टाटा ग्रुप (Tata Group) में अब एक नया विवाद छिड़ गया है. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) के परिवार का TVS Motor Company से जुड़ा एक कारोबारी रिश्ता सामने आया है. ये जानकारी Mint की एक जांच में सामने आई है. खास बात ये है कि TVS Motor के चेयरमैन-एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन ने हाल ही में Tata Sons में चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल देने का समर्थन किया था.
Mint की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कारोबारी रिश्ते की जानकारी टाटा संस के बोर्ड को नहीं दी गई दी, ऐसे में ये Tata Code of Conduct के नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है. हालांकि, टाटा संस का कहना है कि चंद्रशेखरन के परिवार के सदस्यों के कंपनी गठन की जानकारी बोर्ड को दे दी गई थी.
कंपनी के मुताबिक, TVS Motor और Hanno One Warehousing के बीच हुए खास कारोबारी लेनदेन को अलग से बताने की जरूरत नहीं थी. जबकि, Tata Trusts का कहना है कि वेणु श्रीनिवासन ने उसे इस कारोबारी संबंध के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी. इस मामले ने Tata Group के शीर्ष स्तर पर चल रहे मतभेदों को और बढ़ा दिया है.
कारोबारी रिश्ते कैसे बने?
Mint की रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता और बेटे प्रणव Hanno One Warehousing Pvt Ltd के डायरेक्टर हैं. ये कंपनी मार्च 2025 में बनाई गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि Hanno One Warehousing में Hanno Infra LLP की 99.99% हिस्सेदारी है. इस LLP की ओर से ललिता चंद्रशेखरन ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि उनके बेटे प्रणव के नाम पर कंपनी का एक शेयर सीधे तौर पर है.
Hanno One के बनने के करीब तीन महीने बाद TVS Motor ने तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में 17 एकड़ जमीन कंपनी को लीज पर दी. इस जमीन पर वेयरहाउस बनाने की योजना है. इसके बाद नवंबर 2025 में Hanno One को HDFC Bank से 60 करोड़ रुपये का कंस्ट्रक्शन लोन देने का प्रस्ताव मिला. Mint के पास मौजूद टर्म शीट के मुताबिक, इस लोन के लिए कंपनी के लीज अधिकार और बनने वाली बिल्डिंग को सिक्योरिटी के तौर पर रखा जाना था.
ये वेयरहाउस करीब 3.3 लाख वर्ग फीट में बनाया जाएगा, इसकी अनुमानित लागत 106.3 करोड़ रुपये बताई गई थी. प्रोजेक्ट को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि, TVS Motor के साथ हुई लीज डील में जमीन का किराया कितना तय हुआ है, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है.
Tata Sons ने कहा- जानकारी दी गई
टाटा संस के प्रवक्ता के मुताबिक, Hanno One Warehousing को 10 मार्च 2025 को एन चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता और बेटे प्रणव ने शुरू किया था. इसके करीब एक महीने बाद, अप्रैल 2025 में इस कंपनी के गठन की जानकारी उन सभी कंपनियों को दे दी गई थी, जहां चंद्रशेखरन चेयरमैन के पद पर हैं.
Tata Sons का कहना है कि TVS Motor एक इंडिपेंडेंट लिस्टेड कंपनी है और Tata Group की कंपनियों के साथ उसका कोई कारोबारी संबंध नहीं है. इसलिए उसके मुताबिक, TVS Motor और चंद्रशेखरन के बेटे प्रणव से जुड़ी कंपनी के बीच हुए इस लेनदेन की जानकारी Tata Sons या दूसरी Tata कंपनियों को अलग से देने की जरूरत नहीं थी. Mint ने इस मामले पर TVS Motor और प्रणव चंद्रशेखरन से भी प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन दोनों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है.
Tata Trusts का अलग दावा
वहीं, Tata Trusts ने इस मामले में अलग बात कही है. उसने Mint को बताया कि वेणु श्रीनिवासन ने ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों को इस कारोबारी रिश्ते के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी. हालांकि, Tata Trusts ने यह भी कहा कि वो ये पुष्टि नहीं कर सकता कि इस बारे में Tata Sons के बोर्ड को कोई जानकारी दी गई थी या नहीं.
Tata Trusts के मुताबिक, अगर रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो वो मामले की प्रकृति और आगे की कार्रवाई का आकलन करेगा.
मामला इसलिए भी चर्चा में ज्यादा है क्योंकि 17 सितंबर को Tata Sons के चार डायरेक्टरों ने चंद्रशेखरन को एक और पांच साल का कार्यकाल देने के प्रस्ताव का समर्थन किया था. इनमें वेणु श्रीनिवासन भी शामिल थे, जिन्हें नोएल टाटा का करीबी माना जाता है. दूसरी ओर, Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था.
टाटा के कोड ऑफ कंडक्ट क्या हैं?
इस पूरे मामले में टाटा ग्रुप के कोड ऑफ कंडक्ट अहम हो जाता है. वेणु श्रीनिवासन Tata Trusts के वाइस-चेयरमैन होने के साथ-साथ Tata Sons की नॉमिनेशंस एंड रेमुनेरेशंस कमेटी (NRC) के सदस्य भी हैं. यही कमेटी एन चंद्रशेखरन के कामकाज और प्रदर्शन की समीक्षा करती है.
टाटा कोड ऑफ कंडक्ट के मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी के किसी फैसले से उसे खुद, उसके परिवार के किसी सदस्य या उसके करीबी व्यक्ति को किसी कारोबारी सौदे में अनुचित फायदा मिल सकता है, तो इसे Conflict of Interest या हितों का टकराव माना जा सकता है. कोड में ये भी कहा गया है कि कंपनी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर्स को ऐसे वास्तविक या संभावित Conflict of Interest की जानकारी बोर्ड को देनी होती है.
