी तरफ हैं दुनियाभर के सेंट्रल बैंक, जो पिछले कई वर्षों से सोना लगातार खरीद रहे हैं, लेकिन उनकी सोच पूरी तरह अलग है. ये छोटी-छोटी तेजी में मुनाफा काटकर निकलने वाले ट्रेडर्स नहीं हैं, बल्कि लंबी अवधि के लिए सोना जमा कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि कई बार कीमत गिरने पर भी सेंट्रल बैंक खरीदारी जारी रखते हैं, क्योंकि उनका मकसद ट्रेडिंग नहीं, बल्कि रिज़र्व बनाना है.

यही वजह है कि सेंट्रल बैंकों की खरीदारी को सोने के लिए एक तरह का “स्ट्रक्चरल सपोर्ट” यानी मजबूत बुनियादी सहारा माना जाता है. इसीलिए Securities Daily की कैलकुलेशन है कि भले ही आने वाले समय में कोई करेक्शन आए, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वह कोई बड़ी और लंबी गिरावट बन जाए. रिपोर्ट के मुताबिक ज़्यादा संभावना इस बात की है कि सोना ऊंचे स्तरों पर उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार करे और समय के साथ इसका बेस धीरे-धीरे ऊपर खिसकता रहे, न कि यह एकतरफा टूट जाए या एकतरफा भागता रहे.

निवेशक क्या करें?

पूरी रिपोर्ट का लब्बोलुआब यही है कि सोना तेज़ी से बढ़ रहा है, इसलिए घबराहट या FOMO में आकर पूरा पैसा एक साथ न लगाएं, मगर इसका मतलब ये नहीं है कि बाजार से दूर होकर हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएं, ये भी सही रणनीति नहीं होगी, क्योंकि सोने की लॉन्ग टर्म स्टोरी बरकरार है. तो फिर रिटेल निवेशक गोल्ड को लेकर क्या रणनीति अपनाए?

Securities Daily रिटेल निवेशकों को सलाह देती है कि वे सिर्फ इसलिए सोना न खरीदें क्योंकि यह लगातार नए हाई बना रहा है, इसके बजाय पोजीशन साइज़िंग यानी अपनी जोखिम क्षमता के हिसाब से ही कितना पैसा लगाना है यह तय करें. यानी पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय पोर्टफोलियो में गोल्ड की भूमिका और अपने निवेश लक्ष्य को देखकर फैसला करना ज्यादा जरूरी है. सोने को शॉर्ट-टर्म ट्रेड की बजाय लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो एलोकेशन के नज़रिए से देखें.

आने वाले समय में निवेशकों को सबसे पहले US महंगाई डेटा पर नजर रखनी होगी. अगर महंगाई का डेटा अनुमान से कम रहता है, तो फेड रेट कट की उम्मीद मजबूत हो सकती है और गोल्ड को सपोर्ट मिल सकता है.

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