NPS Calculation: रिटायरमेंट पर चाहिए 1 लाख की पेंशन! तो हर महीने कितना करना होगा निवेश

sureofficialmedia_admin
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Want Rs 1 Lakh Pension Post-Retirement? This Is How Much You Need to Invest Monthly in NPS

अगर नौकरी के शुरुआती सालों में ही अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग कर ली जाए तो बुढ़ापा बेफिक्री और सुकून से गुजर सकता है. क्योंकि रिटायरमेंट के बाद इनकम का कोई ज़रिया नहीं होता, मगर खर्चे तो रहते ही हैं. इसलिए पैसों के लिए किसी के ऊपर निर्भर रहने से बेहतर है कि कुछ ऐसा कर लिया जाए कि रिटायरमेंट के बाद एक तय रकम पेंशन के तौर पर हर महीने खाते में आती रहे. इसके लिए कई विकल्प मौजूद हैं. इन्हीं में से एक ऑप्शन है NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम.

30 साल की उम्र और 1 लाख की पेंशन

वैसे तो कोशिश ये होनी चाहिए कि आप नौकरी लगने के बाद ही NPS के जरिए रिटायरमेंट के लिए पैसे जोड़ना शुरू कर दें. मगर ज्यादातर ऐसा देखा गया है कि लोग एक उम्र के बाद ही इस बारे में सोचना शुरू करते हैं.

फिर भी मान लीजिए कि आपने 30 साल की उम्र में NPS में निवेश शुरू करते हैं, और आप चाहते हैं कि जब आप 60 साल के हों तो आपके खाते में 1 लाख रुपये महीना पेंशन के तौर पर आए. तो सवाल ये है कि इसके लिए आपको आज हर महीने कितना निवेश करना होगा?

देखिए, इसके लिए तो पहले ये तय करना होगा कि रिटायरमेंट पर कॉर्पस का कितना हिस्सा एन्युटी में जाएगा. PFRDA के मौजूदा नियमों के मुताबिक सामान्य एग्जिट पर कम-से-कम 40% पैसा एन्युटी में लगाना होता है और अधिकतम 60% एकमुश्त निकाला जा सकता है.

NPS से मंथली पेंशन 1 लाख रुपये चाहिए. अगर हम एक साफ कैलकुलेशन के लिए मान लें कि

40% एन्युटी में डालेंगे
माना 6% एन्युटी रेट है
माना NPS पर रिटर्न 10% है
आपकी उम्र: 30 साल
निवेश की अवधि: 30 साल

स्टेप 1
कितना एन्युटी कॉर्पस चाहिए
₹1 लाख महीना = ₹12 लाख सालाना पेंशन
एन्युटी कॉर्पस = वार्षिक पेंशन ÷ एन्युटी रेट = 12,00,000 ÷ 6% = ₹2,00,00,000 (2 करोड़)

स्टेप 2
कुल रिटायरमेंट कॉर्पस कितना चाहिए
चूंकि ये 2 करोड़ रुपये कुल कॉर्पस का 40% हिस्सा है
कुल कॉर्पस होगा = ₹5,00,00,000 (5 करोड़)

स्टेप 3
हर महीने कितना निवेश करना होगा

10% सालाना रिटर्न मानकर, 30 साल तक एक तय रकम हर महीने डालने पर ₹5 करोड़ के कॉर्पस तक पहुंचने के लिए ज़रूरत होगी, वो रकम है 22,150 रुपये.

हर महीने 22,150 रुपये निवेश करने पर ये कैलकुलेशन होगा

कुल निवेश: ₹79,74,000
रिटर्न मिला: ₹4.20 करोड़
मैच्योरिटी अमाउंट: ₹5 करोड़
एन्युटी में निवेश: ₹2 करोड़

यानी इस कैलकुलेशन के हिसाब से ₹22,150/महीना की NPS निवेश से 30 साल बाद ₹1 लाख/महीने पेंशन + ₹3 करोड़ एकमुश्त रकम मिलती है.

NPS में टैक्स बेनिफिट्स

NPS में किया गया निवेश टैक्स बचाने के लिहाज से भी फायदेमंद है. सेक्शन 80CCD(1) के तहत ये निवेश टैक्स छूट के दायरे में आता है, जो सेक्शन 80CCE की कुल 1.5 लाख रुपये की सीमा के भीतर गिना जाता है. यानी यह छूट 80C के तहत मिलने वाली छूट के साथ ही जुड़ी होती है, अलग से नहीं.

इसके अलावा, NPS की एक खासियत यह भी है कि टियर I अकाउंट में किए गए निवेश पर सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये तक की विशेष छूट अलग से क्लेम की जा सकती है. ये छूट 1.5 लाख रुपये की सीमा से बाहर होती है, यानी कुल मिलाकर एक सब्सक्राइबर 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का फायदा उठा सकता है.जो इसे बाकी टैक्स-सेविंग विकल्पों के मुकाबले आकर्षक बनाता है.

