रुपये को और कमज़ोर होने से बचाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की कोशिशों का असर दिखने लगा है. गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को भारतीय रुपया 67 पैसे मजबूत हो गया, जो कि जून के बाद एक दिन में सबसे बड़ा उछाल है. इस उछाल के साथ ही रुपया दो महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया है. डॉलर के मुकाबले रुपया 3 सितंबर को 67 पैसे की मजबूती के साथ 94.2713 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया, रुपये पिछली ट्रेडिंग में 94.97 पर बंद हुआ था.
रुपया अचानक मजबूत क्यों हुआ?
रुपये में आई इस मज़बूती की सबसे बड़ी वजह बना FCNR-B डिपॉजिट यानी कि Foreign Currency Non-Resident (Bank) Account. आसान भाषा में समझें तो विदेशों में रहने वाले भारतीय इन खातों के जरिए भारत के बैंकों में विदेशी मुद्रा जमा कर सकते हैं.
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार देर रात बताया कि 31 अगस्त को ये योजना बंद होने तक तीन महीने से भी कम समय में बैंकों ने FCNR (B) डिपॉजिट्स के जरिए करीब 127 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई है. जबकि बाजार को इसकी उम्मीद काफी कम थी.
बाजार का अनुमान था कि FCNR-B के जरिए करीब 90 बिलियन डॉलर आएंगे, लेकिन असल आंकड़ा 127 बिलियन डॉलर से ज्यादा रहा, यानी कि यानी बाजार की उम्मीद से लगभग 37 बिलियन डॉलर ज्यादा. इसके अलावा एक्टर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECB) और विदेशों से लिए गए फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स को भी जोड़ें तो कुल इनफ्लो करीब 136 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया.
खास बात ये है कि ये आंकड़ा RBI की पिछली उम्मीद से भी काफी ज्यादा है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले महीने करीब 80 बिलियन डॉलर के इनफ्लो का अनुमान जताया था. जबकि असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा आया है. बाजार के लिए ये बड़ा पॉजिटिव सरप्राइज है. विदेशी मुद्रा की इतनी बड़ी आमद से भारत में डॉलर की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती मिली है.
RBI ने क्या किया, जिससे डिपॉजिट बढ़ा
पहले ये समझिए कि FCNR (B) अकाउंट है क्या, इसे कौन रखता है और क्यों रखता है. ये अकाउंट खासतौर पर NRI यानी ऐसे भारतीय जो विदेशों में रहते हैं, उनके लिए एक टर्म डिपॉज़िट या फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम है, जिसे RBI रेगुलेट करता है.
इस अकाउंट के कई फायदे हैं-
1- करेंसी रिस्क नहीं होता
आमतौर पर NRE अकाउंट में जब कोई NRI पैसे डालता है तो पहले वो डॉलर से रुपये में कन्वर्ट किया जाता है. फिर डिपॉजिट होता है. इससे करेंसी रिस्क का जोखिम रहता है. जैसे मान लीजिए कि किसी NRI ने 1 लाख डॉलर भारत के अपने सामान्य अकाउंट में डिपॉजिट किए, तब डॉलर के मुकाबले रुपया 95 पर था, मतलब 95 लाख रुपये जमा किए, मगर कुछ साल के बाद उसने डिपॉजिट निकाला और रुपया मजबूत होकर 90 पर आ गया, तो उसका डिपॉजिट घटकर 90 लाख हो गया. मगर FCNR (B) अकाउंट में पैसा रुपये में कन्वर्ट करके नहीं डाला जाता है, वो सीधा डॉलर में ही डिपॉजिट होता है और डॉलर में ही निकासी होती है. यानी करेंसी रिस्क नहीं होता है.
