सोने की कीमतों पर कैसे असर डालता है बॉन्ड यील्ड का उतार-चढ़ाव? क्या होता है Yield Curve

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How the Yield Curve Can Influence Gold Prices: A Simple Explanation

किसी देश की अर्थव्यवस्था में क्या होने वाला है, क्या वो किसी आर्थिक मुसीबत की चपेट में आने वाली है. इसका अंदेशा सबसे पहले किसको होता है. अगर आपका जवाब है कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व को या फिर दुनिया के बड़े बड़े अर्थशास्त्रियों को या फिर ब्रोकरेज हाउसेज को, तो आपका ये जवाब गलत है. क्योंकि अगर इसका कोई सटीक अंदाजा दे पाया है तो वो है बॉन्ड मार्केट. 1955 के बाद से अमेरिका में जब भी मंदी आई, उससे पहले यील्ड कर्व (Yield Curve) ने ही किसी न किसी रूप में चेतावनी दी थी.

जब शॉर्ट टर्म ट्रेजरी यील्ड लॉन्ग टर्म यील्ड से ऊपर निकल जाती है, तो इसे Yield Curve Inversion कहते हैं. ये घटना सामान्य नहीं मानी जाती, तब बॉन्ड मार्केट ये संकेत देता है कि आज की ऊंची ब्याज दरें टिकाऊ नहीं हैं और आगे कोई आर्थिक मुसीबत आने वाली है.

Yield Curve क्या होती है?

Yield Curve को आसान भाषा में समझें तो ये अमेरिका के सरकारी बॉन्ड यानी US Treasury Bonds पर मिलने वाली ब्याज दरों का एक ग्राफ है. अमेरिका की सरकार अलग-अलग अवधि के लिए बॉन्ड जारी करती है. जैसे 3 महीने, 2 साल, 5 साल, 10 साल और 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड्स. सरकार इन बॉन्ड्स पर एक तय ब्याज देती है हालांकि इन पर मिलने वाली ब्याज दर यानी यील्ड अलग-अलग होती है. आमतौर पर लंबी अवधि के बॉन्ड पर ज्यादा यील्ड मिलती है, क्योंकि निवेशक लंबे समय के लिए पैसा लगा रहा है और भविष्य की अनिश्चितता ज्यादा होती है. अगर ऐसा है तो स्थिति बिल्कुल सामान्य माना जाती है.

परेशानी तब शुरू होती है जब शॉर्ट टर्म ट्रेजरी यील्ड (जैसे कि 2 साल की), लॉन्ग टर्म ट्रेजरी यील्ड (जैसे कि 10 साल) से ज्यादा हो जाए, तो इसे Yield Curve Inversion कहते हैं. मतलब, निवेशक को 2 साल के लिए पैसा लगाने पर 10 साल की तुलना में ज्यादा ब्याज मिल रहा है. ये स्थिति सामान्य नहीं मानी जाती और अक्सर इसे अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी का संकेत माना जाता है.

Short-term Yield पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों का काफी सीधा असर पड़ता है. जब फेड महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाता है, तो छोटी अवधि के Treasury की Yield भी ऊपर जा सकती है.

वहीं अगर निवेशकों को लगता है कि आगे चलकर अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और फेडर को ब्याज दरें कम करनी पड़ेंगी, तो वे Long-term Treasury खरीदना शुरू कर सकते हैं, इससे उनके दाम बढ़ते हैं और Yield घटती है.

10-2 Spread क्या है?

ये एक आसान सा इंडिकेटर है, इसमें देखा जाता है कि 10 साल के US Treasury की Yield और 2 साल के US Treasury की Yield में कितना अंतर है. अगर अंतर पॉजिटिव है तो ठीक है, अगर निगेटिव है तो इसे Yield Curve Inversion कहते हैं. जैसे

10-Year Treasury Yield = 4%
2-Year Treasury Yield = 4.5%

तो 10-2 Spread होगा: 4% – 4.5% = -0.5%

यानी Spread Negative हो गया, इसे Yield Curve Inversion कहा जाता है.

Yield Curve कब उलटी हुई थी?

अमेरिका की 10-Year और 2-Year Treasury Yield का अंतर यानी 10-2 Spread जुलाई 2022 में Negative हो गया था. इसके बाद ये अंतर और गहरा होता गया और जुलाई 2023 में करीब -1.08 परसेंटेज प्वाइंट्स तक पहुंच गया. ये 1980 के दशक की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा गहरे Inversion में से एक था. इसका मतलब था कि उस समय बाजार में ये सोच काफी मजबूत थी कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ऊंची ब्याज दरों का दबाव पड़ सकता है और आगे चलकर फेड को दरें कम करनी पड़ सकती हैं.

Inversion की ये स्थिति थोड़े समय के लिए नहीं रही. 10-2 Yield Spread करीब 26 महीने तक उलटा रहा. आखिरकार सितंबर 2024 में 10-Year Treasury Yield फिर से 2-Year Yield से ऊपर निकल गई, यानी Yield Curve दोबारा सामान्य स्थिति में आ गई.

अब 2026 में क्या स्थिति है?

