Gold Price Today: सोने की कीमतों में आज यानी 28 सितंबर 2026 को ऐसी गिरावट आई है कि निवेशकों की नजर सीधे अमेरिका के अगले महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की अगली चाल पर टिक गई है. इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड आज 3% से ज्यादा टूटकर $4,140.69 प्रति आउंस तक चला गया. ये 5 अगस्त के बाद सोने का सबसे निचला स्तर है. गोल्ड फ्यूचर्स में भी 3% से ज्यादा की गिरावट है, ये 4200 डॉलर के नीचे 4,172.75 डॉलर प्रति आउंस चला गया है.
भारत में भी इसका असर साफ दिखाई दिया. MCX पर अक्टूबर गोल्ड वायदा 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के भी नीचे फिसल गया, यानी आज घरेलू मार्केट में भी सोना 4,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा टूटा है. 28 सितंबर शाम को 5:15 बजे तक ये 1,47,164 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था.
ज्वेलर्स के पास सोने की रिटेल कीमतें भी गिरी है. ibja की वेबसाइट के मुताबिक आज –
24 कैरेट गोल्ड की कीमत: ₹1,47,980/10 ग्राम
22 कैरेट गोल्ड की कीमत: ₹1,44,430/10 ग्राम
20 कैरेट गोल्ड की कीमत: ₹1,31,700/10 ग्राम
18 कैरेट गोल्ड की कीमत: ₹1,19,860/10 ग्राम
सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई
अब सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक तेज करेक्शन है या सोने के लिए आने वाले दिनों में माहौल और चुनौतीपूर्ण हो सकता है? इसके पीछे फिलहाल तीन बड़ी वजहें दिखाई दे रही हैं.
1- कच्चे तेल ने बढ़ाई महंगाई की चिंता
सोने की आज की गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक है कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है, ब्रेंट क्रूड करीब 4% की तेजी के साथ 101 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है. अब यहां सोने के लिए एक दिलचस्प स्थिति बन रही है. आमतौर पर जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने पर निवेशक सोने को सुरक्षित एसेट के तौर पर खरीदते हैं, लेकिन इस बार महंगे तेल का दूसरा असर ज्यादा प्रभावशाली हो गया है, जो है महंगाई.
अगर क्रूड लंबे समय तक $100 से ऊपर रहता है, तो ट्रांसपोर्टेशन लागत, मैन्युफैक्चरिंग और दूसरी आर्थिक गतिविधियों की लागत बढ़ सकती है. इससे अमेरिका में महंगाई के फिर से बढ़ने की चिंता गंभीर हो जाती है. महंगाई बढ़ती है तो फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों को कम करना मुश्किल होता है, जो कि सोने के लिए निगेटिव है.
यानी इस बार मिडिल ईस्ट टेंशन से मिलने वाला सोने का सेफ हेवेन सपोर्ट महंगे तेल से पैदा होने वाले ऊंची ब्याज दरों के अनुमानों की वजह से कमजोर पड़ रहा है.
2- ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी
दूसरी बड़ी वजह है फेडरल रिजर्व की मॉनिटरी पॉलिसी. 16 सितंबर को फेडर ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइटं की बढ़ोतरी की थी और बेंचमार्क रेट को 3.75%–4% की रेंज में पहुंचा दिया था. रॉयटर्स के मुताबिक फेड के अधिकारियों ने इसके बाद भी महंगाई को लेकर चिंता जाहिर की है और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की भी संभावना जताई है.
यही वजह है कि बाजार अब अक्टूबर की फेड मीटिंग्स को लेकर बाजार ज्यादा सतर्क है.
अब अगर ब्याज दरें ऊपर रहती हैं तो ये सोने के लिए निगेटिव होता है, क्योंकि गोल्ड खुद कोई ब्याज तो देता नहीं. इसलिए जब ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड ऊपर जाते हैं, तो निवेशकों के लिए बिना यील्ड वाले गोल्ड को रखने की अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है. जिससे सोने पर दबाव बढ़ता है.
