NSE की एकदम फीकी लिस्टिंग; BSE पर 0.84% प्रीमियम के साथ 1,800 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट

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NSE की शेयर बाज़ार में एकदम फ्लैट लिस्टिंग हुई है. BSE पर इसका शेयर 15 रुपये यानी 0.84% प्रीमियम के साथ 1,800 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ है, जबकि इसका इश्यू प्राइस 1,785 रुपये प्रति शेयर था. ग्रे मार्केट में लिस्टिंग से ठीक पहले तक NSE IPO का प्रीमियम सिर्फ 38 रुपये दिखा रहा था यानी 2.13% का प्रीमियम, मगर लिस्टिंग GMP के भी नीचे हुई है.

लिस्टिंग के बाद दौड़ा NSE का शेयर

हालांकि लिस्टिंग के तुरंत बाद NSE के शेयरों में अच्छी तेज़ी देखने को मिली और ये 1,878 रुपये तक चला गया. मतलब ये कि भले ही लिस्टिंग उतनी दमदार नहीं रही, लेकिन उसके बाद इसमें जो जोरदार तेज़ी देखने को मिली है, इसने फीकी लिस्टिंग के दर्द को काफी हद तक कम किया है.

शेयरों की लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट कैप 4.62 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. इस इश्यू का प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये प्रति इक्विटी शेयर था. आज के बाद NSE भारत की दूसरी लिस्टेड स्टॉक एक्सचेंज बन गई, गौरतलब है कि NSE का मार्केट कैप BSE के मौजूदा 1.33 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप से काफ़ी ज़्यादा है.

IPO को मिला था दमदार रिस्पॉन्स

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) का 22,569 करोड़ रुपये का IPO, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा IPO है, 21 सितंबर को बंद हुआ ये इश्यू 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ. इस इश्यू को 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की डिमांड मिली. भारत के टॉप 5 IPOs को अगर कुल सब्सक्रिप्शन के हिसाब से देखें, तो NSE का 5.71x सब्सक्रिप्शन सबसे ज्यादा है. मतलब ये कि NSE ने बड़े IPOs के बीच सब्सक्रिप्शन का एक नया रिकॉर्ड बनाया है.

NSE के IPO को मिली इस जबरदस्त सब्सक्रिप्शन डिमांड के पीछे सबसे बड़ा रोल संस्थागत निवेशकों का रहा है, जिनका हिस्सा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ. NIIs का हिस्सा भी अपने आखिरी दिन 6.55 गुना सब्सक्राइब हुआ और रिटेल निवेशकों का हिस्सा भी अपने आखिरी दिन पूरा भर गया और 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ.

निवेशकों ने करीब 50.58 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई. इन शेयरों की IPO प्राइस पर कुल बोली की वैल्यू करीब 90,000 करोड़ रुपये बैठती है. यानी NSE ने 22,561.57 करोड़ रुपये के शेयर बेचने की पेशकश की थी, लेकिन निवेशकों ने करीब 90,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदने में रुचि दिखाई.

ब्रोकरेज की राय

Macquarie का कहना है कि अगर NSE के नए प्रोडक्ट्स बाज़ार में अच्छी पकड़ बनाते हैं, तो NSE की वैल्यूएशन बढ़ सकती है. यानी बाज़ार उसे आज से ज़्यादा महंगा या ऊंचा मूल्य दे सकता है. IPO के ऊपरी प्राइस बैंड पर NSE की वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2029 के अनुमानित EV/EBITDA के लगभग 22 गुना और अनुमानित P/E के 29.5 गुना पर आंका गया है. ब्रोकरेज के मुताबिक, अगर नए प्रोडक्ट्स की स्वीकार्यता उम्मीद से बेहतर रही, तो एनालिस्ट कंपनी की कमाई के अनुमान बढ़ा सकते हैं, जिससे शेयर की कीमत को भी सहारा मिल सकता है.

JPMorgan का मानना है कि जो निवेशक भारत की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा करते हैं, उनके लिए NSE एक ऐसा शेयर है जिसकी तरफ वे बार-बार लौटेंगे. ब्रोकरेज के मुताबिक, NSE के IPO में कई विदेशी निवेशक पहली बार शामिल हुए. साथ ही, बाज़ार में नई कंपनियों के आने से निवेशकों के लिए वैल्यू और संपत्ति बन रही है.

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