MSRDC पर बढ़ा विवाद; HDFC Bank का शेयर लुढ़का, मामला अब US कोर्ट पहुंचा

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HDFC Bank Shares Fall as ₹45 Crore MSRDC Controversy Lands in US Court

HDFC बैंक और महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. करीब 45 करोड़ रुपये के कथित भुगतान से शुरू हुआ यह मामला अब सिर्फ जांच-पड़ताल या मीडिया रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका की एक अदालत में औपचारिक मुकदमे में बदल चुका है.

इस घटनाक्रम का असर बैंक के शेयरों पर भी दिखा. HDFC Bank का शेयर गुरुवार को बाज़ार खुलने के शुरुआती घंटे में 1% से ज्यादा टूटकर 717.10 रुपये पर आ गया, जबकि विवाद सामने आने के बाद ये 19 अगस्त को 52 हफ्ते के निचले स्तर 715.10 तक फिसल गया था.

अमेरिका की अदालत में पहुंचा मामला

13 अगस्त 2026 को एक निवेशक ज्वलंत नटवरलाल सोनजी ने अमेरिका की Southern District of New York में अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों के उल्लंघन को लेकर क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया है. इस केस में सिर्फ HDFC बैंक ही नहीं, बल्कि बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन और CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन को भी पक्षकार बनाया गया है. अदालत ने 14 अगस्त को समन भी जारी किया. ज्वलंत सोनेजी ने आरोप लगाया है कि बैंक ने निवेशकों के सामने कुछ जरूरी जानकारियां पूरी तरह से सामने नहीं रखीं और ऐसे बयान दिए जो भ्रामक हो सकते थे. सोनजी का दावा है कि जुलाई 2023 से मई 2026 के बीच बैंक के शेयर खरीदने वाले तमाम निवेशकों को गुमराह किया गया, इसलिए ये मुकदमा उन सभी निवेशकों की तरफ से दाखिल किया गया है.

पूरा विवाद क्या है समझिए

ये पूरा विवाद MSRDC से बड़े डिपॉजिट हासिल करने के लिए HDFC Bank की ओर से किए गए करीब ₹45 करोड़ के भुगतान से जुड़ा है. मामला साल 2017 और 2021 में हुए डिपॉजिट अरेंजमेंट्स का है. आरोप है कि ये रकम बैंक की मार्केटिंग शाखा से एक रोड सेफ्टी कैंपेन को स्पॉन्सर करने के नाम पर दी गई, लेकिन असल मकसद कुछ और था.

दरअसल MSRDC ने अपना पैसा बैंक में डिपॉजिट के तौर पर रखा हुआ था, और आरोप है कि MSRDC को सीधे ज्यादा ब्याज देने के बजाय रकम को मार्केटिंग/स्पॉन्सरशिप के रास्ते से दिया गया. इससे MSRDC को उस समय के डिपॉजिट रेट से ज्यादा रेट पर ब्याज मिला. आरोप के मुताबिक MSRDC को असल में 6.01% की ब्याज दर मिली. जिसमें सामान्य दर के मुकाबले लगभग 2.51 परसेंटेज प्वाइंट का अतिरिक्त फायदा शामिल था.

ये मामला मई 2026 में तब सामने आया जब बैंक की आंतरिक विजिलेंस जांच से जुड़ी खबरें मीडिया में आईं. इसके बाद बैंक ने खुद अपनी जांच की, और जुलाई में बोर्ड ने इसे “बिजनेस ओवररीच” बताया. बिज़नेस ओवररीच का मतलब बिजनेस हासिल करने के लिए अपनी तय सीमाओं से ज्यादा आगे चले जाना.

हालांकि बैंक ने इसे किसी गलत नीयत से किया गया काम या निजी फायदे के लिए किया गया काम नहीं माना. फिर भी बैंक ने CEO शशिधर जगदीशन, CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन और एक दूसरे सीनियर एग्जीक्यूटिव पर 1 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई और चेतावनी भी दी.

तीन लॉ फर्म्स ने पहले जांच शुरू की थी

इस मामले में US लॉ-सूट अचानक नहीं आया है. इससे पहले तीन अमेरिकी लॉ फर्म्स ने अलग-अलग जांच का ऐलान किया था. उनका मकसद ये देखना था कि क्या HDFC Bank ने अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों का उल्लंघन किया या निवेशकों के सामने ऐसी जानकारी उजागर नहीं की जो उनके निवेश के फैसलों के लिए जरूरी थी. अब सोनेजी की याचिका के बाद मामला शुरुआती लॉ फर्म जांच से निकलकर कोर्ट के मुकदमेबाज़ी में चला गया है.

HDFC Bank का जवाब

बैंक ने मुकदमे को लेकर साफ तौर पर कहा है कि ये एक बेबुनियाद मामला है. बैंक का कहना है कि अमेरिका में किसी कंपनी के शेयर प्राइस में गिरावट के बाद इस तरह के शेयरहोल्डर्स मुकदमे काफी आम हैं और US-लिस्टेड कंपनियां नियमित रूप से ऐसे मामलों का सामना करती हैं. HDFC Bank का कहना है कि वो इस मुकदमे का खारिज करता है, वो इसका पुरजोर तरीके से बचाव करेगा.

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