सिर्फ एक खबर की वजह से सोना बीते दो दिनों में करीब 4 परसेंट तक टूट चुका है. 27 अगस्त, 2026 गुरुवार को MCX पर सोने का अक्टूबर वायदा करीब 1.8% टूटकर 1,56,692 रुपये तक लुढ़क गया, जो कि 26 अगस्त को इसने 1,63,202 रुपये प्रति 10 ग्राम की ऊंचाई को छुआ था. मतलब सिर्फ 2 ही दिन में सोना ऊपरी स्तरों से 6,500 रुपये टूट गया.
क्या खबर है जिससे गोल्ड टूटा
जिस खबर की वजह से सोना इतनी बुरी तरह टूटा है, वो मनीकंट्रोल की एक्सक्लूसिव खबर है, जिसमें उसने दावा किया है कि केंद्र सरकार के भीतर सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने को लेकर बातचीत चल रही है. मनीकंट्रोल ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बुलियन ट्रेडर्स और ज्वेलरी इंडस्ट्री के प्रतिनिधि लगातार मौजूदा 15% ड्यूटी को घटाकर 6% करने की मांग कर रहे हैं. हालांकि अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
मार्केट के एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसी ड्यूटी कट की उम्मीद ने फिजिकल खरीदारों यानी असली सोना-चांदी खरीदने वालों को फिलहाल रुक जाने पर मजबूर कर दिया है, सीधी सी सोच ये है कि अगर ड्यूटी सच में घटती है, तो कीमतें और नीचे आ सकती हैं, तो अभी खरीदकर नुकसान क्यों उठाया जाए? इसी “वेट एंड वॉच” रवैये ने घरेलू सोने पर डिस्काउंट को और चौड़ा कर दिया है, जिससे भारतीय और इंटरनेशनल कीमतों के बीच ये साफ खाई नजर आ रही है.
फिजिकल मार्केट में भी असर दिखा
इस खबर का असर अब देश के घरेलू फिजिकल गोल्ड मार्केट में भी साफ दिखाई देने लगा है. घरेलू बाजार में सोने की कीमत import-parity यानी देश में सोना इंपोर्ट करके लाने की अनुमानित लागत के मुकाबले और नीचे चली गई है. इस हफ्ते की शुरुआत में घरेलू सोना लैंडेड प्राइस से करीब 2–2.5% डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा था, जो लगभग 45 डॉलर प्रति औंस के बराबर था, लेकिन एक ही रात में इस डिस्काउंट में और 1–1.5 परसेंटेज प्वाइंट की बढ़ोतरी हो गई
“लैंडेड प्राइस” यानी वो कीमत जिस पर सोना इंपोर्ट करके, टैक्स-ड्यूटी चुकाकर, भारत की जमीन पर लाया जाता है. आमतौर पर घरेलू बाजार में सोना इस कीमत पर बिकना चाहिए, लेकिन अभी जो हो रहा है, वो असामान्य है. सोना इस भाव से कम पर बिक रहा है.
IBJA की वेबसाइट के मुताबिक 26 अगस्त को 24 कैरेट गोल्ड का भाव 1,61,337 रुपये प्रति 10 ग्राम था, लेकिन आज यानी 27 अगस्त को भाव गिरकर 1,58,480 रुपये पर आ गया है, यानी एक दिन में ही सोना 2,857 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है.
कीमतों में गिरावट की वजह?
इसकी वजह साफ है. ट्रेडर्स और खरीदार अभी मौजूदा कीमतों पर बड़ी मात्रा में सोना खरीदकर रखना नहीं चाहते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी, तो सोने की लैंडेड कॉस्ट रातोंरात कम हो सकती है. मतलब, ऊंचे भाव पर सोना पहले से खरीदकर क्यों फंसना.
ऐसे में अभी महंगा सोना खरीदकर बैठे डीलर्स को बाद में अपनी इन्वेंटरी बेचने के लिए और ज्यादा डिस्काउंट देना पड़ सकता है. इसलिए फिजिकल बायर्स भी फिलहाल एकदम शांति से बैठे हैं और इंपोर्ट ड्यूटी के घटने के इंतजार कर रहे हैं.
क्या सरकार सच में ड्यूटी बढ़ा सकती है?
मनीकंट्रोल की ये खबर कितनी पुख्ता है, ये तो कहना मुश्किल है. लेकिन सवाल ये है कि जब सरकार ने खुद मई में ड्यूटी बढ़ाकर 15% की थी, तो अब कुछ ही महीनों में उसे पलटने की नौबत क्यों आ रही है? Moneycontrol का दावा है कि उसे सूत्रों ने बताया है कि केंद्र सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि हाल ही में सोने-चांदी पर बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी को वापस पलटा जाए या नहीं, इसके पीछे 2 बड़े कारण हैं.
- तस्करी पर लगाम लगाना
जब ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई, तो कानूनी रास्ते से सोना मंगाना काफी महंगा हो गया. नतीजा ये हुआ कि लोगों ने गैरकानूनी रास्ता यानी तस्करी का सहारा लेना शुरू कर दिया, क्योंकि तस्करी से लाया गया सोना टैक्स बचाकर सस्ता पड़ता था. मतलब सरकार का मकसद था फॉरेक्स बचाना, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ. पैसा वैसे भी बाहर जा रहा था.
- व्यापार को औपचारिक बनाना
ऊंची ड्यूटी की वजह से बहुत सा सोने का कारोबार अन-ऑफिशियल चैनलों में शिफ्ट हो गया, जिसका मतलब है कि उस पर न तो टैक्स मिल रहा है, न ही उसका हिसाब-किताब सरकार के पास है. ड्यूटी घटाने से मकसद यह है कि कारोबार वापस वैध, दर्ज (documented) रास्ते पर आए — जिससे सरकार को टैक्स भी मिले और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता भी बढ़े.
हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से न तो इस खबर का खंडन आया है और न ही किसी तरह की कोई दूसरा संकेत. मगर, इसके पहले ही घरेलू बाजारों में सोने की इस हफ्ते कमाई गई तेजी हवा हो चुकी है.

