नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के IPO को मार्केट रेगुलेटर SEBI ने मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के बाद NSE के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये के IPO को लाने का रास्ता साफ हो गया है. ये IPO भारत के शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े पब्लिक इश्यू में से एक होगा.
SEBI से मिली हरी झंडी
मार्केट रेगुलेटर SEBI के मुताबिक NSE को 4 सितंबर को SEBI की अंतिम टिप्पणियां (Final Observations) मिल गई हैं. NSE ने प्रस्तावित IPO के लिए जून 2026 में SEBI के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल किया था.
SEBI की ऑब्जर्वेशन मिलना IPO प्रक्रिया में एक अहम कदम माना जाता है. इसके बाद कंपनी लागू रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करते हुए पब्लिक इश्यू की आगे की तैयारियां कर सकती है. SEBI की मंजूरी NSE के लिए एक बड़ा कदम है. एक्सचेंज की लिस्टिंग की योजना करीब एक दशक से रेगुलेटरी दिक्कतों की वजह से अटकी पड़ी थी. इनमें NSE का चर्चित को-लोकेशन विवाद भी शामिल था.
सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिली राहत
मगर, NSE IPO के रास्ते में ये सबसे बड़ी दिक्कत हट गई है. 3 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने NSE से जुड़े को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में SEBI की अपीलों को खारिज कर दिया. इससे NSE के लंबे समय से अटके IPO के लिए एक बहुत बड़ी कानूनी रुकावट भी खत्म हो गई. उसके बाद ही NSE की ओर से IPO को हरी झंडी मिली है.
इससे ठीक पहले NSE ने SEBI के साथ रेगुलेटरी मामलों के सेटलमेंट के लिए कुल ₹1,491.21 करोड़ की रकम से जुड़े सेटलमेंट प्रोसेस को पूरा किया था. जुलाई में NSE ने इसकी आखिरी किस्त करीब ₹714.74 करोड़ SEBI को चुकाई थी.
पूरी तरह OFS होगा NSE IPO
NSE ने इस साल जून में SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया था. ये IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS होगा. IPO में कोई फ्रेश इश्यू कंपोनेंट नहीं है, यानी NSE नए शेयर जारी करके पैसा नहीं जुटा रहा है. DRHP के मुताबिक, IPO में अधिकतम 14.89 करोड़ NSE शेयरों को बिक्री के लिए रखा जाएगा. ये NSE की पेड अप इक्विटी कैपिटल का करीब 6% हिस्सा है. चूंकि ये पूरी तरह से OFS है, इसलिए IPO से मिलने वाला पैसा NSE के पास नहीं जाएगा. शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरहोल्डर्स को IPO से मिला पैसा मिलेगा.
आगे क्या होगा
रेगुलेटरी मंज़ूरी मिलने के बाद अब NSE अपडेटेड ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) दाखिल कर सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक प्राइस बैंड की घोषणा सितंबर के दूसरे हफ्ते में हो सकती है, और लिस्टिंग सितंबर के आखिर तक होने की उम्मीद है.
CNBC-TV18 ने मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया है कि NSE 11 सितंबर को अपने IPO के प्राइस बैंड का ऐलान कर सकता है. इसके अलावा एक्सचेंज का मैनेजमेंट 25 सितंबर को शेयर बाजार में NSE की लिस्टिंग को लक्ष्य लेकर चल रहा है.
शेयर बिक्री की जिम्मेदारी करीब 20 इन्वेस्टमेंट बैंकों को सौंपी गई है, जिनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, JM फाइनेंशियल, मॉर्गन स्टेनली, HSBC और सिटीग्रुप जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

