CLSA ने TCS, Infosys समेत 5 Largecap IT शेयरों को किया डाउनग्रेड, इन Midcaps पर जताया भरोसा

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CLSA Downgrades TCS, Infosys, Tech Mahindra, Wipro and Mphasis; Prefers Midcaps

CLSA की ताजा रिपोर्ट ने भारतीय IT सेक्टर के लिए निवेशकों का ध्यान एक बार फिर खींच लिया है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA ने देश की पांच बड़ी IT कंपनियों TCS, Infosys, Tech Mahindra, Wipro और Mphasis पर अपनी रेटिंग घटा दी है. 18 अगस्त की अपनी इस लेटेस्ट रिपोर्ट में CLSA ने कुछ मिडकैप IT कंपनियों पर ज्यादा भरोसा जताया है. ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले समय में IT सेक्टर में सिर्फ कंपनी का साइज़ ही मायने नहीं रखेगा, बल्कि AI और टेक्नोलॉजी में बदलाव के हिसाब से खुद को कितनी तेजी से ढालती है, ये ज्यादा ज़रूरी होगा.

IT कंपनियों पर CLSA की रेटिंग

CLSA ने अपनी रिपोर्ट में TCS, Infosys और Tech Mahindra की रेटिंग ‘Outperform’ से घटाकर ‘Hold’ कर दी है. जबकि Wipro और Mphasis को ‘Hold’ से डाउनग्रेड करके ‘Underperform’ किया है. खास बात ये है कि रेटिंग में बदलाव के बावजूद इन कंपनियों के टारगेट प्राइस में बहुत बड़ा फेरबदल नहीं किया गया है. इससे संकेत मिलता है कि CLSA की चिंता इन कंपनियों की मौजूदा वैल्यूएशन से ज्यादा उनके आने वाले वर्षों के ग्रोथ आउटलुक को लेकर है.

ब्रोकरेज ने Coforge और Persistent Systems पर अपनी “हाई कन्विक्शन आउटपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है, जबकि Hexaware और LTIMindtree पर “आउटपरफॉर्म” रेटिंग बनाए रखी है. इनमें से Hexaware ऐसा स्टॉक है जो अपने नए टारगेट प्राइस के हिसाब से सबसे ज़्यादा तेजी की संभावना दिखा रहा है.

5 Largecap IT कंपनियों को डाउनग्रेड किया

StockRatingOld Target (₹)New Target (₹)
TCSHold From Outperform2,1652,326
InfosysHold From Outperform1,1091,147
Tech MahindraHold From Outperform1,634UNCH
WiproUnderperform from Hold157152
MphasisUnderperform from Hold2,113UNCH

4 Midcap IT कंपनियों पर लगाया दांव

StockRatingOld Target (₹)New Target (₹)
Persistent SystemsHigh Conviction Outperform6,1666,246
CoforgeHigh Conviction Outperform2,170UNCH
HexwareOutperform727730
LTIMOutperform4,5705,534

इस डाउनग्रेड की वजह क्या है?

ब्रोकरेज फर्म CLSA की India IT Sector Outlook रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय IT इंडस्ट्री इस समय एक बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुज़र रही है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI), ऑटोमेशन और नए डिजिटल मॉडल जहां कुछ कंपनियों के लिए नए मौके पैदा कर रहे हैं, तो वहीं कुछ कंपनियों के लिए चुनौती भी बन रहे हैं.

CLSA ने कहा कि IT सेक्टर इस समय एक साथ कई मैक्रो और कंपनी-विशेष चुनौतियों से जूझ रहा है. AI की अगुवाई में हो रहे बदलाव मौजूदा IT सर्विसेज रेवेन्यू पर दबाव बना रहे हैं, जबकि जियो-पॉलिटिकल तनाव, महंगाई, ब्याज दरों और कमजोर खर्चों का असर क्लाइंट्स के IT बजट पर पड़ रहा है. हालांकि, कंपनियों की ऑर्डर्स बुक्स अब भी मजबूत है. साथ ही, AI से जुड़े काम अब धीरे-धीरे प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ नए कमाई के मौके पैदा करने लगे हैं.

ब्रोकरेज ने तीन बड़े ढांचागत बदलावों की ओर इशारा किया है.

