अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के फैसलों की मार एक बार IT कंपनियों पर दिखी है. बुधवार को IT शेयरों में भारी गिरावट है. Coforge, Tech Mahindra, Mphasis, Infosys, TCS एक लाइन से सभी शेयर बाजार खुलते ही औंधे मुंह गिर गए. निफ्टी IT करीब 4% तक टूट गया.
इस गिरावट में सबसे आगे कोफोर्ज है, जो 5% से ज्यादा टूट गया, हालांकि कोफोर्ज के गिरने की एक और वजह भी है. इसके बाद इंफोसिस करीब 5% टूटा. TCS, Persistent Systems, HCL Tech, टेक महिंद्रा भी 3% से ज्यादा टूटे. Mphasis, Wipro और LTIMindtree के शेयर करीब 2% नीचे आए. इस गिरावट के चलते IT शेयरों ने संयुक्त रूप से 55,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा दिए.
IT शेयरों में क्यों आई गिरावट
IT शेयरों में आज हुई इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह है कि अमेरिकी सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ लेबर ने Cognizant की PERM यानी Permanent Labour Certification प्रक्रिया के तहत दाखिल की गई फाइलिंग को निलंबित कर दिया है. Cognizant Technology अमेरिका में नैस्डैक पर लिस्टेड है.
क्या है PERM प्रक्रिया?
PERM अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी और आगे चलकर एम्प्लॉयमेंट बेस्ड ग्रीन कार्ड दिलाने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है. कंपनियां इस प्रक्रिया के जरिए विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में स्थायी रूप से काम करने के लिए स्पॉन्सर करती हैं.
अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डेस्पोसिटो (Anthony D’Esposito) ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि Cognizant की PERM फाइलिंग को निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
ये कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी प्रशासन वीजा फ्रॉड और विदेशी कर्मचारियों से जुड़ी अनियमितताओं के खिलाफ जांच तेज कर रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने Cognizant के खिलाफ लगे कथित आरोपों की पूरी जानकारी नहीं दी है. ये भी नहीं बताया गया है कि कितनी फाइलिंग इससे प्रभावित हुई हैं और सस्पेंशन कितने समय तक रहेगा.
एक और कंपनी पर भी कार्रवाई
Cognizant के अलावा एक और कंपनी Cloudera की PERM फाइलिंग भी सस्पेंड कर दी गई है. हालांकि एंथनी डेस्पोसिटी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इन दोनों कंपनियों के खिलाफ किसी आपराधिक मामले या क्रिमिनल चार्ज का जिक्र नहीं है. दोनों कंपनियों की तरफ से भी इस मामले में तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
Cognizant की नौकरियां बढ़ाने की योजना थी
अमेरिकी सरकार की इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले Cognizant ने अमेरिका में अपनी वर्कफोर्स को बढ़ाने का ऐलान किया था. कंपनी ने कहा था कि वो 1,500 अमेरिकी कॉलेज ग्रेजुएट्स की भर्ती करेगी. इसके अलावा कंपनी अपने फ्रंटियर सर्टिफाइड इंजीनियर और फ्रंटियर बिजनेस ऑपरेटर कार्यक्रमों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 15,000 करने की योजना बना रही है.
Cognizant के CEO रवि कुमार एस ने कहा कि कंपनी अमेरिकी ग्रेजुएट्स को नौकरी दे रही है और AI के दौर के लिए नई तरह की नौकरियां तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि कंपनी का मानना है कि AI जितनी नौकरियां खत्म करेगा, उससे कहीं ज्यादा नई नौकरियां पैदा करेगा. इससे अमेरिकी कर्मचारियों को ज्यादा सैलरी, ज्यादा जिम्मेदारी और ज्यादा वैल्यू मिल सकती है.
मगर, PERM फाइलिंग पर अमेरिकी सरकार की कार्रवाई ने भारतीय IT कंपनियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है, हालांकि, अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि Cognizant पर इस कार्रवाई का असर कितना बड़ा होगा या क्या ऐसी कार्रवाई दूसरी IT कंपनियों तक भी पहुंच सकती है.
Coforge पर दोहरी मार?
IT कंपनी Coforge सबसे ज्यादा इसलिए भी टूटा क्योंकि इस पर दोहरी मार पड़ी है, पहली तो Cognizant पर की गई कार्रवाई और पूरे IT स्पेस पर उसका असर. और दूसरी है कि कंपनी के चेयरमैन ओ पी भट्ट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. कंपनी ने बुधवार को बाजार खुलने से पहले स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी.
अब सवाल ये है कि उन्होंने आखिर इस्तीफा क्यों दिया? कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया (Board Evaluation Process) को लेकर चेयरमैन भट्ट और बोर्ड के बीच मतभेद सामने आए थे. भट्ट ने अपने रेजिग्नेशन लेटर में कहा कि बोर्ड की हालिया मूल्याकंन प्रक्रिया में उनके कुछ फैसलों को लेकर असहमति बनी हुई थी. उन्होंने कहा कि ऐसे में बोर्ड में बने रहना कंपनी के बोर्ड के प्रभावी तरीके से काम करने के लिए सही नहीं होगा. इसलिए उन्होंने अपने पद से हटने का फैसला किया.
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, Coforge के बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया की एक इंटरनल ऑडिट रिव्यू हुआ था. जिसमें बोर्ड मूल्यांकन रिपोर्ट और चेयरमपर्सन के प्रदर्शन से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियों के डिस्क्लोजर को लेकर चिंताएं सामने आईं थीं. इसके बाद Coforge के बोर्ड ने अपनी चिंताएं भट्ट के सामने रखीं और स्पष्टीकरण मांगा. भट्ट ने बोर्ड के सवालों का जवाब भी दिया. बोर्ड का अंतिम फैसला अभी आना बाकी थी, इसके पहले ही भट्ट ने इस्तीफा दे दिया.
Coforge के बोर्ड ने फिलहाल विवेक शर्मा को अंतरिम चेयरपर्सन नियुक्त किया है. वो कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं. वो 31 जनवरी 2027 तक अंतरिम चेयरपर्सन की जिम्मेदारी संभालेंगे.

