दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शुमार Oracle में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर छंटनी (layoff round) की तैयारी चल रही है. बिजनेस वेबसाइट Moneycontrol ने सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है. जिसके मुताबिक ओरेकल सभी टीमों में अपनी लागत को कम करना चाहती है.
Moneycontrol के मुताबिक, इस बार मामला किसी एक बिजनेस यूनिट या किसी खास फंक्शन की रीस्ट्रक्चरिंग तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि कंपनी की अलग-अलग टीमों को अपने कुल बजट को कम करने के लिए कहा गया है. इसका मतलब है कि अगर छंटनी की जाती है तो इसका असर सभी विभागों के कर्मचारियों पर पड़ेगा.
कितने लोगों की नौकरी जा सकती है, इसको लेकर अभी ठीक-ठीक पता नहीं चला है, लेकिन कर्मचारियों के बीच चल रही अटकलों के मुताबिक दुनियाभर में 7,000 से 10,000 नौकरियों पर असर पड़ सकता है. इसका असर भारत में काम कर रहे कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है, हालांकि इसकी चपेट में कितने कर्मचारी आएंगे, ये अभी पता नहीं चल पाया है.
कब तक छंटनी का ऐलान होगा
Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों के बीच पहले सितंबर की शुरुआत में छंटनी की चर्चा थी. माना जा रहा था कि 1 सितंबर को इसकी शुरुआत होगी. हालांकि, बाद की चर्चाओं में 15 सितंबर की तारीख का जिक्र हो रहा है. यानी इस वक्त छंटनी के साथ-साथ इसकी टाइमिंग को लेकर भी खबरें गर्म हैं. इस अनिश्चितता का असर खास तौर पर सीनियर कर्मचारियों और ऊंची सैलरी वाले कर्मचारियों पर ज्यादा पड़ रहा है.
21,000 छंटनी पहले ही कर चुका है
ये पहली बार नहीं है जब Oracle अपने वर्कफोर्स में इतनी बड़ी छंटनी करने की तैयारी कर रहा है. कंपनी ने आधिकारिक तौर पर बताया था कि 31 मई को खत्म हुए 12 महीनों के दौरान उसने करीब 21,000 नौकरियां खत्म की हैं. इसके बाद Oracle का ग्लोबल वर्कफोर्स करीब 13% घटकर लगभग 1.41 लाख कर्मचारियों का रह गया.
हालांकि, कुछ दूसरी रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस रीस्ट्रक्चरिंग का असर इससे कहीं ज्यादा था. कुछ अनुमान ये बताते हैं कि करीब 30,000 नौकरियां इस छंटनी में प्रभावित हुईं थीं. ऐसे में एक और छंटनी का राउंड कर्मचारियों के लिए चिंता बढ़ाने वाला हो सकता है.
क्या है छंटनी की वजह
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, आमतौर पर छंटनी किसी खास बिज़नेस यूनिट की रीस्ट्रक्चरिंग से जुड़ी होती है, लेकिन इस बार मामला अलग है. आमतौर पर किसी खास बिजनेस यूनिट को रीस्ट्रक्चर करते समय कर्मचारियों को अंदाजा हो जाता है कि किन टीमों पर असर पड़ सकता है, लेकिन इस मामले में अलग-अलग टीमों के मैनेजर्स को अपना बजट कम करने के लिए कहा गया है.
इससे कर्मचारियों के लिए ये पता लगाना मुश्किल हो गया है कि किस फंक्शन या किन लोगों पर असर पड़ेगा. यहां तक कि मैनेजरों को भी कर्मचारियों की पूरी लिस्ट या छंटनी की सही टाइमिंग की पूरी जानकारी नहीं होने की बात कही जा रही है, जिससे इसका पहले से पता लगाना और मुश्किल हो जाता है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछली पुनर्गठन प्रक्रियाओं में प्रभावित कर्मचारियों को टर्मिनेशन के आसपास स्लैक जैसे इंटरनल कम्युनिकेशन चैनलों से हटा दिया गया था.
भारत के कर्मचारियों पर बड़ा असर?
भारत, ओरेकल के ग्लोबल वर्कफोर्स का एक अहम हिस्सा बन चुका है, जहां कंपनी की बड़ी इंजीनियरिंग, क्लाउड, सपोर्ट और अन्य टेक्नोलॉजी टीमें मौजूद हैं. ऐसे में अगर इतने बड़े पैमाने पर छंटनी होती है, तो इसका भारत में कर्मचारियों पर काफी बड़ा असर पड़ सकता है.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, ओरेकल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारी निवेश जारी रखते हुए भी कॉस्ट मैनेजमेंट और अपने वर्कफोर्स को बदलती बिज़नेस प्राथमिकताओं के मुताबिक ढालने की कोशिश कर रहा है. कंपनी ने अभी तक इस होने वाली छंटनी की घोषणा नहीं की है.
एक बात और ध्यान देने वाली है कि इस छंटनी की चर्चा ओरेकल के 11 सितंबर को आने वाले तिमाही नतीजों से ठीक पहले हो रही है, जिस वजह से इस पर बाजार और कर्मचारियों, दोनों की नजरें टिकी हुई हैं.