इसके अलावा, कोई व्यक्ति चाहे तो NPS वात्सल्य स्कीम में भी योगदान कर सकता है. हालांकि इस पर भी सेक्शन 80CCD(1) और 80CCD(1B) की सामान्य सीमाएं ही लागू होती हैं, फिर भी NPS का टैक्स-फ्रेंडली ढांचा असरदार वित्तीय योजना बनाने में मदद करता है. खासकर उन लोगों के लिए जो ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं.

उदाहरण

मान लीजिए आपने दूसरे टैक्स-सेविंग निवेशों के जरिए सेक्शन 80C की 1.5 लाख रुपये की पूरी सीमा पहले ही इस्तेमाल कर ली है. अगर इसके बाद आप अपने टियर I NPS अकाउंट में 60,000 रुपये का निजी योगदान करते हैं, या NPS वात्सल्य में योगदान करते हैं, तो सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट अलग से क्लेम कर सकते हैं, जिससे आपकी टैक्सेबल इनकम और कम हो जाती है.

हालांकि बच्चे के अकाउंट में किए गए योगदान पर अलग से कोई अतिरिक्त छूट नहीं मिलती, फिर भी NPS के टैक्स-फ्रेंडली ढांचे का फायदा मिलता रहता है. कुल मिलाकर पुराने टैक्स रीजीम में NPS योगदान से मिलने वाली छूट को 2 लाख रुपये तक ले जाया जा सकता है.

एम्प्लॉयर के योगदान से मिलती है अतिरिक्त टैक्स छूट

NPS का एक और टैक्स फायदा एम्प्लॉयर की ओर से आपके टियर I NPS अकाउंट में किए गए योगदान पर मिलता है, जो सेक्शन 80CCD(2) के तहत आता है. ध्यान देने वाली बात ये है कि ये छूट सिर्फ पुराने टैक्स रीजीम तक सीमित नहीं है. ये पुराने और नए, दोनों टैक्स रीजीम में है. एम्प्लॉयर का यह योगदान पहले आपकी इनकम में जोड़ा जाता है, लेकिन उसके बदले आपको इस पर छूट क्लेम करने का अधिकार मिलता है.

इस छूट की सीमा रीजीम और एम्प्लॉयर पर निर्भर करती है. पुराने रीजीम में सरकारी कर्मचारियों के लिए सीमा सैलरी (बेसिक + महंगाई भत्ता) का 14% है, जबकि गैर-सरकारी यानी प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के लिए ये सीमा 10% तक है.

वहीं नए टैक्स रीजीम में ये सीमा सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह के कर्मचारियों के लिए एक समान 14% कर दी गई है. यानी नए रीजीम में प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों को इस मामले में पुराने रीजीम के मुकाबले ज्यादा फायदा मिलता है. इस छूट पर कोई तय रकम की सीमा नहीं है, यह पूरी तरह सैलरी के प्रतिशत पर आधारित है.

उदाहरण

मान लीजिए आप एक गैर-सरकारी यानी प्राइवेट सेक्टर कर्मचारी हैं, और आपकी सालाना सैलरी 12 लाख रुपये है. आपका एम्प्लॉयर आपकी सैलरी का 10% यानी 1.2 लाख रुपये, आपके टियर I NPS अकाउंट में जमा करता है.

ये पूरा 1.2 लाख रुपये सेक्शन 80CCD(2) के तहत नॉन-टैक्सेबल है, और सबसे अच्छी बात ये है कि ये छूट, सेक्शन 80C और सेक्शन 80CCD(1B) के तहत आपको मिलने वाली टैक्स छूट से अलग मिलती है.

यानी अगर आपने पहले ही 80C के तहत 1.5 लाख रुपये और 80CCD(1B) के तहत 50,000 रुपये की छूट क्लेम कर ली है, तो भी एम्प्लॉयर के इस 1.2 लाख रुपये के योगदान पर मिलने वाली छूट अलग से जुड़ जाएगी. इस तरह आपकी कुल टैक्स छूट और भी बढ़ जाती है, बिना आपकी अपनी जेब से एक रुपया अलग से खर्च किए.

इसके अलावा, NPS से 60% तक एकमुश्त रकम निकालने पर भी कोई टैक्स नहीं देना होता है. बची रकम से खरीदी गई एन्युटी लेने पर तत्काल टैक्स नहीं लगता, लेकिन बाद में मिलने वाली पेंशन टैक्सेबल होती है.

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है, और इसे निवेश या टैक्स सलाह नहीं माना जाना चाहिए. सभी कैलकुलेशन और उदाहरण केवल समझाने के मकसद से बनाए गए काल्पनिक उदाहरण हैं, और इन्हें वास्तविक रिटर्न या टैक्स बचत की गारंटी के तौर पर न लें. असल रिटर्न बाजार की स्थितियों, चुने गए फंड मैनेजर और एसेट एलोकेशन पर निर्भर करते हैं. निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने या टैक्स प्लानिंग करने से पहले कृपया किसी योग्य वित्तीय सलाहकार, चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें, ताकि आपकी व्यक्तिगत आय, टैक्स स्लैब और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से सही मार्गदर्शन मिल सके.

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