3 महीने की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोना अब यहां से कहां जाएगा? सोने के लिए अब अगला ट्रिगर क्या होगा. 25 अगस्त, 2026 यानी मंगलवार को सोने की कीमतें दायरे में घूमती दिख रही हैं. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार दोनों ही में सोना नए ट्रिगर्स के इंतजार में दिख रहा है.
सोना एक दायरे में
मंगलवार को इंटरनेशनल मार्केट में सोना वायदा 4,754 डॉलर प्रति आउंस के पार निकल गया, जो कि 3 महीने की ऊंचाई है. फिलहाल एकदम फ्लैट 4,692 डॉलर प्रति आउंस के आसपास ट्रेड कर रहा है. हालांकि स्पॉट मार्केट में गोल्ड 4,696.98 को छूने के बाद 4,636 डॉलर के इर्द-गिर्द ट्रेड कर रहा है.
घरेलू मार्केट में MCX पर सोना वायदा बिल्कुल फ्लैट 1,63,300 के करीब ही ट्रेड कर रहा है. जबकि इंट्राडे में सोना वायदा 1,63,800 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा. रिटेल मार्केट में 25 अगस्त को IBJA (India bullion and jewellers association) के मुताबिक 24 कैरेट गोल्ड का भाव 1,62,340 रुपये प्रति 10 ग्राम है. जो कि 24 अगस्त के मुकाबले 186 रुपये प्रति 10 ग्राम ज्यादा है.
अब गोल्ड के लिए ट्रिगर क्या है?
पिछले हफ्ते की जोरदार तेजी के बाद इस रैली को सबसे बड़ा सहारा अमेरिकी ट्रेजरी के उस ऐलान से मिला, जिसमें अमेरिका की सरकार ने ऐलान किया कि वो लंबी अवधि के बॉन्ड्स का बायबैक करेगी. ये बायबैक 2 बिलियन से बढ़ाकर अब 4 बिलियन डॉलर का होगा.
इस ऐलान के बाद से ही अमेरिका की बॉन्ड यील्ड्स में नरमी देखने को मिली, डॉलर भी कमजोर हुआ. जिससे विदेशी खरीदारों के लिए सोना खरीदना सस्ता हुआ. साथ ही, निवेशकों के बीच ये चिंता भी बढ़ी कि अमेरिकी सरकार पर बढ़ते कर्ज और वित्तीय नीतियां लंबे समय में डॉलर की खरीद क्षमता को कमजोर कर सकती हैं. इसे debasement trade कहा जाता है. यही थीम 2025 में सोने में करीब 65% तेजी के पीछे एक बड़ा फैक्टर रही थी.
अब सवाल है कि सोने के लिए अगला बड़ा ट्रिगर क्या है? निवेशकों की नजरें इस वक्त सिर्फ दो इवेंट्स पर टिकी हैं.
US उपभोक्ता महंगाई दर
पहला है अमेरिका का जुलाई महीने का महंगाई डेटा (US July PCE Inflation Data), जो कि 26 अगस्त, 2026 यानी बुधवार को भारतीय समय के मुताबिक शाम को 6 बजे जारी होगा. ये उपभोक्ता महंगाई दर होती है, यह बताता है कि लोग जिन सामानों और सर्विसेज पर खर्च करते हैं, उनकी कीमतें कितनी बढ़ रही हैं. फेड इस डेटा को अपनी पॉलिसी के लिए बहुत तवज्जो देता है. इसमें खास तौर पर Core PCE पर बाजार की नजर रहेगी. अभी बाजार की उम्मीद है कि ये करीब 3.3% YoY रह सकता है, जबकि जून में भी Core PCE 3.3% था. यानी कोई बदलाव नहीं होगा.
अगर उपभोक्ता महंगाई उम्मीद से नरम आती है, तो फेड की तरफ से मॉनिटरी पॉलिसी को ज्यादा नरम किए जाने की उम्मीद मजबूत हो सकती है, यानी ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी. इससे डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर दबाव आ सकता है, और सोने को फायदा मिल सकता है.
जैक्सन होल में वॉर्श का भाषण
दूसरा और ज्यादा बड़ा ट्रिगर है जैक्सन होल में फेड चेयरमैन बनने के बाद केविन वॉर्श का पहला भाषण है. बाजार ये देखेगा कि वॉर्श ब्याज दरों को और आगे की मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर क्या संकेत देते हैं. अगर उनका संदेश थोड़ा नरम रहता है, तो रेट कट की संभावना मजबूत होगी. इससे सोने की तेजी को सपोर्ट मिलेगा. लेकिन वॉर्श की टोन जरा भी हॉकिश हुई तो सोने पर दबाव आना लाज़िमी है.
जैक्सन होल इकोनॉमिक पॉलिसी सिम्पोजियन 27–29 अगस्त 2026, यानी गुरुवार से शनिवार तक होना है. इसमें केविन वॉर्श की स्पीच शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को होगी. भारतीय समय के मुताबिक 28 अगस्त, शाम 7:30 बजे.
इसके अलावा ईरान पर प्रतिंबध, मिडिल ईस्ट में तनाव, ट्रेड तनाव और जियो पॉलिटिकल चिंताएं तो अपनी जगह हैं हीं.