3- बॉन्ड यील्ड और डॉलर
28 सितंबर को 30 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 5.523% पहुंच गई और ये 2004 के बाद के सबसे ऊंचा स्तर है. जबकि 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.220% के ऊपर चली गई. साथ ही डॉलर भी चौथाई परसेंट की मजबूती के साथ 101.165 के करीब ट्रेड कर रहा है. यील्ड की मजबूती और डॉलर की मजबूती दोनों की सोने पर दोहरा दबाव डालती है.
पहला, ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से निवेशकों को फिक्स्ड इनकम एसेट्स में अच्छे रिटर्न मिलते हैं, जिससे वो गोल्ड की बजाय इन एसेट्स की तरफ चले जाते हैं.
दूसरा, मजबूत डॉलर की वजह से विदेशी निवेशकों के लिए सोने में निवेश महंगा हो जाता है. इससे सोने की डिमांड घट जाती है और कीमतों पर दबाव आता है.
यही वजह है कि सोने की कीमत पर सिर्फ फिजिकल डिमांड या जियोपॉलिटिकल रिस्क का असर नहीं पड़ता है. बल्कि डॉलर और बॉन्ड यील्ड भी बड़ी भूमिका निभारते हैं.
सोने के लिए अगला ट्रिगर क्या है
सोने की कीमतें यहां से कहां जाएंगी, ये निर्भर है आने वाले कुछ डेटा पर. 30 सितंबर को अगस्त का PCE महंगाई डेटा आएगा. ये डेटा इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि Personal Consumption Expenditures Price Index का इस्तेमाल फेड महंगाई को मापने में इस्तेमाल करता है.
अगस्त PCE महंगाई डेटा के लिए अभी बाजार का अनुमान ये है कि हेडलाइन PCE करीब 3.8% YoY रह सकती है, यानी जुलाई के 3.7% से थोड़ा ज्यादा आ सकता है.
कोर PCE करीब 3.4% YoY आने का अनुमान है, जो कि जुलाई के 3.3% से ऊपर है. मंथली कोर PCE करीब 0.3% MoM का अनुमान है.
अगर PCE महंगाई अनुमान से ज्यादा आता है, तो बाजार में ये सेंटीमेंट्स मजबूत होंगे कि महंगाई को लेकर चिंताएं बरकरार हैं. ऐसे में फेडरल रिजर्व ब्याज दर को ऊंचा रख सकता है या फिर दरें और भी बढ़ा सकता है. इससे ट्रेजरी यील्ड को सपोर्ट मिलेगा और गोल्ड पर दबाव बढ़ेगा
इसके उलट अगर PCE अनुमान से कम आता है, तो महंगाई का दबाव कम होने का संकेत मिलेगा. इससे आगे फेड दरों में बढ़ोतरी की जरूरत को लेकर बाजार की उम्मीद कमजोर हो सकती है और सोने को राहत मिल सकती है. इसलिए अगले दो-तीन कारोबारी सत्रों में सोने के लिए PCE डेटा सबसे बड़ा ट्रिगर बन सकता है
इसके बाद शुक्रवार 2 अक्टूबर को सितंबर महीने की जॉब रिपोर्ट भी आएगी. पिछली बार अगस्त की रिपोर्ट में अमेरिकी इकोनॉमी में 1.62 लाख नॉन फार्म जॉब्स जुड़ी थीं और बेरोजगारी दर 4.1% पर बनी रही थी. अब सितंबर के लिए रॉयटर्स पोल में करीब 1 लाख नई जॉब्स जुड़ने और बेरोजगारी दर के 4.2% तक पहुंचने का अनुमान है.
सोने में Gold में आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आज की बड़ी गिरावट के बाद क्या सोना और नीचे जाएगा या यहां से रिकवरी आएगी? इसका जवाब अभी किसी एक दिशा में देना जल्दबाजी होगी. लेकिन बाजार के सामने मौजूद फैक्टर्स को देखकर यह जरूर कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में सोने में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल सकता है.