अगस्त 2026 तक 10-2 Spread करीब +0.51 परसेंटेज प्वाइंट्स के आसपास लौट चुका है. इसका मतलब है कि अब 10-Year Treasury की Yield फिर से 2-Year Treasury से ऊपर है. यानी Yield Curve फिलहाल Inverted नहीं बल्कि सामान्या है.

Yield Curve का सोने से कनेक्शन

सोना एक ऐसा असेट है, जिससे न तो निवेशकों को ब्याज मिलता है, न ही कोई डिविडेंड. इसलिए निवेशक के सामने हमेशा एक सवाल रहता है कि वो अपना पैसा कहां निवेश करे, गोल्ड में या फिर किसी ऐसे असेट में जहां पर उसे ब्याज मिले

यहीं से एंट्री होती है Real Yield की. इसको आसान भाषा में ऐसे समझें कि ट्रेजरी यील्ड में से महंगाई के अनुमान को घटा दिया जाए . मान लीजिए 10-साल की बॉन्ड यील्ड पर 4.5% ब्याज मिल रही है और बाजार में महंगाई का अनुमान 2.5% है, तो Real Return करीब 2% माना जा सकता है. यानी कि निवेशक को बॉन्ड में निवेश से महंगाई को मात देने वाला अच्छा रिटर्न मिल रहा है. इसलिए बिना ब्याज देने वाले गोल्ड को रखने की अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है. इससे सोने की कीमतों पर दबाव दिखता है. जब रियल यील्ड गिरती है तो सोने के फायदा मिलता है. क्योंकि निवेशकों को ब्याज कम मिलता है तो वो गोल्ड की तरफ लौटते हैं.

अब वापस Yield Curve पर आते हैं. जब Yield Curve Invert होती है, तो बाजार यह संकेत दे रहा होता है कि आज की ऊंची ब्याज दरें लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगी. बाज़ार ये अनुमान लगाता है कि ऊंची ब्याज दरें यानी इकोनॉमी पर दबाव और ग्रोथ में गिरावट और फिर फेड को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ सकती है. जिससे ट्रेजरी यील्ड गिरने की संभावना बढ़ जाती है. तो Real Yield भी नीचे आने लगती है, ये सोने की कीमतों के लिए पॉजिटिव होता है, क्योंकि अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट कम हो जाती है.

इसे एक आसान उदाहरण से समझिए-
मान लीजिए:
10-Year Treasury Yield = 5%
Inflation Expectations = 3%
तो Real Yield करीब 2% है

अब बाजार को लगता है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें घटाएगा और 10-Year Yield गिरकर 3.5% हो जाती है, जबकि Inflation Expectations 3% बनी रहती हैं.
अब Real Yield सिर्फ 0.5% रह जाएगी. अगर Real Yield और नीचे जाकर निगेटिव हो जाए, तो सोना और आकर्षक हो सकता है.

जब दरें निगेटिव से वापस से सामान्य होने लगती हैं तो फिर से सोने में तेजी आती है. क्योंकि तब ये संकेत देने लगता है कि फेड भविष्य में रेट कट कर सकता है. मगर, संस्थागत निवेशक बहुत होशियार होते हैं, वो फेड के ऐलान का इंतजार नहीं करते, बल्कि वे पहले ही ये अनुमान लगाने लगते हैं कि ब्याज दरों का अगला कदम क्या होगा. फिर ये लोग Gold में अपनी पोजीश बनाना शुरू कर देते हैं. कई बार बाजार उससे कई महीने पहले ही भविष्य की रेट कटौतियों को प्राइस इन करना शुरू कर देता है.

लेकिन 2022–2026 में क्या हुआ?

2022 से 2024 के दौरान सोने ने बिल्कुल अलग तरीक से बर्ताव किया. आमतौर पर Real Yields बढ़ने पर सोने पर दबाव आना चाहिए था, लेकिन इस दौरान ऐसा नहीं हुआ और सोने के दाब बढ़ते रहे. इसकी बड़ी वजह थी कि पश्चिमी देशों के निवेशकों की Gold ETF होल्डिंग्स में करीब 800 टन की कमी आई, लेकिन इस बिकवाली की भरपाई सेंट्रल बैंकों की खरीदारी ने कर दी. अकेले 2025 में सेंट्रल बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा, जो इतिहास में चौथी सबसे बड़ी सालाना खरीद थी.

इसका मतलब है कि अब गोल्ड की कहानी सिर्फ अमेरिका में ब्याज दर और Real Yields पर निर्भर नहीं है. World Gold Council के 2026 सर्वे में 89% केंद्रीय बैंकों ने कहा कि अगले 12 महीनों में ग्लोबल गोल्ड रिजर्व बढ़ने की उम्मीद है, जबकि रिकॉर्ड 45% ने अपने भंडार में गोल्ड बढ़ाने की योजना बताई है. यानी सोने के लिए अब दो बड़े सपोर्ट हैं,

पहला- भविष्य में Real Yields घटने और रेट कट से मिलने वाला सपोर्ट
दूसरा- सेंट्रल बैंकों की लगातार मजबूत खरीदारी, जो ऊंची यील्ड के दौर में भी सोने की कीमत को सहारा दे सकती है.

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