NPS सब्सक्राइबर्स के लिए बड़ी खबर! PFRDA ने प्रस्तावित किए 10 बड़े बदलाव, जानिए पूरी डिटेल

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PFRDA Proposes 10 Major Changes to NPS Rules: What It Means for Subscribers

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़ना, इसमें अकाउंट खोलना, इसकी सेवाएं लेना अब पहले से भी ज्यादा आसान होने जा रहा है. पेंशन रेगुलेटर PFRDA ने NPS से जुड़ी सेवाएं देने वाले Points of Presence यानी PoP के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. ये बदलाव उन लोगों के लिए अहम हो सकते हैं, जो अभी ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां NPS की सेवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं.

PoP के लिए बड़े बदलावों की तैयारी

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के नियमों में बदलाव का मकसद PoP का नेटवर्क बढ़ाना, डिजिटल तरीके से NPS ऑनबोर्डिंग और सर्विसिंग को आसान बनाना और सब्सक्राइबर्स की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को बेहतर करना है. इन बदलावों से NPS की पहुंच बढ़ाने और इसे ज्यादा डिजिटल फ्रेंडली बनाने की तैयारी है.

PoP यानी “Points of Presence” वे संस्थाएं होती हैं, जो लोगों को NPS में शामिल कराने और उससे जुड़ी सेवाएं देने का काम करती हैं. जैसे बैंक, पोस्ट ऑफिस, वित्तीय संस्थान वगैरह.

हालांकि, अभी इन बदलावों को लागू नहीं किया गया है. PFRDA ने इन प्रस्तावों पर लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं. सुझाव देने की आखिरी तारीख 2 अक्टूबर 2026 है. इसके बाद मिले सुझावों के आधार पर अंतिम नियम जारी किए जाएंगे.

अब समझते हैं कि PFRDA ने PoP के नियमों में कौन-कौन से बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है, और इनका NPS सब्सक्राइबर्स पर क्या असर होगा और किस तरह का फायदा मिल सकता है

1- NPS की सेवाओं के लिए दो तरह के PoP

PFRDA ने PoP (Points of Presence) को दो मॉडल में बांटने का प्रस्ताव दिया है. एक फिजिकल मोड और दूसरा है डिजिटल मोड. फिजिकल PoP मोड के जरिए ग्राहक शाखा या ऑफिस जाकर NPS की सेवाएं ले सकेंगे, जबकि डिजिटल PoP मोड का पूरा फोकस ऑनलाइन ऑनबोर्डिंग और सर्विसिंग पर होगा. इससे NPS में डिजिटल तरीके से जुड़ने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है.

2- PoP के लिए पात्रता का दायरा बढ़ाया गया

PFRDA ने PoP के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए पात्रता (eligibility) का दायरा और बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि अब पहले से ज़्यादा तरह की संस्थाएं PoP के रूप में शामिल हो सकें. इस फ्रेमवर्क में तीन तरह की संस्थाओं को शामिल किया जाएगा.

वित्तीय क्षेत्र के रेगुलेटर्स, जैसे- RBI, SEBI, IRDAI की ओर से रेगुलेटेड संस्थाएं
गैर-वित्तीय क्षेत्र के रेगुलेटर अथॉरिटी की ओर से रेगुलेट होने वाली संस्थाएं
सहकारी समितियां

इसके अलावा, खास तौर पर डिजिटल-मोड PoP के लिए, कुछ शर्तों के साथ इन्हें भी शामिल किया गया है.

  • लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP)
  • सोसाइटी या एसोसिएशन
  • ट्रस्ट

यानी अब सिर्फ बैंक या बड़ी वित्तीय संस्थाएं ही नहीं, बल्कि छोटे और अलग तरह के संगठन भी PoP बनने के योग्य हो सकेंगे.

3- डिजिटल PoP के लिए आवेदन फीस नहीं

फिजिकल और डिजिटल PoP के लिए अलग-अलग आवेदन प्रक्रिया होगी. फिजिकल मोड के लिए एप्लीकेशन फीस को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का प्रस्ताव है. वहीं डिजिटल मोड के PoP के लिए कोई एप्लीकेशन फीस नहीं होगी.

4- अलग डिजिटल कलेक्शन अकाउंट

डिजिटल मोड के जरिए NPS ऑनबोर्डिंग करने वाले PoP को हर एक पेंशन स्कीम के लिए अलग डिजिटल कलेक्शन अकाउंट रखना होगा. इससे डिजिटल मोड से आने वाले फंड्स को अलग तरीके से ट्रैक और मैनेज किया जा सकेगा. जो PoP ऑफलाइन तरीके से काम करेगा, उसके लिए पुराना नियम ही चलता रहेगा, यानी हर स्कीम का अपना अलग खाता होगा, जैसा पहले से होता आया है.