2- ब्याज डॉलर में ही मिलता है
FCNR-B डिपॉजिट पर बैंक विदेशी मुद्रा में ही फिक्स्ड ब्याज देते हैं, जैसे कि आमतौर पर हमें FD पर मिलता है. यानी NRI को डॉलर जमा रखने पर डॉलर में ब्याज मिलता है. अगर किसी समय भारतीय बैंक FCNR-B पर अमेरिका या दूसरे देशों के मुकाबले आकर्षक ब्याज दर दे रहे हैं तो NRI के लिए भारत में डॉलर जमा करना और भी फायदेमंद हो जाता है.
RBI ने कैसे FCNR (B) डिपॉजिट को आकर्षक बनाया
इस बार रिकॉर्ड FCNR (B) डिपॉजिट आने की सबसे बड़ी वजह थी कि रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए NRI से डिपॉजिट जुटाना आसान बना दिया. पहले बैंक NRI से डिपॉजिट तो लेकर आ जाते थे, लेकिन बैंकों को अपना करेंसी रिस्क मैनेज करना पड़ता था. इसके लिए उसे मार्केट में डॉलर-रुपये की हेजिंग करनी पड़ती थी. जिसकी एक लागत होती थी. इस हेजिंग लागत को कम करने के लिए RBI ने बैंकों के लिए स्पेशल ‘स्वैप फैसिलिटी’ दी.
इस स्वैप फैसिलिटी में बैंक NRI से FCNR-B के जरिए डॉलर जुटाते और उन डॉलर को RBI के साथ रुपये में ‘स्वैप’ करके अपनी करेंसी हेजिंग लागत को कम करते. इसका मकसद भारत में ज्यादा विदेशी मुद्रा लाना और रुपये को सहारा देना था. इसका फायदा ये हुआ कि कई बैंकों ने NRI ग्राहकों को FCNR-B पर आकर्षक ब्याज दरें देना शुरू कर दिया.
कई बैंकों ने FCNR-B पर 6–7% तक के आकर्षक ब्याज दरें ऑफर की. ICICI Bank ने बड़े FCNR-B डिपॉजिट्स पर 6.25% तक की दर ऑफर की थी. ज्यादा ब्याज मिला तो NRI ने डिपॉजिट भी बढ़ाना शुरू कर दिया. ICICI Bank ने 2 सितंबर को बताया कि उसने FCNR-B डिपॉजिट स्कीम के तहत 17.88 बिलियन डॉलर जुटाए हैं. इसके साथ ही ICICI Bank उन शुरुआती बैंकों में शामिल हो गया है, जिन्होंने इस योजना के तहत जुटाई गई कुल रकम का खुलासा किया है.
इससे रुपया कैसे मज़बूत हुआ
इसको समझना बहुत जरूरी है. RBI को जब भी गिरते रुपये को सहारा देना होता है तो वो डॉलर को मार्केट में बेचना शुरू कर देता है, ताकि डॉलर की सप्लाई बढ़ जाए और उसकी वैल्यू गिरे जिससे रुपया मजबूत हो. 127 बिलियन डॉलर का FCNR (B) डिपॉजिट आने का मतलब ये नहीं है कि रिजर्व बैंक ने ये पूरा पैसा डॉलर के रूप में बाजार में उड़ेल दिया है और रुपया चढ़ गया, बल्कि इसकी सेंटीमेंटल वैल्यू है.
वो ये कि मार्केट को ये लगता है कि RBI के पास अब फॉरेन रिजर्व के रूप में ज्यादा डॉलर मौजूद है, वो रुपये की अब ज्यादा बेहतर तरीके से रक्षा कर सकता है. यानी इस वक्त जो डिपॉजिट आया है, वो एक ऐसे हथियार की तरह है, जो RBI के पास है, लेकिन उसने अभी इसका इस्तेमाल नहीं किया है. मगर, सेंटीमेंट्स पॉजिटिव हो गये हैं.
इस पूरी कहानी एक सरप्राइज ये भी था कि मार्केट को इतने बड़े डिपॉजिट की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि पिछली बार साल 2013 में जब FCNR (B) स्कीम आई थी, तब डिपॉजिट सिर्फ 26 बिलियन डॉलर आए थे. उसके मुकाबले इस बार तो करीब 5 गुना डिपॉजिट्स आए हैं.

