UPI चार्ज पर GST को लेकर कंफ्यूजन! NPCI ने पहली बार दी सफाई

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जब से UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वसूलने का ऐलान हुआ है, तब से कंफ्यूजन का बाज़ार गर्म है. MDR पर GST को लेकर भी कई तरह की बातें कही जा रही हैं. कहा ये जा रहा है कि 2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट्स पर 0.4% MDR लागू होगा. साथ ही, MDR पर 18% की दर से GST लगेगा. इस पर NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया है और स्थिति को साफ करने की कोशिश की है.

₹2,000 की पेमेंट तक कोई GST नहीं

अपनी सफाई में NPCI ने कहा है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये आशंका जताई गई थी कि MDR पर GST लगने से छोटे दुकानदारों की लागत बढ़ेगी और डिजिटल पेमेंट महंगा हो सकता है, मगर ऐसा नहीं है. NPCI का कहना है कि नई व्यवस्था में 2,000 रुपये तक के UPI मर्चेंट यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य रहेगा, यानी इस सीमा तक के पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा और इसलिए MDR पर GST का भी कोई सवाल नहीं है.

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, UPI के कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शंस में 96% से ज्यादा लेनदेन 2,000 रुपये तक के होते हैं, यानी UPI पर होने वाले मर्चेंट पेमेंट्स का बहुत बड़ा हिस्सा ऐसी सीमा में आता है, जहां MDR नहीं लगेगा.

इनपुट टैक्स क्रेडिट एडजस्ट होगा

NPCI का कहना है कि MDR पर दिया गया GST मर्चेंट के लिए अलग से टैक्स नहीं बनता. अगर किसी दुकानदार ने MDR पर GST चुकाया है, तो वो इस GST को अपनी बिक्री पर बनने वाले GST के खिलाफ इनपुट टैक्स क्रेडिट के तौर पर एडजस्ट कर सकता है.

इसे ऐसे समझिए कि मान लीजिए किसी दुकानदार को अपनी बिक्री पर ₹1,000 GST देना है. लेकिन MDR के तौर पर उसने पहले ही ₹100 GST चुकाया है. ऐसे में वो इस ₹100 को अपने ₹1,000 के GST में एडजस्ट कर सकता है और सरकार को ₹900 GST देना होगा. हालांकि, ये इनपुट टैक्स क्रेडिट तभी लिया जा सकता है जब मर्चेंट इसके लिए GST नियमों के तहत पात्र हो.

यहां पर एक बात साफ करना और जरूरी है कि GST प्रोडक्ट की कीमत के ऊपर नहीं बल्कि MDR के ऊपर लगाई जानी है. यानी अगर कोई चीज 5000 रुपये की है, उस पर MDR 0.4% की दर से लिया जाएगा, जो कि होगा 20 रुपये, इस पर 18% GST लगेगा जो कि होगा 3.60 रुपये. इस तरह MDR और उस पर GST मिलाकर कुल चार्ज 23.60 रुपये होगा.

छोटे दुकानदारों पर बोझ नहीं

इसके अलावा, जिन मर्चेंट्स को हर महीने UPI के जरिए ₹1 लाख तक की रकम मिलती है, उन्हें MDR से छूट दी गई है. यानी इन छोटे कारोबारियों के लिए MDR चुकाने का सवाल नहीं है और इसलिए MDR पर GST का भी कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. ऐसे में ये कहना कि MDR पर GST लगने से छोटे दुकानदारों की लागत बढ़ जाएगी, सही नहीं है. UPI के ज्यादातर ट्रांजैक्शंस और बड़ी संख्या में छोटे मर्चेंट्स इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे.

नई MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी. इसमें 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट्स पर MDR लागू होगा. सामान्य P2M ट्रांजैक्शन में MDR 0.4% होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है. कुछ खास कैटेगरी में फ्लैट MDR का प्रावधान है.

यानी नई व्यवस्था को समझते समय दो बातें अलग-अलग रखना जरूरी है, MDR और उस पर GST. MDR हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा और जहां MDR लागू होगा, वहां GST का भी इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए एडजस्टमेंट हो सकता है.

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