5- पेंशन एजेंट अब कहलाएगा NPS Mitra

पेंशन रेगुलेटर PFRDA ने “Pension Agent” शब्द की जगह अब “NPS Mitra” नाम इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है. इस नई परिभाषा के तहत वे सभी लोग आएंगे जिन्हें कोई PoP एक एग्रीमेंट के तहत NPS या PFRDA की ओर से रेगुलेट किसी भी अन्य स्कीम को बढ़ावा देने और बांटने के काम पर रखता है.

इसमें ये लोग शामिल होंगे-

  • बैंकों के बिज़नेस करेस्पॉन्डेंट या कॉर्पोरेट बिज़नेस करेस्पॉन्डेंट
  • इंश्योरेंस एजेंट
  • AMFI में रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर
  • लोग जिन्हें PFRDA अलग से मंजूरी देगा

6- NPS Mitras के लिए PoP ही जिम्मेदार होंगे

प्रस्तावित ड्राफ्ट के मुताबिक, NPS Mitra की पूरी जिम्मेदारी PoP की होगी. इसमें जो जिम्मेदारियां शामिल हैं-

  • KYC, AML और CFT से जुड़े नियमों का पालन कराना
  • NPS Mitras की गतिविधियों पर नज़र रखना और उनकी निगरानी करना
  • उन्हें पेंशन स्कीम्स की जानकारी और ट्रेनिंग देना

साथ ही, ड्राफ्ट में ये भी कहा गया है कि PoP, NPS Mitras को सिर्फ पेंशन स्कीम्स को बांटने का ही काम दिया जा सकता है, जो कि नियमों में तय किया गया है, उससे ज़्यादा कोई काम नहीं दे सकते हैं.

7- सब्सक्राइबर को हर्जाना

प्रस्तावित संशोधनों में ये नियम पहले जैसा ही बरकरार रखा गया है कि अगर PoP या उसके NPS Mitra की धोखाधड़ी या लापरवाही के कारण सब्सक्राइबर को नुकसान हुआ है, और ये साबित हो जाता है, तो PoP को उस नुकसान की भरपाई करनी होगी. इसके अलावा, PoP के कर्मचारी, NPS Mitra या कोई भी दूसरा व्यक्ति जिसकी सेवाएं PoP ने ली हैं, उनके किसी भी काम या चूक के लिए भी PoP ही जिम्मेदार बना रहेगा, जैसा कि प्रस्तावित नियमों में बताया गया है.

8- NPS Mitra के लिए कड़े नियम

प्रस्तावित ड्राफ्ट में ये भी कहा गया है कि PoP और NPS Mitra को कुछ आचरण मानकों (conduct standards) का पालन करना होगा. जैसे कि हितों के टकराव से बचना,
सब्सक्राइबर्स को अपडेटेड जानकारी देना, गुमराह करने वाले या अभद्र व्यवहार से दूर रहना. PoP को अपने सभी NPS Mitras का पूरा ब्यौरा रखना होगा और इसे अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से पब्लिश भी करना होगा.

9- अब लगेगी सालाना फीस

PoP के लिए मौजूदा पांच साल के रिन्यूअल सिस्टम को हटाकर, अब हर साल फीस देने की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है. ये सालाना फीस, पिछले वित्तीय वर्ष में PoP ने NPS और अन्य पेंशन स्कीम्स से जो कमीशन कमाया है, उसका 1% रखने का प्रस्ताव है, लेकिन ये फीस कम से कम ₹3,000 सालाना तो देनी ही होगी. PoP को यह फीस हर वित्तीय वर्ष खत्म होने के 60 दिनों के भीतर जमा करानी होगी.

10- बदलावों की जानकारी 7 दिन में देनी होगी

अगर PoP की ओर से पहले PFRDA को दी गई जानकारी में कोई बड़ा बदलाव होता है और उस बदलाव से उनके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर बुरा असर पड़ सकता है, तो PoP को इसकी जानकारी सात दिनों के भीतर PFRDA को देनी होगी.

डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल पूरी तरह जानकारी देने के मकसद से लिखा गया है, इसे निवेश सलाह न समझा जाए. निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले निवेशकों को खुद रिसर्च करनी चाहिए या किसी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से सलाह लेनी चाहिए.

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