  • पहला, Global Capability Centres यानी GCCs का तेजी से बढ़ता चलन. बड़ी ग्लोबल कंपनियां अब अपने टेक्नोलॉजी और डिजिटल काम के लिए भारत में खुद के GCCs बना रही हैं, जिससे कई IT सर्विस कंपनियों के लिए काम कम होने लगा है.
  • दूसरा, भारतीय IT कंपनियां ग्लोबल कंपटीटर्स से बड़े पैमाने पर अपनी बाजार हिस्सेदारी को नहीं बढ़ा पा रही हैं. यानी इंडस्ट्री का साइज बढ़ने के बावजूद भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी में वैसी तेजी नहीं दिख रही, जैसी पहले देखने को मिलती थी.
  • तीसरी– सबसे बड़ी चुनौती है AI का असर. AI के आने के बाद फिलहाल हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर कंपनियां ज्यादा फायदा उठा रही हैं, जबकि IT सर्विसेज कंपनियों को इसका फायदा ज्यादा नहीं मिल पा रहा है.

AI से फायदा या नुकसान?

AI को लेकर भारतीय IT कंपनियों के लिए तस्वीर थोड़ी उलझी हुई दिखती है. एक तरफ कंपनियां AI से जुड़े नए प्रोजेक्ट और सर्विसेज हासिल कर रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ AI पारंपरिक IT सर्विसेज की लागत और प्राइसिंग पर दबाव भी डाल सकता है.

CLSA के मुताबिक बड़ी IT सर्विसेज कंपनियां फिलहाल AI deflation यानी कीमतों में आ रही गिरावट के असर से जूझ रही हैं. इसका मतलब है कि AI और ऑटोमेशन की वजह से कुछ IT काम पहले के मुकाबले कम समय और कम लागत में किया जा सकता है. इसके अलावा इस वक्त दुनिया में जो मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चतता फैली हुई है, वो अपने आप में एक अलग ही चुनौती है.

CLSA का अनुमान है कि बड़ी IT कंपनियों को AI से मिलने वाला नया रेवेन्यू इतना मजबूत होने में समय लगेगा कि वो ‘AI-driven deflation’ के असर की भरपाई कर सके. ब्रोकरेज के मुताबिक ये संतुलन FY30 के आसपास जाकर बन सकता है. यानी आने वाले कुछ सालों में बड़ी IT कंपनियों के लिए growth का रास्ता आसान नहीं रहने वाला है.

TCS, Infosys और HCLTech के लिए क्या अनुमान?

CLSA ने AI रेवेन्यू को लेकर भी एक अनुमान दिया है. TCS, Infosys और HCLTech के कुल रेवेन्यू में AI का योगदान फिलहाल करीब 10%, 9% और 6% है. CLSA का अनुमान है कि FY31 तक AI इन कंपनियों के कुल रेवेन्यू का करीब एक-तिहाई हिस्सा बन सकता है. इसके बाद ही इनकी ग्रोथ में हमें कुछ सुधार देखने को मिल सकता है.
CLSA के अनुमान के मुताबिक FY31 में TCS की रेवेन्यू ग्रोथ करीब 6.1%, Infosys की 5.6% और HCLTech की करीब 6.4% हो सकती है. यानी CLSA का मानना है कि AI लंबी अवधि में इन कंपनियों के लिए ग्रोथ को मजबूती देने वाला बन सकता है,लेकिन इसका पूरा फायदा तुरंत नहीं मिलने वाला.

CLSA को पसंद हैं ये IT शेयर

CLSA ने बड़ी बड़ी IT कंपनियों की बजाय अपना दांव छोटी मझोली कंपनियों पर लगाया है. ब्रोकरेज ने Coforge और Persistent Systems पर अपनी ‘High Conviction Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है. वहीं Hexaware Technologies और LTIMindtree पर भी CLSA की रेटिंग ‘Outperform’ है. CLSA का मानना है कि ये मझौली IT कंपनियां बड़ी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा लचीली हैं, और टेक्नोलॉजी में तेजी से हो रहे बदलावों का फायदा उठाने की बेहतर स्थिति में हैं.

CLSA की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारतीय IT शेयर पहले से ही दबाव में हैं. जुलाई में 52 हफ्ते के निचले स्तर से कुछ रिकवरी देखने के बावजूद Nifty IT इंडेक्स इस साल अब तक करीब 20% नीचे है. TCS, Infosys और Wipro जैसे बड़े IT शेयरों में इस साल करीब 28% से 33% तक की गिरावट देखी गई है. दूसरी ओर Tech Mahindra और Coforge उन चुनिंदा Nifty IT stocks में शामिल हैं, जो साल की शुरुआत के मुकाबले अभी भी ऊपर हैं.

कुल मिलाकर CLSA की रिपोर्ट का कहना है ये है कि IT सेक्टर से पूरी तरह दूरी बनाने की जरूरत नहीं है, लेकिन बड़े IT नामों और मिडकैप IT शेयरों के बीच चुनाव अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है.

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